अयोध्या में इस बार दीपोत्सव सिर्फ दीपों की रोशनी और भव्य आयोजनों के लिए ही खास नहीं होगा, बल्कि एक ऐसी पहल के लिए भी याद किया जाएगा, जो आस्था को सबके लिए सुलभ बनाने की कोशिश है. राम मंदिर में अब दृष्टिबाधित श्रद्धालु भी ज्यादा आसानी और आत्मनिर्भरता के साथ रामलला के दर्शन कर सकेंगे. इसके लिए ITC मंगलदीप शनिवार को हर भक्त श्रीराम तक अभियान शुरू कर रहा है. इसके तहत राम मंदिर में ब्रेल लिपि से युक्त रेलिंग लगाई जा रही हैं.

दरअसल, ITC मंगलदीप की हर भक्त श्रीराम तक अभियान के जरिए देशभर के श्रद्धालुओं को एक ऐसे सामूहिक प्रयास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसका सीधा लाभ दृष्टिबाधित भक्तों को मिलेगा. इसके लिए डिजिटल राम सेतु नाम से एक विशेष माइक्रोसाइट तैयार की गई है. इस वेबसाइट पर जाकर श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन के जरिए अपनी पसंद की भाषा में राम लिख सकते हैं.
इस अभियान की प्रेरणा रामायण में वर्णित राम सेतु की कथा से ली गई है. मान्यता के अनुसार, भगवान राम की सेना ने समुद्र पर पुल बनाने के लिए पत्थरों पर राम नाम लिखकर उन्हें सेतु निर्माण में लगाया था. उसी भावना को आधुनिक डिजिटल स्वरूप देते हुए ITC मंगलदीप ने देशभर के भक्तों को एक डिजिटल राम सेतु बनाने से जोड़ा है.
ब्रेल रेलिंग से दृष्टिबाधित भक्तों को मिलेगी सुविधा
राम मंदिर में ब्रेल लिपि से युक्त रेलिंग लगाने का मकसद दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं को मंदिर में आवागमन के दौरान बेहतर बनाना है. ब्रेल लिपि के जरिए वे स्पर्श के माध्यम से रास्ते और दिशा से जुड़ी जानकारी समझ सकेंगे. अक्सर धार्मिक स्थलों पर दृष्टिबाधित लोगों को दर्शन के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती है.
ऐसे में ब्रेल रेलिंग उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं. इससे उन्हें मंदिर परिसर में आगे बढ़ने, रास्ते को समझने और अधिक आत्मनिर्भरता के साथ दर्शन करने में मदद मिलेगी. इस पहल के तहत 25 दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं को अयोध्या बुलाया गया है. ये श्रद्धालु रामलला के दर्शन करेंगे और ब्रेल रेलिंग के अनुभव को शेयर करेंगे. अभियान का पहला चरण पूरा होने पर इन रेलिंग का उद्घाटन भी किया जाएगा.
7 नवंबर को अयोध्या में होगा विशेष आयोजन
दीपोत्सव के अवसर पर 7 नवंबर को अयोध्या में इस अभियान को विशेष रूप से सामने लाया जाएगा. कार्यक्रम के तीन प्रमुख हिस्से होंगे
1. राम सेतु का उद्घाटन और रामलला के दर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 9 से 9:30 बजे के बीच राम सेतु के पहले चरण के उद्घाटन से होगी. इस मौके पर 25 दृष्टिबाधित श्रद्धालु रामलला के दर्शन करेंगे. ब्रेलसक्षम रेलिंग के इस्तेमाल से उन्हें मंदिर में अधिक सहजता और स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. इस दौरान उनके अनुभव और प्रतिक्रियाएं भी साझा की जाएंगी.
2. सरयू घाट पर दृष्टिबाधित कलाकारों का सांस्कृतिक कार्यक्रम
अभियान के तहत सरयू घाट पर भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा. इसमें दृष्टिबाधित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि प्रतिभा, कला और भक्ति किसी शारीरिक अक्षमता की मोहताज नहीं हैं.
3. दृष्टिबाधित श्रद्धालु भी जलाएंगे दीप
इस बार दीपोत्सव में दृष्टिबाधित लोगों की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया जाएगा. आयोजन के दौरान कुछ दीप दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं की ओर से जलाए जाएंगे. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित दीपोत्सव में इस बार भी सबसे अधिक दीप जलाने का विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा.
डिजिटल भागीदारी से सामाजिक बदलाव की कोशिश
इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को अयोध्या आने की जरूरत नहीं है. देश के किसी भी हिस्से में बैठकर मोबाइल के जरिए राम नाम लिखकर इस पहल से जुड़ा जा सकता है. ITC मंगलदीप का प्रयास है कि डिजिटल माध्यम से देशभर के लोगों की भागीदारी को एक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा जाए.
राम नाम लिखने की यह छोटीसी पहल दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में दर्शन को अधिक सुलभ बनाने के बड़े प्रयास का हिस्सा बनेगी. दीपोत्सव के बाद 8 नवंबर से इस अभियान के प्रभाव और आयोजन से जुड़ी कहानियों को देशभर में शेयर किया जाएगा. इसमें दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं के अनुभव, ब्रेल रेलिंग की उपयोगिता और सामूहिक भागीदारी से तैयार हुए इस प्रयास को प्रमुखता दी जाएगी.