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चिड़चिड़ापन, नींद में कमी, कहीं ये थायराइड के लक्षण तो नहीं…एक्सपर्ट से जानें​

थायराइड हार्मोन के इंबैलेंस की समस्या किसी भी उम्र के इंसान को परेशान कर सकती है. तितली जैसे आकार की थायराइड ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को एनर्जी में बदलने से लेकर हार्टबीट और शरीर के तापमान तक को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है. थायराइड हार्मोन का बढ़ना और घटना […]

थायराइड हार्मोन के इंबैलेंस की समस्या किसी भी उम्र के इंसान को परेशान कर सकती है. तितली जैसे आकार की थायराइड ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को एनर्जी में बदलने से लेकर हार्टबीट और शरीर के तापमान तक को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है. थायराइड हार्मोन का बढ़ना और घटना दोनों ही नुकसानदायक रहता है. हमारा शरीर दोनों ही सिचुएशन में कुछ संकेत देता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इस आर्टिकल में एक्सपर्ट से जानेंगे कि थायराइड हार्मोन इंबैलेंस होने पर क्या लक्षण दिखाई देते हैं.

थायराइड की समस्या मुख्य रूप से आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है और खासकर महिलाओं में ये ज्यादा देखने को मिलती है. इसके अलावा कुछ लोगों में ये अनुवांशिक भी हो सकती है. इसपर अगर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है. इससे आपके दिल से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पर असर हो सकता है. चलिए जान लेते हैं थायराइड हार्मोन इंबैलेंस के लक्षण.

दो तरह का होता है थायराइड इंबैलेंस

थायराइड की समस्या को भी दो तरह से देखते हैं जैसे जब आपकी थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हर्मोन नहीं बना पा रही हो तो ये हाइपोथायरायडिज्म कहलाता है. वहीं जब ग्रंथि से जरूरत से ज्यादा हार्मोन बन रहा हो तो हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति होती है.

थायराइड के न्यूरोलॉजिकल लक्षण

मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज, इंटरनल मेडिसिन की डायरेक्टर डॉक्टर मीनाक्षी जैन कहती हैं कि थायराइड डिसऑर्डर में आपको न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी हो सकते हैं. जिसे आपको ‘हाइपो इरिटेबिलिटी’ यानी चिड़चिड़ापन बहुत ज्यादा हो जाना, डिप्रेशन, नींद न आना या बहुत ज्यादा नींद आना, एंग्जायटी, मेमोरी में समस्या होना, चलतेचलते पैर लड़खड़ा जाना, जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि थायराइड हार्मोन की कमी होने या फिर ज्यादा होना…दोनों से आपके नर्वस सिस्टम से जुड़े प्रॉब्लम हो सकते हैं.

image:Pexels

ज्यादा कमी हो सकती है गंभीर

डॉक्टर मीनाक्षी जैन का कहना है कि कई बार थायराइड हार्मोन्स की बहुत ज्यादा कमी होने से कोमा और बेहोशी जैसी महसूस हो सकती है. थायराइड हार्मोन के ज्यादा बढ़ने से भी इरिटेबिलिटी, हार्ट बीट का बढ़ जाना, घबराहट होना, पसीना आने लगना, नसों में कमजोरी होना, जैसे लक्षण हो सकते हैं. अगर आपको इस तरह के कोई भी लक्षण हैं तो अपना थायराइड का चेकअप कराएं.

महिलाएं दें ज्यादा ध्यान

एक्सपर्ट कहती हैं कि थायराइड की समस्या महिलाओं में खासकर ज्यादा होती है. दरअसल महिलाएं अपनी लाइफ में प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी से लेकर मेनोपॉज तक कई बार बड़े हार्मोन फेज से गुजरती हैं. इसके अलावा मानसिक तनाव ज्यादा लेना भी इसका एक बड़ा कारण है. ऐसे में जरूरी है कि आप लक्षण दिखने पर चेकअप कराएं और इसके बाद प्रॉपर इलाज करवा सकते हैं.

थायराइड इंबैलेंस होने पर क्या करें?

  • थायराइड हार्मोन इंबैलेंस है है तो डॉक्टर की सलाह से दी गई दवाएं लें.
  • दवाओं के साथ ही हर 6 से 8 हफ्ते में थायराइड हर्मोन की जांच जरूर कराएं.
  • अपनी डाइट को संतुलित करें. थाली में सेलेनियम, जिंक, आयरन से भरपूर फूड्स रखें.
  • रोजाना 7 से 8 घंटे की बढ़िया नींद लें और समय से सोनेजागने की आदत डालें.
  • थायराइड हार्मोन को बैलेंस करने के लिए एक्टिव रहें. रोजाना कुछ देर योग करना फायदेमंद रहता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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