Bhagalpur News: भागलपुर के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और जालसाजी का ऐसा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शिक्षा विभाग की नाक के नीचे कागजों पर ‘तनुश्री’ नाम की एक पूरी तरह से काल्पनिक शिक्षिका की बहाली दिखा दी गई. बिना किसी वास्तविक तैनाती के इस अदृश्य शिक्षिका के नाम पर सरकारी खजाने से लगातार वेतन जारी होता रहा और जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 52 लाख की अवैध निकासी कर ली. इस घोटाले का पर्दाफाश होते ही हड़कंप मच गया है.

मामले का संज्ञान लेते हुए जोगसर थाने में 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी संविदा कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में ले लिया है, वहीं डीपीओ शशि चंद चौधरी से जोगसर थाने में गहन पूछताछ की जा रही है.
कैसे रची गई साजिश? बर्खास्तगी के बाद खुला राज
इस पूरे फर्जीवाड़े के तार जिला शिक्षा कार्यालय की स्थापना शाखा में पूर्व में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी और संचिका प्रभारी की मिलीभगत से जुड़े हैं. कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज के कामकाज में भारी अनियमितताएं दिखने पर स्थानीय शिक्षकों ने विरोध जताया था. इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार ने त्वरित कार्रवाई कर उसे सेवा से मुक्त कर दिया था.
ऑपरेटर के हटने के बाद जब फाइलों की पड़ताल शुरू हुई, तो काल्पनिक शिक्षिका तनुश्री के नाम से वेतन निकासी का मामला पकड़ा गया. संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक से पूछताछ की गई तो उन्होंने हलफनामा देकर साफ कर दिया कि उनके विद्यालय में ‘तनुश्री’ नाम की कोई शिक्षिका कभी नियुक्त ही नहीं हुई थी.
फर्जी PAN, PRAN और बैंक अकाउंट से खेला गया खेल
जालसाजों ने सरकारी सिस्टम को चकमा देने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था. बर्खास्त कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज ने किसी अज्ञात व्यक्ति के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर तनुश्री के नाम से फर्जी प्राकृत सेवानिवृत्ति खाता संख्या जनरेट करवा लिया. PRAN नंबर के आधार पर फर्जी बैंक खाता खुलवाया गया. इसके बाद हर महीने जब असली शिक्षकों का वेतन भुगतान बिल ट्रेजरी भेजा जाता था, तो फाइल में चालाकी से तनुश्री का नाम और बैंक खाता नंबर जोड़ दिया जाता था. मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच लगभग 52 लाख फर्जी खाते में भेजे गए, जिन्हें आरोपियों ने तुरंत निकाल लिया.
73 लाख की तीसरी कोशिश में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
सफलता मिलने के बाद आरोपियों के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने अगस्त 2026 में 46 लाख की एक और बड़ी राशि उसी खाते में ट्रांसफर कराई, लेकिन असामान्य ट्रांजैक्शन देखकर बैंक ने खाते को होल्ड कर दिया. इसके बाद आरोपियों ने 73 लाख की तीसरी भारीभरकम राशि ट्रांसफर करने की कोशिश की, जिसे बैंक ने रिजेक्ट कर दिया और पूरा घोटाला उजागर हो गया.
प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने पुष्टि की है कि मामले में 6 नामजद आरोपियों पर FIR दर्ज कर ली गई है. हिरासत में लिए गए संविदा कर्मी अविनाश राज, उसकी पत्नी और संचिका प्रभारी की भूमिका की गहन जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके.