सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों ने सुरक्षा से लेकर कारोबार तक नई चुनौती खड़ी कर दी है. तेल के ठिकानों और एयरपोर्ट पर हमलों के बीच यमन में भी बारूद बरस रहा है. ताइज शहर पर हूती की घेराबंदी से यमन सरकार की मुश्किलें बढ़ रही हैं, लेकिन इन हमलों का सबसे बड़ा असर अब सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और साख पर पड़ रहा है. दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करने वाला सऊदी अरब का प्रमुख सम्मेलन इस साल के लिए स्थगित करना पड़ा है. आखिर हूती के हमले सऊदी अरब की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक साख को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं?

सना से लेकर रियाद तक हूती विद्रोहियों का एक ही मकसद है. सऊदी अरब की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह से तोड़ देना. हूती विद्रोहियों रियाद की उस साख को तबाह कर रहे हैं. जिसके दम पर मोहम्मद बिन सलमान दुनिया भर से अरबों डॉलर का निवेश ला रहे थे.
सऊदी में निवेशकों में मची खलबली
विजन 2030 के तहत सऊदी अरब तेल पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है. पर्यटन, तकनीक, खेल और दूसरे कारोबार में दुनिया भर से पूंजी लाने की कोशिश है. इसके लिए सऊदी अरब को सिर्फ पैसा नहीं, विदेशी कंपनियों का भरोसा भी चाहिए. सऊदी अरब दुनिया को ये संदेश देना चाहता था कि वह भविष्य के कारोबार का बडा केंद्र बन सकता है, लेकिन हूती के हमलों के बाद हालत इस कदर बिगड़ गए हैं कि सऊदी अरब का प्रमुख निवेश सम्मेलन फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव, जिसे ‘रेगिस्तान का दावोस’ कहा जाता है उसे इस साल के लिए स्थगित करना पड़ा है.
ये सम्मेलन सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से निकालकर पर्यटन, खेल और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढाने की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन रियाद के एयरपोर्ट तक बरसती मिसाइलों के बीच ये सम्मेलन नहीं हो सकता इसलिए सऊदी में अरबों डॉलर झोंक देने वाले निवेशकों में खलबली मची है. रियाद और अरामको अब सुरक्षित जोन नहीं रहे.
सऊदी अरब में हूती मिसाइल हमलों का असर अब निवेश के सबसे बड़े मंच तक पहुंच गया है. रियाद में होने वाला ‘दावोस इन द डेजर्ट’ सम्मेलन स्थगित हो गया है. 2017 में शुरू हुआ यह सम्मेलन सऊदी अरब के विजन 2030 का प्रमुख निवेश मंच है. 26 से 29 अक्टूबर तक होने वाला इसका 10वां संस्करण अब स्थगित कर दिया गया है. सम्मेलन 2027 तक टलने से विजन 2030 की महत्वाकांक्षी योजना को झटका लगा है. अर्थव्यवस्था में तेल पर निर्भरता घटाने की सऊदी अरब की मुहिम भी कमजोर पड़ी है.
सऊदी की GDP में 3.6 प्रतिशत गिरावट का अनुमान
‘दावोस इन द डेजर्ट’ सम्मेलन स्थगित होने के बाद 2026 में सऊदी अरब की GDP में 3.6 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है. तेल गतिविधियों में 21.8 प्रतिशत गिरावट का अनुमान भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा रहा है. हूती के हमलों से वैश्विक निवेशकों के बीच चिंता बढ़ रही है. अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट पर खतरा मंडरा रहा है. सऊदी अरब की वैश्विक साख पर सवाल उठ रहे हैं और सुरक्षित निवेश स्थल के तौर पर सऊदी अरब की छवि पर भी असर पड़ रहा है.
सऊदी अरब की धरती पर आग बरसाने के साथ ही यमन के भीतर भी जंग अपने सबसे खूनी पड़ाव तक पहुंच गई है. यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर ताइज इस वक्त पूरी तरह हूती की घेराबंदी में है. हूती विद्रोहियों ने ताइज को घेरकर पहाड़ियों पर अपना मजबूत कब्जा जमा लिया है. यमन सरकार के हाथ से ताइज फिसलता दिख रहा है. जिसके बाद यमन प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सैन्य दखल की गुहार लगाई है.
दोनों तरफ से बारूद बरस रहा है. सऊदी वायुसेना के लड़ाकू विमानों की मदद से पूरे ताइज गवर्नरट में हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ 13 एयर स्ट्राइक की हैं. ताइज का एयरपोर्ट हो या 60वीं स्ट्रीट, अलरबीई हो या धुबाब जिला, सऊदी के जेट्स ने हूती विद्रोहियों के गोलाबारूद के भंडारों को तबाह करने का दावा किया है. सऊदी के समर्थन वाली सेनाओं ने ताइज, बाब अलमंदेब और अलजौफ में हूती के 7 ड्रोन गिराए जाने का भी दावा किया है.
सऊदी के 3 एयरपोर्ट किए गए टारगेट
सबसे नया हमला यानबू मे सऊदी अरामको की तेल फैसिलिटी और शायबा ऑयल फील्ड पर हुआ है. सऊदी अरब के कम से कम 3 एयरपोर्ट और एक एयरबेस पर भी हमले की खबर है. हूती ने सऊदी के नौसैनिक कैंप और रडार स्टेशनों को भी निशाना बनाने का दावा किया है. हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने पिछले 48 घंटे के दौरान सऊदी अरब के खिलाफ कई सैन्य ऑपरेशन करने का दावा किया है.
हूती प्रवक्ता के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में कम से कम 6 बड़े ऑपरेशन किए गए हैं, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ. सऊदी अरब के लिए जारी नई चेतावनी में हूती ने ऊर्जा केंद्रों और एयरपोर्ट्स को अपने निशाने पर बताया है. रियाद के एयर डिफेंस सिस्टम धोखा खा रहे हैं. सऊदी अरब के शहरों से लेकर वहां अरबों डॉलर का निवेश करने वाली कंपनियों तक खलबली मची हुई है.
हूती के हमलों की दहशत ऐसी है कि सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने दक्षिणपश्चिम में नजरान में संभावित खतरे का अलर्ट जारी किया. रियाद और खर्ग गवर्नरेट में भी ऐसे ही खतरे का अलर्ट जारी हुआ. बढते सुरक्षा खतरे के बीच रियाद में सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए. रियाद की कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने भी अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया.
यमन में भी हूती के मिसाइल हमले ने भारी तबाही मचाई. यमन के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक शबवा के अलअलम कैंप पर हूती की बैलिस्टिक मिसाइल से हमला हुआ. यमन की सरकार के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 53 नए सैनिक मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए. इसी अलअलम कैंप से जुडी एक दूसरी रिपोर्ट में सऊदी अरब के समर्थन वाले बलों ने सलाफी संगठन अलतौहीद ब्रिगेड के 70 सदस्यों की मौत, 30 लोगों के लापता होने और 200 के घायल होने की जानकारी दी.
सऊदी अरब में हुए हमले की टाइमलाइन?
अक्टूबर में, और खासकर पिछले 10 दिनों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिसने इस युद्ध को बहुत विनाशक बना दिया है. हमले कहांकहां हुए, किस तारीख को कौन सा ठिकाना निशाने पर आया और सऊदी अरब ने कब जवाबी कार्रवाई की? अब इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन जान लीजिए.
- 10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हूती के हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 300 लोग घायल हुए.
- इसके बाद 13 अक्टूबर को सऊदी अरब ने जवाबी एयरस्ट्राइक की. उसने यमन की राजधानी सना के हूती के नियंत्रण वाले तेल डिपो और रास ईसा पोर्ट की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया. इस कार्रवाई में F15 और यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल हुआ.
- 13 और 14 अक्टूबर को हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए धहरान में अरामको मुख्यालय को निशाना बनाया.
- 19 और 20 अक्टूबर को सऊदी अरामको के यानबू ऑयल फील्ड और शायबा ऑयल फील्ड पर हमलों की खबरें सामने आईं. हूती विद्रोहियों ने रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट, अबहा एयरपोर्ट और खमिस मुशैत एयर बेस को भी निशाना बनाने की धमकी दी है.
ब्यूरो रिपोर्ट, TV9 भारतवर्ष