: देश में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने और सौर एवं पवन ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत देशभर में 92 GWh क्षमता वाले ग्रिडस्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित किए जाएंगे।

योजना को वित्तीय साल 202627 से 203031 तक लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश में बिजली को स्टोर करने की क्षमता बढ़ाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर बिजली की उपलब्धता बनी रहे। सरकार के मुताबिक, इस योजना से 203132 तक देश की 411 GWh एनर्जी स्टोरेज क्षमता की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत मौजूदा क्षमता के मुकाबले करीब 170 प्रतिशत अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी।
60 GWh पंप्ड स्टोरेज और 30 GWh बैटरी सिस्टम बनेंगे
सरकार की इस योजना में तीन तरह की एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसमें 60 GWh क्षमता के हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट , 30 GWh क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और 2 GWh क्षमता की नई एवं वैकल्पिक स्टोरेज तकनीकें विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं पर कुल 97,600 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा
योजना का एक बड़ा उद्देश्य बैटरी निर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी है। इसके लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। यानी इन परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और सामग्रियों में निर्धारित हिस्सेदारी भारत में निर्मित होनी चाहिए। इससे देश में बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
प्रतिस्पर्धी बोली से होगा परियोजनाओं का आवंटन
इस योजना के तहत एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। बैटरी और हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र होंगी। वहीं, वैकल्पिक एनर्जी स्टोरेज तकनीकों से जुड़ी परियोजनाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाएं लागू कर सकेंगी।
बिजली आपूर्ति और ग्रिड की स्थिरता होगी मजबूत
एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करना आसान होगा। दरअसल, सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन में और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम एवं हवा की गति पर निर्भर करता है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय ग्रिड में भेजा जा सकेगा। इससे बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी, ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी और चौबीसों घंटे सस्ती एवं भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।