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Explained: तप रहे पहाड़ी इलाके कैसे गर्मी में दिल्ली को दे रहे टक्कर? घूमने से पहले नोट कर लें नाम

मैदान तो मैदान, अब तो पहाड़ी इलाकों में भी तापमान 40 तक पहुंच गया है. ये वह पहाड़ी स्थान हैं, जहां मैदानी इलाकों के लोग मई-जून में ठंड की तलाश में पहुंच जाते रहे हैं. ऐसे पहाड़ी, निचले पर्वतीय या हिल-बेल्ट वाले शहर या इलाके हैं, जहां तापमान 40 डिग्री तक पहुंचा है या मौसम विभाग ने 40 पार जाने का अंदेशा जताया है. उनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्य शामिल हैं.

Explained: तप रहे पहाड़ी इलाके कैसे गर्मी में दिल्ली को दे रहे टक्कर? घूमने से पहले नोट कर लें नाम
Explained: तप रहे पहाड़ी इलाके कैसे गर्मी में दिल्ली को दे रहे टक्कर? घूमने से पहले नोट कर लें नाम

शिमला, मसूरी, नैनीताल, मनाली जैसे बड़े हिल स्टेशन इस समय 40 डिग्री तक नहीं पहुंचे हैं लेकिन वहां भी सामान्य से ज्यादा गर्मी दर्ज की जा रही है. जम्मू, देहरादून, रुड़की, ऋषिकेश, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल जिले के निचले हिस्से, पौड़ी जिले के निचले हिस्से, हिमाचल प्रदेश के ऊना, नाहन और नेरी जैसे कस्बे गर्मी से तप रहे हैं. आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि पहाड़ी इलाकों में मौसम क्यों चरम रुख अपना रहा है? अक्सर ठंड वाले इलाके क्यों तप रहे हैं?

भरोसेमंद नहीं रही पहाड़ों की ठंडक

पहाड़ों का नाम आते ही दिमाग में ठंडी हवा आती है. लोग सोचते हैं कि वहां गर्मी से राहत मिलेगी. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. देश के कई पहाड़ी एरिया इस बार तप रहे हैं. कुछ जगहों पर पारा 40 डिग्री तक पहुंच गया. कुछ इलाकों में 40 पार जाने का अनुमान है. यानी हालात ऐसे हैं कि गर्मी में कई पहाड़ी शहर अब दिल्ली जैसी तपिश महसूस करा रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ मौसम की खबर नहीं है. यह चेतावनी है. यह बताता है कि पहाड़ों का जलवायु संतुलन बदल रहा है. जो शहर कभी राहत देते थे, वहां अब दोपहर में बाहर निकलना मुश्किल होने लगा है.

हरादून में तापमान 39.7 डिग्री तक दर्ज हुआ. फोटो: PTI

उत्तराखंड के हिली एरिया में बढ़ी चिंता

उत्तराखंड को लोग ठंडे मौसम वाला राज्य मानते हैं. लेकिन इस बार वहां भी गर्मी ने तेवर दिखाए हैं. देहरादून में तापमान 39.7 डिग्री तक दर्ज हुआ. रुड़की में पारा 40 डिग्री पहुंच गया. उधम सिंह नगर में 40.2 डिग्री दर्ज किया गया. हरिद्वार और ऋषिकेश में भी तेज गर्मी और लू जैसे हालात बने. मौसम विभाग से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि आने वाले दिनों में तापमान 1 से 3 डिग्री और बढ़ सकता है.

इसका सीधा मतलब है कि देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के इलाके 40 से 42 डिग्री की मार झेल सकते हैं. नैनीताल और पौड़ी जैसे जिलों के निचले हिस्सों में भी हीटवेव अलर्ट की बात सामने आई है. यह बात इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि उत्तराखंड सिर्फ मैदानी गर्मी से नहीं जूझ रहा. गर्मी के साथ जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. सूखी हवा, कम नमी और लगातार तेज धूप ने खतरा बढ़ा दिया है. यानी गर्मी अब सिर्फ असुविधा नहीं रही. यह पर्यावरण और जनजीवन दोनों पर असर डाल रही है.

हिमाचल में भी पहाड़ों पर गर्मी का दबाव

हिमाचल प्रदेश की पहचान ठंडी वादियों से होती है, लेकिन यहां भी गर्मी की खबरें चौंकाने वाली हैं. ऊना में तापमान 43.4 डिग्री तक पहुंचा. नेरी में 41.2 डिग्री दर्ज हुआ. नाहन में 40 डिग्री के आसपास पारा पहुंचा. ये शहर हिमाचल की हिल और लोअर हिल बेल्ट का हिस्सा माने जाते हैं. यानी गर्मी अब सिर्फ मैदानों तक सीमित नहीं है. पर्वतीय राज्यों के निचले और मध्य हिस्से भी इसकी चपेट में हैं. शिमला, धर्मशाला, मनाली और सोलन जैसे शहर अभी 40 डिग्री पर नहीं पहुंचे हैं. लेकिन वहां भी तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है. शिमला जैसे शहर में भी इस सीजन के गर्म दिन दर्ज हुए हैं. यानी बड़ी चिंता यह है कि ठंडे माने जाने वाले शहर भी अब तेजी से गर्म हो रहे हैं.

पहाड़ों में अब कंक्रीट बढ़ रहा है, पेड़ कम हो रहे हैं, खुली जमीन कम हो रही है और इससे हीट ज्यादा फंसती है.

आखिर पहाड़ इतने गर्म क्यों हो रहे हैं?

इसके पीछे कई कारण हैं. पहला कारण है बारिश की कमी. जब समय पर प्री-मानसून बारिश नहीं होती, तो जमीन जल्दी तपती है. दूसरा कारण है बर्फबारी में कमी. ऊंचे इलाकों में बर्फ कम टिकती है. इससे ठंडक कम होती है. नदियों और हवा दोनों पर असर पड़ता है. तीसरा कारण है तेजी से शहरीकरण. पहाड़ों में अब कंक्रीट बढ़ रहा है. पेड़ कम हो रहे हैं. खुली जमीन कम हो रही है. इससे हीट ज्यादा फंसती है. चौथा कारण है जलवायु परिवर्तन. मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा. तापमान के पुराने पैटर्न टूट रहे हैं. कभी जल्दी गर्मी पड़ रही है. कभी लंबे समय तक लू चल रही है. इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं.

नई परेशानियां ले रही हैं जन्म

पहाड़ों में बढ़ती गर्मी कई नई परेशानियां ला रही है. सबसे पहले असर पड़ रहा है पर्यटन पर. लोग ठंडक की उम्मीद से जाते हैं. लेकिन वहां भी गर्म हवा मिले तो निराशा होती है. दूसरा असर पानी पर पड़ता है. झरने और छोटे जलस्रोत जल्दी सूख रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में पानी की दिक्कत बढ़ गई है. तीसरा असर जंगलों पर पड़ रहा है. सूखे जंगल जल्दी आग पकड़ते हैं. उत्तराखंड में इसका असर साफ दिख भी रहा है. चौथा असर स्वास्थ्य पर है. पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग हमेशा इतनी गर्मी के आदी नहीं होते. इससे डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, थकान और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.

राहत की गारंटी नहीं रहे कई हिल स्टेशन

सच यही है कि अब हर हिल स्टेशन को एक जैसा ठंडा मानना ठीक नहीं है. ऊंचाई, हरियाली, स्थानीय मौसम और निर्माण का दबाव बहुत फर्क डालता है. ऊंचे इलाकों में अभी भी राहत मिल सकती है. लेकिन निचले पहाड़ी शहर तेजी से गर्म हो रहे हैं. यानी पहाड़ जाओ, गर्मी से बच जाओ का पुराना फॉर्मूला कमजोर पड़ रहा है. अब यात्रा से पहले मौसम अपडेट देखना जरूरी है. सिर्फ जगह का नाम देखकर योजना बनाना ठीक नहीं होगा.

पहाड़ जाओ, गर्मी से बच जाओ का पुराना फॉर्मूला कमजोर पड़ रहा है.

प्रशासन और लोगों को क्या करना चाहिए

इस चुनौती से निपटने के लिए सिर्फ मौसम विभाग का अलर्ट काफी नहीं है. स्थानीय प्रशासन को पानी, स्वास्थ्य और आग से बचाव की तैयारी बढ़ानी होगी. हॉस्पिटल में हीट स्ट्रोक की सुविधा होनी चाहिए. बस अड्डों और बाजारों में पानी की व्यवस्था होनी चाहिए. जंगलों में फायर अलर्ट सिस्टम और तेज होना चाहिए. लोगों को भी सावधान रहना होगा. दोपहर में धूप से बचना होगा. हल्के कपड़े पहनने होंगे. पानी ज्यादा पीना होगा. बुजुर्ग, बच्चे और मजदूर वर्ग पर खास ध्यान देना होगा.

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पूर्वोत्तर में गर्मी का क्या हाल है?

पूर्वोत्तर राज्यों में इस समय तस्वीर उत्तर भारत से अलग है. यहां तेज लू जैसी हालत कम दिख रही है, लेकिन उमस, गर्म दिन और बीच-बीच में बारिश का दौर बना हुआ है. मौसम से जुड़ी ताजा रिपोर्टों के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है. कई जगह येलो अलर्ट भी जारी किया गया है. इसका मतलब यह है कि वहां गर्मी है, लेकिन बारिश और बादलों की वजह से हालात कुछ हद तक नियंत्रित हैं. यानी पूर्वोत्तर में अभी वैसी लगातार झुलसाने वाली हीटवेव नहीं है, जैसी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में देखी जा रही है.

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