शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 ब्रेकिंग
यूपी में नेताओं की कथा: धीरेंद्र कृष्ण की सबसे ज्यादा डिमांड, राजन महाराज-प्रदीप मिश्रा दूसरे नंबर पर​ | धनतेरस पर बनेगा नया रिकॉर्ड, ₹1.25 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है कारोबार​ | काजू कतली में मैदा की मिलावट तो नहीं, इन तरीकों से कर सकते हैं पहचान​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

वंतारा में होगा बीमार हथिनी माया का इलाज, केरल से किया गया एयरलिफ्ट​

18 महीने की हथिनी माया को बेहतर इलाज के लिए केरल से गुजरात एयरलिफ्ट किया गया है. बीमार हथिनी का इलाज जामनगर स्थित वंतारा में हो रहा है. हथिनी की हालत बेहद गंभीर है उसकी कई हड्डियां टूट चुकी हैं और हड्डियां इतनी कमजोर हो गई हैं कि उसके लिए खड़ा होना भी मुश्किल हो […]

18 महीने की हथिनी माया को बेहतर इलाज के लिए केरल से गुजरात एयरलिफ्ट किया गया है. बीमार हथिनी का इलाज जामनगर स्थित वंतारा में हो रहा है. हथिनी की हालत बेहद गंभीर है उसकी कई हड्डियां टूट चुकी हैं और हड्डियां इतनी कमजोर हो गई हैं कि उसके लिए खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है. वंताना में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी 24 घंटे निगरानी में इलाज कर रही है.

केरल के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. पी पुगाझेंडी ने 5 नवंबर 2026 को हथिनी को वंतारा भेजने का आदेश दिया था. वन विभाग पिछले करीब 18 महीनों से उसकी देखभाल कर रहा था. इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो पा रहा था. ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए गुजरात भेजने का फैसला लिया गया.

जन्म के समय ही मां से बिछड़ गई थी हथिनी

माया का जन्म 19 अप्रैल 2025 को हुआ था. वह केरल के मलयाट्टूर इलाके में कप्रीक्कड़ के पास मिली थी. उस समय उसका झुंड नदी पार करके आगे निकल गया था और माया वहीं छूट गई थी. जन्म के समय वह काफी कमजोर और पानी की कमी से परेशान थी. उसे मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया था, जो नवजात बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी होता है.

जब उसकी मां वापस नहीं लौटी तो वन विभाग ने उसे बचाकर अभयारण्य पहुंचाया. माया में मां का दूध पीने की प्राकृतिक क्षमता भी विकसित नहीं हुई थी. ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों और देखभाल करने वालों ने उसे हाथ से दूध पिलाकर पाला. पशु चिकित्सक डॉ. बिनॉय सी बाबू और उनकी टीम ने एक साल से ज्यादा समय तक उसकी देखभाल की. इस दौरान उसे पाचन, त्वचा, पैरों और हड्डियों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा.

खेलते समय फिसली, कई हड्डियों में हुआ फ्रैक्चर

2 जुलाई 2026 को करीब 15 महीने की उम्र में माया खेलते समय फिसल गई थी. इस हादसे में उसके दाहिने कंधे में चोट लग गई. इसके बाद उसका इलाज शुरू किया गया. उसे दवाएं दी गईं, फिजियोथेरेपी कराई गई और शरीर में कैल्शियम व विटामिनD की कमी दूर करने की कोशिश की गई. लेकिन तीन बार मेडिकल बोर्ड की जांच के बावजूद उसकी हालत बिगड़ती गई. अक्टूबर के आखिर तक वह अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. वह केवल लिक्विड डाइट ले रही थी.

24 अक्टूबर को पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान कॉलेज, पूक्कोड के डॉक्टर दिनेश पीटी ने उसकी जांच की. रिपोर्ट में पता चला कि उसकी बाईं ऊपरी अगली टांग की हड्डी टूट चुकी है. दाहिनी अगली टांग की हड्डी में भी कई फ्रैक्चर हैं. इसके अलावा उसकी हड्डियां सामान्य से काफी पतली और कमजोर हो गई हैं. उसे सीने में संक्रमण और लंबे समय तक लेटे रहने के कारण शरीर पर घाव भी हो गए हैं. डॉक्टरों ने उसकी हालत को बेहद गंभीर बताया था.

विशेषज्ञों की सलाह पर वंतारा भेजने का फैसला

माया की बिगड़ती हालत को देखते हुए केरल वन विभाग ने दूसरे विशेषज्ञों से भी सलाह लेने का फैसला किया. 1 नवंबर को वंतारा के पशु चिकित्सकों ने वीडियो कॉल के जरिए माया की मेडिकल रिपोर्ट, एक्सरे और खून की जांच की रिपोर्ट देखी. इसके बाद 4 नवंबर को मेडिकल बोर्ड की बैठक हुई. इसमें असम के प्रसिद्ध हाथी विशेषज्ञ और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कुशल कोंवर सरमा भी शामिल हुए. वह वंतारा के पशु चिकित्सा सलाहकार भी हैं.

डॉ. सरमा ने आशंका जताई कि माया को पैराथायरॉइड ग्रंथि से जुड़ी कोई बीमारी हो सकती है. इस बीमारी का इलाज संभव हो सकता है. उन्होंने सलाह दी कि कोई अंतिम फैसला लेने से पहले माया को वंतारा की आधुनिक मेडिकल सुविधाओं का लाभ दिया जाना चाहिए. वंतारा के हाथी देखभाल केंद्र के प्रमुख पशु चिकित्सक डॉ. यदुराज खडपेकर ने भी इस सलाह का समर्थन किया. इसके बाद सभी विशेषज्ञों की सहमति से माया को गुजरात भेजने का फैसला लिया गया.

वंतारा में 24 घंटे निगरानी

वंतारा में माया को कई तरह की विशेष मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं. इनमें 24 घंटे पशु चिकित्सकों की निगरानी, दर्द कम करने के लिए इलाज और बीमारी की असली वजह पता लगाने के लिए आधुनिक जांच शामिल हैं. इसके अलावा उसे सुरक्षित तरीके से उठाने और उसकी स्थिति बदलने के लिए हाइड्रोलिक मशीनों का इस्तेमाल जा रहा है. डॉक्टरों की सलाह के अनुसार हाइड्रोथेरेपी यानी पानी की मदद से इलाज भी किया जा सकता है.

इलाज के दौरान साथ रहेगा पुराना केयरटेकर

माया के इलाज के दौरान केरल वन विभाग भी उसकी देखभाल से जुड़ा रहेगा. उसके पुराने डॉक्टर डॉ. बिनॉय सी. बाबू और परिचित केयरटेकर निखिल बाबू भी उसके साथ गुजरात गए हैं. इलाज के दौरान निखिल बाबू उसके पास ही रहेंगे, ताकि नए माहौल में उसे किसी तरह की परेशानी न हो. माया के इलाज की निगरानी के लिए केरल सरकार की एक समिति भी बनाई गई है. इलाज पूरा होने के बाद वंतारा उसे वापस केरल के अभयारण्य पहुंचाने में मदद करेगा.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY