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शाहरुख खान 15 करोड़ करते हैं चार्ज, रोनाल्डो 20 करोड़, मोदी ने पार्ले मेलोडी के लिए फ्री में कर दिया

नई दिल्‍ली: एक समय था। मुंबई के विले पार्ले ईस्ट में बनी मशहूर फैक्टरी से फ्रेश पार्ले-जी बिस्किट की महक आस-पड़ोस में फैल जाती थी। पूरब में कोलडोंगरी और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से लेकर पश्चिम के उपनगर में स्थित मिठीबाई कॉलेज तक। वह फैक्टरी काफी पहले बंद हो चुकी है। लेकिन, पार्ले का नाम आज भी मौजूद है। न सिर्फ उस उपनगर के नाम में। बजाय इसके पूरे भारत में। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले मेलोडी टॉफियों का एक पैकेट दिया तो अचानक ही पार्ले का नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया। पीएम ने मजाकिया अंदाज में उनके वायरल हो चुके ‘मेलोडी’ निकनेम की ओर इशारा किया। मेलोडी के लिए प्रधानमंत्री ने वह काम फ्री में कर दिया जिसके लिए शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, क्रिस्टियानो रोनाल्‍डो जैसे सितारे करोड़ों चार्ज करते हैं।

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शाहरुख खान 15 करोड़ करते हैं चार्ज, रोनाल्डो 20 करोड़, मोदी ने पार्ले मेलोडी के लिए फ्री में कर दिया
शाहरुख खान 15 करोड़ करते हैं चार्ज, रोनाल्डो 20 करोड़, मोदी ने पार्ले मेलोडी के लिए फ्री में कर दिया

पार्ले मेलोडी को मिला ग्लोबल प्लेटफॉर्म
कूटनीति के उस पल में इस भारतीय टॉफी और ब्रांड को ऐसे ग्‍लोबल प्‍लेटफॉर्म पर फ्री में मार्केटिंग मिली जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। यह मार्केटिंग उन दो राष्ट्राध्यक्षों की वजह से मिली जिनके ‘एक्‍स’ और ‘इंस्‍टाग्राम’ पर कुल मिलाकर 210 मिलियन (21 करोड़) से ज्‍यादा फॉलोअर्स हैं।

ऐसी है पार्ले की कहानी
पार्ले की कहानी कुछ-कुछ ‘चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्‍ट्री’ के देसी वर्जन जैसी लगती है। इसकी शुरुआत बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी। इसका ‘गोल्डन टिकट’ थे- पार्ले-जी ग्लूकोज बिस्किट।

1929 में मुंबई के विले पार्ले में मोहनलाल चौहान ने इस कंपनी की नींव रखी थी।
इसने शुरुआत में टॉफियां बनाने का काम किया।
बाद में पार्ले ग्‍लूको लॉन्च किया। यही 1939 में पार्ले-जी बन गया।
यह कंपनी बिस्किट और टॉफियों के क्षेत्र में बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरी।
मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे ज्‍यादा बिकने वाला बिस्किट ब्रांड बन गई।

अलग-अलग डिवीजन में बंटा कारोबार
1970 के दशक में चौहान परिवार ने अपने कारोबार को अलग-अलग डिवीजन में बांट दिया। इससे तीन अलग-अलग निजी कंपनियां बनीं। ये आज भी पार्ले नाम का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन, स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। इनमें से पहली कंपनी है पार्ले प्रोडक्‍ट्स – बिस्किट और टॉफियों की दुनिया की एक बहुत बड़ी कंपनी। यह मेलोडी टॉफियां भी बनाती है। पार्ले-जी के अलावा, यह मोनैको, क्रैकजैक और हाइड एंड सीक जैसे लोकप्रिय बिस्किट भी बनाती है।

पार्ले-जी बिस्किट इतने मशहूर हैं कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान ये लोगों के लिए गुजारा करने का बेहद जरूरी जरिया बन गए थे। इसकी कम कीमत छोटे पैकेट के लिए सिर्फ 5 रुपये है। लंबी शेल्फ लाइफ की वजह से पार्ले-जी घर के राशन में जमा करके रखने के लिए बेहतरीन विकल्प साबित हुआ। प्रवासी मजदूरों ने पैदल घर लौटते समय अपनी लंबी यात्राओं के दौरान इस पर भरोसा किया। जबकि सरकारी एजेंसियों और एनजीओ ने राहत भोजन के तौर पर इसके लाखों पैकेट बांटे।

मेलोडी का मुफ्त में मिल गया पीआर
आज, मेलोडी की ओनर कंपनी पार्ले प्रोडक्‍ट्स को इससे बेहतर पीआर मौका मिल ही नहीं सकता था। ऐसे दौर में जब इन्फ्लुएंसर और फिल्मी सितारे एंडोर्समेंट के लिए करोड़ों रुपये लेते हैं, दो वर्ल्‍ड लीडर्स ने इस टॉफी को फ्री में सुर्खियों में ला दिया है। पार्ले प्रोडक्‍ट्स के वाइस प्रेसिडेंट और सीएमओ मयंक शाह ने इंडिया टुडे टीवी से कहा कि यह भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक मंच देने का शानदार तरीका था। उन्होंने इस प्रचार के लिए आभार व्यक्त किया।

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