CJP Founder Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी पार्टी के विरोध प्रदर्शनों को लेकर लगाए जा रहे अराजकता के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कारोबारियों को नुकसान नहीं होता, बल्कि शहर में पाबंदियां लगाने, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और नागरिकों की आवाजाही रोकने जैसे सरकारी फैसलों से आम लोगों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
शांतिपूर्ण विरोध को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
अभिजीत दिपके ने कहा कि CJP अपनी स्थापना के समय से ही महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने मुंबई , पुणे , जयपुर , लखनऊ , बेंगलुरु और नागपुर में प्रदर्शन आयोजित किए और सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे।
दिपके ने जयपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां उन पर व्यक्तिगत हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं देने का फैसला किया।
उनके मुताबिक, पार्टी शारीरिक बल के बजाय संविधान में दिए गए अधिकारों के जरिए अपनी बात रखने में विश्वास करती है।
Businesses do not suffer because of peaceful protests. They suffer when the govt decides to shut down an entire city, suspend internet services and restrict the movement of its own citizens and turn the city into a warzone.
Since its inception, the Cockroach Janta Party has…
— Abhijeet Dipke October 16, 2026
सरकार से सवाल करना अराजकता नहीं दिपके
CJP फाउंडर दिपके ने कहा कि सत्ता से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र का हिस्सा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध की आवाज उठाने के कारण उनकी पार्टी को लगातार अराजकतावादी बताने का प्रयास किया जा रहा है।
दिपके ने सत्तारूढ़ दल के पुराने राजनीतिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो दल विपक्ष में रहते हुए विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक अधिकार मानता था, उसे सत्ता में आने के बाद उन्हीं अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने से बचना चाहिए।
इंटरनेट, आवाजाही बंद करने पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने सरकारी पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहरों को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने और नागरिकों की आवाजाही सीमित करने जैसे फैसलों का असर आम जनता और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि CJP किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही, बल्कि उन संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल की बात कर रही है जो देश के प्रत्येक नागरिक को मिले हुए हैं।
लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं दिपके
अपने बयान के अंत में दिपके ने नागरिकों से जनप्रतिनिधियों से सवाल करने, जवाबदेही मांगने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार की जिम्मेदारी लोगों की बात सुनना है, न कि उनकी आवाज दबाना।
दिपके ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल मतदान और चुनाव परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की भागीदारी और सवाल पूछने के अधिकार से भी मजबूत होती है।