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CJI Letter Kharge Rahul: CJI का खरगे-राहुल को पत्र, लिखा- लंबित मामलों पर बैठक करना शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ​

CJI Letter Kharge Rahul: बीते दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से राहुल गांधी के ज्ञापन की बात को लेकर सीजेआई ने 11 अक्टूबर को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना […]

CJI Letter Kharge Rahul: बीते दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से राहुल गांधी के ज्ञापन की बात को लेकर सीजेआई ने 11 अक्टूबर को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान के शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा। 

उन्होंने दोनों नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

CJI Surya Kant had written to Rajya Sabha LoP Mallikarjun Kharge and Lok Sabha LoP Rahul Gandhi on 11th October.

“…convening a meeting to discuss pending cases would wholly contravene the principle of Separation of Powers, an intrinsic facet of the basic structure doctrine of… pic.twitter.com/wcEk5N3KDO

— ANI October 12, 2026

न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं हो सकता

ने पत्र में कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा रहे शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत होगा। यह स्थापित न्यायिक मर्यादाओं और नैतिकता के भी अनुरूप नहीं होगा।

प्रशासनिक स्तर पर मुद्दों को सुलझाने का अधिकार नहीं

CJI ने इस पत्र में स्पष्ट कर दिया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास पत्र में उठाए गए मुद्दों को प्रशासनिक स्तर पर निपटाने की शक्तियां नहीं हैं। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा सहित अपनी अन्य शक्तियों के तहत अदालत नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने के लिए बाध्य है।

नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत प्रतिबद्ध

पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिक कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसी भी समय अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसी आधार पर CJI ने खरगे और राहुल गांधी को प्रशासनिक पक्ष में ज्ञापन सौंपने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी।

13 अक्टूबर को समान मुद्दों से जुड़े मामलों की सुनवाई

CJI सूर्यकांत ने पत्र में यह भी बताया कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े कुछ मामले मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेता चाहें, तो सोमवार, 12 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच में व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल कर सकते हैं। इसके अलावा ईफाइलिंग के जरिए किसी भी दिन और किसी भी समय याचिका दायर करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

जल्द सुनवाई का दिया भरोसा

CJI ने आश्वासन दिया कि यदि इस मामले में याचिका दाखिल की जाती है, तो कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी। पत्र का मुख्य संदेश यह है कि नागरिकों के अधिकारों और उठाए गए मुद्दों पर अदालत में न्यायिक प्रक्रिया के जरिए विचार किया जा सकता है, लेकिन लंबित मामलों पर चर्चा के लिए प्रशासनिक बैठक बुलाना उचित नहीं होगा।

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संपादकीय टीम

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