चलने पर सांस फूलना, थोड़ा काम करने पर सीने में दर्द होना या बारबार थकान महसूस होना कई लोग गैस, कमजोरी या उम्र का असर समझकर टाल देते हैं. लेकिन कभीकभी ये लक्षण दिल की उन नसों में ब्लॉकेज का संकेत हो सकते हैं, जो हार्ट की मांसपेशियों तक खून पहुंचाती हैं. अगर इनमें ब्लॉकेज हो जाता है तो ये हार्ट अटैक का कारण बन सकता है, जो कुछ मामलों में जानलेवा होता है. खासकर अगर ये लक्षण सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या थोड़ा काम करने के बाद बारबार दिखाई दें और आराम करने पर कम हो जाएं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कुछ लोगों में सीने में तेज दर्द के बजाय सिर्फ सांस फूलना, असामान्य थकान या बेचैनी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. समय पर जांच कराने से ब्लॉकेज का पता लगाकर आगे होने वाले गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है.
लेफ्ट मेन आर्टरी में ब्लॉकेज क्यों गंभीर है?
डॉक्टर बी बी भारती ने बताया दिल को लगातार काम करने के लिए पर्याप्त खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है. कोरोनरी आर्टरी में जब कोलेस्ट्रॉल और दूसरे पदार्थ जमा होकर रास्ता संकरा कर देते हैं, तो हृदय की मांसपेशियों तक खून की सप्लाई कम हो सकती है.
लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे निकलने वाली शाखाएं हृदय के बड़े हिस्से को रक्त पहुंचाती हैं. इसलिए इस हिस्से में गंभीर ब्लॉकेज को हल्के में नहीं लिया जाता.
डॉ. बीबी भारती बताते हैं, लेफ्ट मेन धमनी में रुकावट गंभीर स्थिति मानी जाती है, क्योंकि इससे हृदय की बड़ी मांसपेशियों तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. हालांकि इलाज का फैसला हर मरीज की एंजियोग्राफी और रक्त वाहिकाओं की स्थिति देखकर किया जाता है. कुछ मरीजों में बायपास के बजाय एंजियोप्लास्टी भी विकल्प हो सकती है.
सीने में दर्द के साथ सांस फूलना भी चेतावनी है
हार्ट की बीमारी में हर व्यक्ति को एक जैसा दर्द नहीं होता. कुछ लोगों को सीने में दबाव या भारीपन महसूस होता है, जबकि कुछ में मेन शिकायत सांस फूलने की हो सकती है.
खासकर इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए
चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना
मेहनत करने पर सीने में दर्द या दबाव
थोड़ी गतिविधि में ही थकान महसूस होना
दर्द का कंधे, हाथ, पीठ या जबड़े तक जाना
आराम करने पर परेशानी का कम हो जाना
अगर ये लक्षण बारबार हो रहे हैं तो खुद से गैस या कमजोरी मानने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
क्या बायपास की सलाह मिलने के बाद एंजियोप्लास्टी हो सकती है?
इसका फैसला मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है. हर ब्लॉकेज का इलाज एक जैसा नहीं होता. डॉक्टर एंजियोग्राफी में देखते हैं कि ब्लॉकेज कहां है, कितना गंभीर है, कितनी धमनियां प्रभावित हैं और रक्त वाहिकाओं की बनावट कैसी है. इसके बाद तय किया जाता है कि दवाओं से इलाज पर्याप्त होगा, एंजियोप्लास्टी की जरूरत है या बायपास सर्जरी ज्यादा उपयुक्त रहेगी. इसलिए किसी दूसरे मरीज के इलाज को देखकर अपने लिए वही तरीका चुनना सही नहीं है.
ब्लॉकेज से बचने के लिए किन चीजों पर ध्यान दें?
हार्ट की धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ाने वाले कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि और परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास शामिल हैं.
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं. धूम्रपान से बचें, वजन नियंत्रित रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें. खाने में बहुत ज्यादा नमक, ट्रांस फैट और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड की मात्रा कम रखना भी जरूरी है.