Keralam News: फिल्मों में सस्पेंस-थ्रिलर की कहानियां दर्शकों को काफी रोमांचक लगती हैं. मगर क्या हो जब ऐसा कोई असल जिंदगी में ऐसी घटना हुई हो जिसमें सस्पेंस भी हो और थ्रिलर भी? जी हां, ऐसी ही कहानी सामने आई थी केरलम (तब केरल) से. यहां एक 14 साल का लड़का एक खौफनाक जुर्म करता है. कहीं पकड़ा ना जाए, इसलिए वो अपनी पहचान भी बदल लेता है. फिर शादी करता है, बच्चे पालता है. लेकिन 38 साल तक एक खौफनाक परछाई उसका पीछा नहीं छोड़ती. आखिरकार, जून 2023 में वह खुद पुलिस थाने पहुंचता है और जो सच उगलता है, उसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ जाते हैं.

केरलम पुलिस ने यादों के धुंधले टुकड़ों, 1986 के एक पुराने दस्तावेज, अखबार की एक छोटी सी कतरन और पीड़ित के स्केच के सहारे इस भूला दी गई मर्डर मिस्ट्री का ताना-बाना फिर से बुना है. तो कहानी है थैपरामबील एंटनी उर्फ मोहम्मद अली के इर्ग-गिर्द घूमती हुई. जो इस, वक्त तो 52 साल है. मगर 38 साल पहले यानि 1986 को वो 14 साल का था. दूसरा किरदार है, पडिक्कापरम्बिल मोहनन (तब उम्र 22 वर्ष). वो 1986 में अचानक गायब हो गया था.
1. वो मनहूस दिन: 14 दिसंबर, 1986
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कोझिकोड के कूडारंजी गांव में एक स्थानीय किसान के खेत में 14 साल का एंटनी और 22 साल का मोहनन मजदूरी करते थे. काम के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ. पुलिस के मुताबिक, जब मोहनन ने कथित तौर पर एंटनी का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की, तो आत्मरक्षा में एंटनी ने उसे पास ही बहती नदी में धक्का दे दिया और मोहनन डूब गया.
2. अज्ञात शव और केस बंद
मोहनन कन्नूर के कुडियनमाला का रहने वाला था और कुछ दिन पहले ही यहां आया था. इसलिए स्थानीय लोग उसकी पहचान नहीं पाए. पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया और फाइल बंद हो गई.
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3. एंटनी का फरार होना और मोहम्मद अली बनना
इस खौफनाक घटना ने एंटनी के दिमाग पर गहरा असर डाला. वह घर से भाग गया और केरल-तमिलनाडु में छोटे-मोटे काम करने लगा. बाद में उसने ईसाई धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया और अपना नया नाम मोहम्मद अली रख लिया. वह मलप्पुरम के वेंगरा में बस गया और नारियल तोड़ने का काम करने लगा.
4. कर्मों का हिसाब और अंदर की छटपटाहट
दशकों बीत गए, मोहम्मद अली की शादी हुई, बच्चे हुए. लेकिन उसका अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था. इसी बीच उसके चार बच्चों में से एक बेटे की 9 साल की उम्र में मौत हो गई. इस दुख ने उसके अंदर के अपराध बोध (Guilt) को और बढ़ा दिया. पहली पत्नी ने भी उसे छोड़ दिया. वह कबूल करना चाहता था, लेकिन बच्चों के पैर पर खड़े होने का इंतजार कर रहा था. बेटी की शादी और बेटों के नौकरी पर लगने के बाद, उसने पुलिस के पास जाने का फैसला किया.
5. पिता की वो पुरानी खोज
दिलचस्प ट्विस्ट यह है कि 1986 में मोहनन के लापता होने के बाद उसके पिता उसकी तलाश में कूडारंजी आए थे. तब पिता ने पुलिस फाइल में अपने बेटे की तस्वीर पहचान ली थी. लेकिन मोहनन को मिर्गी के दौरे आते थे, इसलिए पिता ने सोचा कि दौरे के कारण वह पानी में गिरकर मर गया होगा. उन्हें मर्डर का कोई शक नहीं था.
अब आगे क्या? पुलिस के सामने कानूनी पेच फंसा
जब मोहम्मद अली ने आत्मसमर्पण किया, तो पुलिस के पास कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं था. पुलिस सिर्फ उसके कबूलनामे, पुराने मकान मालिक और मोहनन के परिवार के बयानों पर निर्भर है. चूंकि अपराध के वक्त आरोपी की उम्र सिर्फ 14 साल थी, इसलिए पुलिस अब कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है कि क्या इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (Juvenile Justice Act) के प्रावधान लागू होंगे या नहीं.
मोहम्मद अली ने कहा- मैं अब पूरी तरह से शांत और तनावमुक्त महसूस कर रहा हूं. अगर इजाजत मिली, तो मैं मोहनन के परिवार से मिलकर माफी मांगना चाहता हूं और अदालती कार्रवाई के लिए तैयार हूं. अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है.












