टेस्ला, स्पेसएक्स, एक्स और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क इन दिनों भारत में चर्चा में हैं. दुनिया के सबसे अमीर शख्स मस्क इस बार कोई नया इनोवेशन या भारत यात्रा को लेकर नहीं, बल्कि अपने तीखे बयानों के कारण सुर्खियों में हैं. उन्होंने हाल ही में भारत में स्टारलिंक की सर्विस शुरू होने में हो रही देरी को लेकर उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधा है. पहले मस्क ने भारत के कुछ उद्योगपतियों को ‘ओलिगार्क्स’ बताया और फिर सीधे सवाल उठाया कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं?

एलन मस्क के इन बयानों ने उनके गुस्से और प्रतिक्रिया देने के तरीके को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है. कारोबार और तकनीक के अलावा उनके सार्वजनिक बयान भी अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. जब उनके कारोबारी फैसलों, कंपनियों या विचारों को चुनौती मिलती है, तो कई बार उनकी प्रतिक्रिया तीखी और टकराव वाली रही है. पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है.
भारत में स्टारलिंक की एंट्री में हो रही देरी को लेकर मुकेश अंबानी पर सवाल उठाने वाला उनका हालिया बयान भी इसी चर्चा को फिर सामने ले आया है. आइए जानते हैं कबकब ऐसा हुआ है, जब एलन मस्क की बौखलाहट खुलकर सामने आई.
1. डोनाल्ड ट्रंप से भी हुई तीखी बहस
जून 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के बीच सार्वजनिक टकराव देखने को मिला. मस्क कभी ट्रंप की प्रशासनिक टीम का हिस्सा थे. लेकिन अलग होने के बाद मस्क ने ट्रंप के खर्च और टैक्स से जुड़े विधेयक की आलोचना की. इसके बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर एकदूसरे पर निशाना साधा. मस्क ने ट्रंप के महाभियोग की संभावना का भी जिक्र किया, जबकि ट्रंप ने मस्क की कंपनियों को मिलने वाली सरकारी सहायता और ठेकों पर सवाल उठाए. कुछ दिनों बाद मस्क ने स्वीकार किया कि ट्रंप को लेकर उनकी कुछ पोस्ट हद से आगे निकल गई थीं.
2. भारत में टेस्ला की एंट्री पर भी फंसा था पेंच
भारत में टेस्ला की एंट्री का रास्ता कई साल तक इम्पोर्ट ड्यूटी, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सरकार की शर्तों को लेकर अटका रहा. एलन मस्क चाहते थे कि कंपनी पहले भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कारें बेचकर बाजार की मांग को समझे, लेकिन भारत सरकार की प्राथमिकता थी कि विदेशी कंपनियां देश में निवेश करें और यहां गाड़ियों का निर्माण भी करें. आखिरकार, टेस्ला ने जुलाई 2025 में मुंबई में अपना पहला शोरूम खोला. हालांकि, कंपनी ने शुरुआत में भारत में कारों का निर्माण करने के बजाय विदेश में बनी गाड़ियों को आयात करके बेचना चुना. टेस्ला और भारत सरकार के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह विदेशी इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाला आयात शुल्क था.
3. विज्ञापन देने वाली कंपनियों से भिड़ गए
नवंबर 2023 में एक्स पर एक विवादित यहूदीविरोधी पोस्ट का समर्थन करने के बाद कई बड़ी कंपनियों ने इस प्लेटफॉर्म पर अपने विज्ञापन रोक दिए. इससे एक्स की विज्ञापन से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई. न्यूयॉर्क टाइम्स के डीलबुक समिट में जब मस्क से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने विज्ञापन देने वाली कंपनियों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां विज्ञापन के पैसे के जरिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं, तो उन्हें ऐसा करना बंद कर देना चाहिए. इस बयान ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं.
4. एलन मस्क और ट्विटर का विवाद
अप्रैल 2022 में एलन मस्क ने 54.20 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से कुल 44 अरब डॉलर में ट्विटर को खरीदने की घोषणा की थी. जुलाई 2022 में उन्होंने यह कहते हुए सौदे से पीछे हटने की कोशिश की कि ट्विटर यह साबित करने में विफल रहा है कि प्लेटफॉर्म पर स्पैम और फर्जी अकाउंट्स की संख्या 5 फीसदी से कम है. ट्विटर ने सौदे को पूरा कराने के लिए डेलावेयर की अदालत में मस्क के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया. अक्टूबर 2022 के अंत में मस्क ने आखिरकार 44 अरब डॉलर में ट्विटर का अधिग्रहण पूरा कर लिया. उन्होंने इसे निजी कंपनी बनाया और बाद में इसका नाम बदलकर ‘एक्स’ कर दिया. अधिग्रहण के तुरंत बाद मस्क ने तत्कालीन सीईओ पराग अग्रवाल समेत कई बड़े अधिकारियों को कंपनी से हटा दिया था.
5. अमेरिकी नियामक संस्था पर साधा निशाना
साल 2018 में टेस्ला को निजी कंपनी बनाने की योजना को लेकर मस्क के एक ट्वीट ने विवाद खड़ा कर दिया था. उन्होंने दावा किया था कि कंपनी को निजी बनाने के लिए फंडिंग का इंतजाम हो गया है. इस मामले में अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने उन पर निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया. बाद में मस्क ने आयोग के साथ समझौता किया और जुर्माना भरने पर सहमति जताई.
आखिर क्यों चर्चा में रहता है मस्क का गुस्सा?
मस्क से जुड़े इन मामलों में एक समान बात नजर आती है. वह विवादों पर अक्सर सार्वजनिक मंचों पर ही जवाब देते हैं. कभी नियामक संस्था पर तंज कसते हैं, कभी विज्ञापनदाताओं को चुनौती देते हैं और कभी राजनीतिक सहयोगियों से भिड़ जाते हैं. भारत में स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में देरी का मामला भी फिलहाल आरोपों और सरकारी प्रक्रियाओं के बीच चर्चा में है. अब देखना होगा कि मस्क के इन बयानों का भारत में स्टारलिंक की शुरुआत पर क्या असर पड़ता है?