सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतों में 500 रुपए की मामूली रिकवरी देखी गई और यह 1,42,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. दिवाली से पहले ज्वैलर्स और रिटेलर्स की ओर से की गई खरीदारी ने सोने को उस समय सहारा दिया, जब अक्टूबर में भारी बिकवाली के बाद इसकी कीमतों में काफी गिरावट आ गई थी. शनिवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. वहीं, स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, चांदी की कीमत 1.86 लाख रुपए प्रति किलोग्राम पर स्थिर बनी रही.

व्यापारियों ने बताया कि त्योहार से पहले ज्वैलर्स और रिटेलर्स ने खरीदारी बढ़ाई है, जिससे घरेलू बाजार में सोनेचांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से भी डॉलर में तय होने वाली कीमती धातुओं की लागत बढ़ गई है. यह रिकवरी अक्टूबर में आई भारी गिरावट के बाद हुई है. 30 सितंबर को सोने की कीमत 1,49,300 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, जिसमें से अक्टूबर के दौरान 7,300 रुपए की कमी आई थी. इसी अवधि में चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखी गई, जिसकी कीमत 2.32 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से 46,000 रुपए गिर गई.
विदेशी बाजारों में सोना और चांदी
ब्रोकरेज फर्म ‘लेमन’ के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अक्टूबर के अंत में देखी गई भारी बिकवाली के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में रिकवरी की कोशिश दिखी. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, तेल की ऊंची कीमतों का दबाव अभी भी कीमती धातुओं पर बना हुआ है. ग्लोबल मार्केट्स, स्पॉट गोल्ड 24.18 डॉलर की बढ़त के साथ 3,899.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 50.25 डॉलर प्रति औंस हो गई. सोने में यह रिकवरी शुक्रवार को आई भारी गिरावट के बाद हुई है. शुक्रवार को सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थी, जो एक साल से भी अधिक समय में इसका सबसे निचला स्तर था.
आगे कैसी रह सकती है गोल्ड की चाल?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोमवार को ग्लोबल मार्केट्स में स्पॉट गोल्ड की कीमत में सुधार हुआ और यह 3,900 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई. ऊंची ब्याज दरों की संभावना और 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का माहौल सुस्त बना रहा. उन्होंने आगे कहा कि निवेशक सतर्क हैं और बाजार में उतारचढ़ाव बने रहने की संभावना है, क्योंकि वे अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी और मध्यावधि चुनाव के नतीजों का आकलन कर रहे हैं.
मिरे एसेट शेरखान में कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह गिरावट ऐसी खबरों के बीच आई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन और तेहरान के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए कूटनीति को एक और मौका देने को तैयार हैं. सिंह को बाजार में ठहराव की उम्मीद है. निकट भविष्य में कीमतों में और कमजोरी आने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और कीमतें 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बनी हुई हैं.