देश में शारदीय नवरात्र चल रहे हैं. पूरा देश देवी की भक्ति में डूबा है. कहीं, पंडाल सजे हैं. कहीं गरबाडांडिया की धूम है. वहीं, कुछ राज्यों में नवरात्र के दौरान घरों में गुड़ियों की झांकी सजाने की परंपरा है. देवी की आराधना के इस पर्व को आमतौर पर भले ही नवरात्र या नवरात्रि कहा जाता है, लेकिन खासतौर पर दक्षिण के राज्यों में इसे अलगअलग नामों से जाना जाता है. उसके साथ परम्पराओं में भी अंतर देखने को मिलता है.

इसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल से करते हैं. यहां पर्व दुर्गा पूजा या दुर्गा पूजो के नाम से जाना जाता है. समुदाय मिलकर अस्थायी पंडाल बनाते हैं, जिनमें कलात्मक मूर्तियां, भव्य सजावट और रचनात्मक थीम देखने को मिलती हैं. मुख्य उत्सव षष्ठी से दशमी तक चलता है. इस पर्व की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2021 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया. यह बंगाल ही नहीं, पूरे भारत के लिए गर्व की बात है.
तमिलनाडु में बोम्मई गोलू कहलाता है
तमिलनाडु में यह त्योहार नवरात्रि और बोम्मई गोलू कहलाता है. यहां परिवार अपने घरों में सीढ़ीनुमा चबूतरों पर गुड़ियों और मूर्तियों की झांकी सजाते हैं. गुड़ियों को सजाने की यह परंपरा तमिलनाडु और पड़ोसी दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में नवरात्रि की खास पहचान है.
तमिलनाडु का बोम्मई गोलू फेस्टिवल.
आंध्रपदेश में बोम्माला कोलुवु और तेलंगाना में बथुकम्मा
आंध्रप्रदेश में इस फेस्टिवल को बोम्माला कोलुवु कहते हैं. यह परिवार की परंपराओं, रचनात्मकता और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को दर्शाता है. इस दौरान महिलाएं और बच्चे एकदूसरे के घर जाकर गुड़ियों की इस सजावट को देखते हैं. भजनकीर्तन करते हैं और प्रसाद का आदानप्रदान करते हैं.
तमिलनाडु में बोम्मई गोलू.
तेलंगाना में इस त्योहार को बथुकम्मा कहते हैं. इसका मतलब होता है मां गौरी जीवित हैं. 9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान महिलाएं सुंदर और सुगंधित फूलों को सात अलगअलग परतों में सजाकर देवी गौरी की प्रतिमा बनाती हैं. पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य करती हैं और लोकगीत गाती हैं.
केरल का विद्यारंभम.
केरल में विद्यारंभम कहलाता है
केरल के विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों में बड़े पैमाने पर इसका आयोजन होता है. कार्यक्रम में बच्चे को ज्ञान की देवी सरस्वती के सामने बैठाया जाता है. पुरोहित, विद्वान या परिवार के वरिष्ठ सदस्य बच्चे की तर्जनी उंगली पकड़कर उसे कच्चे चावल से भरी थाली या प्लेट पर पहला अक्षर लिखना सिखाते हैं. कुछ जगहों पर सोने की अंगूठी या शहद में डूबी हुई छड़ी से बच्चे की जीभ पर भी पवित्र अक्षर या मंत्र लिखा जाता है.
देश दूसरे हिस्से में क्या हैं नाम?
कर्नाटक में इस पर्व का सबसे प्रसिद्ध रूप मैसूरु दशहरा कहते हैं. यह उत्सव देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय से जुड़ा है. इस दौरान औजारों, वाहनों, वाद्ययंत्रों और काम से जुड़ी चीजों की पारंपरिक रूप से पूजा की जाती है. यह परंपरा बताती है कि श्रम और साधनों का सम्मान भी इस पर्व का हिस्सा है.
बंगाल की दुर्गा पूजा.
पूर्वी भारत के कई और राज्यों में भी इसे दुर्गा पूजा या दुर्गा पूजो ही कहा जाता है. ओडिशा, असम और त्रिपुरा में भी विधिविधान से पूजाअनुष्ठान होते हैं. सामुदायिक आयोजन किए जाते हैं और सजेधजे पंडाल इस उत्सव की पहचान होते हैं.
गुजरात में शरद ऋतु का यह त्योहार सबसे ज्यादा नवरात्रि के रूप में जाना जाता है. डांडिया का आयोजन होता है.वहीं, हिमाचल प्रदेश में दशहरे के समय सबसे प्रसिद्ध आयोजन कुल्लू दशहरा है, जो कुल्लू घाटी में मनाया जाता है. इसकी खास बात यह है कि देश के कई हिस्सों में जहां दशहरे के साथ उत्सव का समापन होता है, वहीं कुल्लू दशहरा परंपरागत रूप से विजयादशमी के दिन शुरू होता है और कई दिनों तक चलता है.