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कोर्ट में सवाल, फिर भी धड़ाधड़ इस्तेमाल: यूपी में हर दिन औसतन 25 लोगों पर लग रहा गैंगस्टर एक्ट!​

उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई कार्रवाई का आंकड़ा पेश किया. 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च 2017 से अब तक इस कानून […]

उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई कार्रवाई का आंकड़ा पेश किया. 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च 2017 से अब तक इस कानून के तहत 88,973 लोगों पर कार्रवाई की गई है. सरकार ने यह भी बताया कि 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की गई.

इन आंकड़ों के जरिए सरकार अपराध और संगठित गिरोहों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को प्रभावी बता रही है. लेकिन इस आंकड़े को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कार्रवाई का मतलब हर मामले में दोष साबित होना नहीं है. किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना, उसकी गिरफ्तारी होना और अदालत से सजा मिलना तीन अलगअलग बातें हैं. इसलिए कार्रवाई की संख्या के साथ यह देखना भी जरूरी है कि कितने मामलों में आरोप साबित हुए और कितने आरोपी अदालत से बरी हुए.

रोजाना औसतन 25 लोगों पर लगा कानून

लेकिन इस कार्रवाई के आंकड़ों के साथ एक अहम सवाल भी जुड़ा है. आखिर योगी सरकार के कार्यकाल में कितने लोगों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया? अगर रोजाना औसतन 25 लोगों पर यह कानून लगाया गया, तो साल भर में यह संख्या कितनी हो जाती है? किन जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई और क्या इस कानून के इस्तेमाल को लेकर अदालतों ने भी सवाल उठाए हैं? इन सवालों को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि गैंगस्टर एक्ट एक सख्त कानून है और इसके इस्तेमाल का असर आरोपी की आजादी, संपत्ति और कानूनी अधिकारों पर पड़ सकता है.

गैंगस्टर एक्ट के आंकड़े क्या बताते हैं?

उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल ऐसे लोगों के खिलाफ किया जाता है जिन पर गिरोह बनाकर या संगठित तरीके से अपराध करने के आरोप हों. इसके तहत कुछ मामलों में अपराध से जुड़ी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.

सरकार की ओर से अक्टूबर 2026 में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक:

  • 88,973 लोगों पर कार्रवाई: मार्च 2017 से अक्टूबर 2026 तक का बताया गया आंकड़ा.
  • 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति: सरकार के मुताबिक, इतनी संपत्ति जब्त की गई.
  • कार्रवाई और सजा में अंतर: इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि सभी आरोपियों को अदालत से दोषी ठहराया गया है.
  • 80 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां: इसी अवधि में इस कानून के तहत इतनी गिरफ्तारियां होने की जानकारी दी गई.

गैंगस्टर एक्ट क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट 1986 में बनाया गया था. इसका मकसद ऐसे लोगों और गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करना है, जो संगठित तरीके से अपराध करते हैं और अपराध के जरिए फायदा कमाते हैं. इसमें जमीन पर कब्जा, नशीले पदार्थों का कारोबार, धोखाधड़ी और दूसरे संगठित अपराध जैसे मामले शामिल हो सकते हैं.

इस कानून के तहत पुलिस किसी आरोपी के खिलाफ गैंग चार्ट तैयार करती है. इसमें बताया जाता है कि आरोपी किस गिरोह से जुड़ा है और उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार क्या है. संबंधित अधिकारियों की जांच और मंजूरी के बाद ही इस कानून के तहत मामला दर्ज किया जाता है.

मार्च 2017 से दिसंबर 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में करीब 88,973 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का जिक्र किया गया था. इस अवधि को करीब आठ साल मानें, तो सालाना औसत लगभग 10 हजार लोगों का बैठता है.

सबसे ज्यादा मुकदमे किस जिले में दर्ज हुए?

जिले के हिसाब से आंकड़ों में प्रतापगढ़ का नाम सबसे ऊपर आया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की 12 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई 2024 से 12 अप्रैल 2025 के बीच प्रतापगढ़ में गैंगस्टर एक्ट के तहत 99 FIR दर्ज हुई थीं. इसके बाद बुलंदशहर में 91, मुजफ्फरनगर में 86, चंदौली में 71 और मेरठ में 66 FIR दर्ज की गईं. इस अवधि में प्रदेश के 75 जिलों में कुल 1,583 FIR दर्ज हुई थीं. वहीं आजमगढ़ , अलीगढ़ , सोनभद्र , गोरखपुर , और बाराबंकी का भी डेटा सामने आया है.

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?

गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल पर अदालतों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि कहीं इस सख्त कानून का इस्तेमाल गलत तरीके से तो नहीं हो रहा. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में कुछ मामलों की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस इस कानून का इस्तेमाल छोटे अपराधों के आरोपियों के खिलाफ भी कर रही है, जबकि संगठित अपराध करने वाले बड़े गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है. कोर्ट ने राज्य सरकार से आंकड़े और जानकारी भी मांगी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी मई 2025 में लाल मोहम्मद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में कहा कि केवल कई आरोपियों के नाम एक साथ जोड़ देने से किसी गिरोह का सदस्य होना साबित नहीं हो जाता. इसके लिए संगठित अपराध में उनकी भूमिका और आपसी संबंधों के सबूत जरूरी हैं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक झड़प में शामिल होने भर से गैंगस्टर एक्ट लगाना उचित नहीं है, जब तक संगठित या लगातार अपराध करने के आधार न हों.

हाई कोर्ट ने भी मांगा 10 साल का हिसाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल पर चिंता जताई. दिसंबर 2025 में अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से पिछले 10 साल का जिलेवार रिकॉर्ड मांगा था. इसमें यह जानकारी शामिल करने को कहा गया कि कितने मुकदमे दर्ज हुए, कितने मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुए, कितने लोगों को सजा मिली और कितने आरोपी बरी हुए.

हाई कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस सख्त कानून का इस्तेमाल छोटे अपराधों के आरोपियों के खिलाफ भी किया जा रहा है, जबकि संगठित अपराध करने वाले बड़े गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है.

अदालतों की इन टिप्पणियों से साफ है कि केवल मुकदमों और गिरफ्तारियों की संख्या से कानून की सफलता तय नहीं की जा सकती. यह भी देखना होगा कि पुलिस की कार्रवाई कितनी सही थी और कितने मामलों में आरोप साबित हुए.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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