Varanasi News: धर्मनगरी वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है. जनपद में जनवरी से सितंबर के दौरान 300 से अधिक नए एचआईवी संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है. यदि वाराणसी के साथसाथ आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य बिहार से आने वाले जांच आंकड़ों को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा 700 के पार पहुंच जाता है. आंकड़ों में सबसे डरावना पहलू यह है कि नए मामलों में 18 से 25 वर्ष के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है, जिनमें असुरक्षित समलैंगिक सेक्स और एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना मुख्य कारण बनकर उभरा है.

वाराणसी के प्रमुख अस्पतालों में आईसीटीसी केंद्रों से मिले आंकड़े इस प्रकार हैं. दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जनवरी से सितंबर के बीच हुई 20 हजार जांचों में 171 मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए, जबकि बीएचयू अस्पताल में करीब 150 मरीजों की पुष्टि हुई है. जिला अस्पताल की काउंसलर वंदना के अनुसार, बीते 23 वर्षों में असुरक्षित समलैंगिक संबंध बनाने वालों में एचआईवी पॉजिटिव होने की दर तेजी से बढ़ी है. सबसे ज्यादा प्रभावित 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के युवा और माइग्रेंट्स हैं. लोग झिझक और सामाजिक डर के कारण खुलकर बात करने से परहेज कर रहे हैं.
एक ही सिरिंज से नशीली दवाएं लेने से 35% मामले; 2 महिलाओं की मौत
HIV फैलने का दूसरा सबसे बड़ा कारण नशीले पदार्थों के लिए दूषित सिरिंजों का पुनः उपयोग है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो सालों में 30 ऐसे लोगों में एचआईवी संक्रमण पाया गया, जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीला इंजेक्शन लिया था. संक्रमित मरीजों में से 2 महिलाओं की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है. कुल एचआईवी पॉजिटिव मामलों में लगभग 35% मामले इंजेक्टेबल ड्रग्स इस्तेमाल करने वालों के आ रहे हैं.
वाराणसी में ये 4 इलाके बने हॉटस्पॉट; जांच और हेल्पलाइन सुविधाएं
स्वास्थ्य विभाग ने वाराणसी शहर के चार प्रमुख क्षेत्रों को एचआईवी हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया है. मलदहिया, शिवदासपुर, कैंट और सदर बाजार क्षेत्रों से सबसे ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं. वाराणसी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और बीएचयू सहित 6 केंद्रों पर निशुल्क एचआईवी जांच और परामर्श उपलब्ध है.
एचआईवी/एड्स की जानकारी, परामर्श या नजदीकी एआरटी सेंटर का पता लगाने के लिए 1097 नेशनल हेल्पलाइन जारी की गई है. खुद के जोखिम का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ‘ISCAN’ टूल/ऐप की सुविधा दी है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी गोपनीयता बनाए रखते हुए सेल्फरिस्क असेसमेंट कर सकता है.