: केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संभावित सत्र में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े परिसीमन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की तैयारी है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान संशोधन के लिए जरूरी दोतिहाई बहुमत जुटाने की है। अप्रैल में पेश किया गया संविधान बिल लोकसभा में जरूरी बहुमत हासिल नहीं कर सका था।

अप्रैल में बहुमत नहीं जुटा पाई थी सरकार
इस साल अप्रैल में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक संसद में लाए गए थे। इनमें संविधान बिल, परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून बिल शामिल थे। संविधान संशोधन बिल को अनुच्छेद 368 के तहत दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत थी। लोकसभा में जरूरी दोतिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण इस पर आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे जुड़े परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल भी आगे नहीं बढ़ पाए।
सरकार के सामने फिर वही नंबर गेम
अब एक बार फिर सरकार के स्तर पर संख्याबल जुटाने की कोशिशों की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार DMK समेत कुछ क्षेत्रीय और छोटे दलों से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को सामान्य बहुमत से ज्यादा समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर संसद के नंबर गेम के केंद्र में आ गया है।
DMK और छोटे दलों पर नजर
संभावित विशेष सत्र को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिशों की है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार DMK और कुछ छोटे दलों के संपर्क में है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार को संविधान संशोधन के लिए जरूरी दोतिहाई बहुमत का पक्का समर्थन हासिल हो चुका है। इसलिए विशेष सत्र और विधेयकों की टाइमिंग को लेकर अंतिम तस्वीर सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र
इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खड़गे ने कहा कि किसी नए संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने अप्रैल में विधेयक के विफल होने का भी जिक्र किया।
संसद का सत्रावसान नहीं होने पर भी सवाल
खड़गे ने संसद के मानसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान नहीं होने पर भी सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इसे असामान्य स्थिति बताते हुए सरकार से नए परिसीमन प्रस्तावों पर व्यापक चर्चा की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और महिलाओं के लिए एकतिहाई आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार किया जाना है। लेकिन इसके लिए संविधान में बदलाव की जरूरत है। अप्रैल में सरकार का पहला प्रयास जरूरी दोतिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण अटक गया था। अब विशेष सत्र की संभावित चर्चा के बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिर से पर्याप्त संख्या जुटाने की है।