गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी रही. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाले दूसरे फैक्टर्स के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में 0.8% तक की बढ़त देखी गई. हालांकि, एक्सपायरी के दिन बाजार में उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है. सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक की उछाल के साथ 73,860 के स्तर के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 175 अंकों की तेजी आई और यह 22,875 के करीब पहुंच गया. ब्रॉडर मार्केट में भी तेजी रही, जहां निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.6% तक की बढ़त दर्ज की गई.

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा तेजी अडानी पोर्ट्स के शेयरों में रही, जो 4% से अधिक चढ़े. इसके अलावा, पावर ग्रिड, कोटक महिंद्रा बैंक, HUL, NTPC, ITC, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाइटन, TCS और इंफोसिस के शेयरों में 13% की बढ़त देखने को मिली. सेक्टरल इंडेक्स की बात करें तो, निफ्टी FMCG में लगभग 2% की तेजी रही, जबकि निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी IT और कुछ अन्य सूचकांकों में 1% तक की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, निफ्टी ऑटो में गिरावट रही. कुल मिलाकर बाजार का रुख पॉजिटिव रहा. NSE पर 1,995 शेयरों में तेजी रही, जबकि 1,228 शेयरों में गिरावट आई. इसके अलावा, 105 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में तेजी के 6 प्रमुख कारण कौन से हैं.
इन कारणों से शेयर बाजार में आई तेजी
- फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा : महंगाई के लगातार ऊंचे बने रहने के बावजूद, फेडरल रिजर्व ने अपनी मुख्य ब्याज दर को लगभग 3.75 से 4 फीसदी के लेवल पर स्थिर रखा है. फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श ने संकेत दिया है कि उनकी नीतियों का असर दिखना शुरू हो गया है. यह फैसला पिछले महीने ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी के बाद आया है, जो पिछले तीन वर्षों में पहली बार हुआ था. वॉर्श ने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि फेड आगे क्या कदम उठाएगा, लेकिन ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 89 दिसंबर को होने वाली अगली बैठक में केंद्रीय बैंक मुख्य ब्याज दर में फिर से 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है. CME फेडवॉच के अनुसार, वॉल स्ट्रीट के निवेशकों को अब दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 85% लग रही है.
- LTCG टैक्स में कटौती की उम्मीदें बढ़ीं: भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव की बढ़ती उम्मीदें भी हैं. हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को लेकर चर्चा चल रही है, जिसके बाद से इन बदलावों की उम्मीदें तेज हो गई हैं.
- FII की खरीदारी : NSE के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में लगभग 872 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की. इससे पहले भारी बिकवाली के कारण बाजार में हलचल मच गई थी, जिसके बाद हाल ही में FIIs ने भारतीय शेयरों में छिटपुट खरीदारी की है. FIIs ने मंगलवार को 4,198 करोड़ रुपए और शुक्रवार को 2,098 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर खरीदे. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अभी तक कोई स्पष्ट ट्रेंड बदलाव देखने को नहीं मिला है.
- रुपया मजबूत हुआ : अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत घोषणा के बाद अमेरिकी डॉलर में थोड़ी नरमी आई, जिससे भारतीय रुपया 11 पैसे मजबूत होकर 95.17 के स्तर पर पहुंच गया. इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 95.20 पर खुला और फिर मजबूती दिखाते हुए 95.17 के स्तर तक पहुंच गया. इस तरह, पिछले बंद भाव के मुकाबले इसमें 11 पैसे की तेजी दर्ज की गई.
- बॉन्ड यील्ड में नरमी : बेंचमार्क 10वर्षीय US ट्रेजरी नोट्स की बॉन्ड यील्ड 5% के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई है. 30वर्षीय बॉन्ड की यील्ड गिरकर 5.3% पर आ गई, जबकि 2वर्षीय नोट्स की यील्ड जो फेड के ब्याज दर संबंधी फैसलों की उम्मीदों के साथसाथ बदलती है गिरकर 4.69% रह गई. बॉन्ड यील्ड में गिरावट से इक्विटी मार्केट की तुलना में डेट मार्केट कम आकर्षक हो जाता है, जिससे आमतौर पर इक्विटी मार्केट को फायदा मिलता है.
- आकर्षक वैल्यूएशन : मार्केट अपने कुछ नुकसान की भरपाई कर रहा है, फिर भी इस साल सेंसेक्स और निफ्टी काफी निचले स्तर पर बने हुए हैं. भारी बिकवाली के बाद विश्लेषकों ने कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ गए हैं. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी ताजा रणनीति रिपोर्ट में कहा कि हमें मार्केट के कई हिस्सों में वैल्यू दिख रही है, क्योंकि अलगअलग सेक्टरों और शेयरों के वैल्यूएशन में काफी गिरावट आई है. मार्केट मल्टीपल उचित स्तर पर हैं, हालांकि हमारा ध्यान ‘टॉपडाउन’ इंडेक्स वैल्यूएशन पर कम रहता है.
अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि फेडरल रिजर्व द्वारा उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों को स्थिर रखना, ग्लोबल लेवल पर इक्विटी बाजारों के लिए थोड़ी सकारात्मक बात है. हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत के नजरिए से चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% के आसपास बने हुए हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. ऐसी खबरें आ रही हैं कि चिप की कमी की समस्या 2030 तक बनी रहेगी, जिससे दक्षिण कोरिया और ताइवान में चिप स्टॉक्स और AI से जुड़े शेयरों में फिर से दिलचस्पी बढ़ गई है. विश्लेषक ने कहा कि इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक भारत को नजरअंदाज करते हुए AI और उससे जुड़े शेयरों में पैसा लगाना जारी रखेंगे.
उन्होंने आगे कहा कि अब आगामी बजट में LTCG टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ रही है. ऐसा लगता है कि अब यह केवल एक विकल्प की बात नहीं रह गई है. इतने बड़े पैमाने पर पूंजी का बाहर जाना भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों पर असर डाल रहा है. कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेंगे, जिससे रुपए में गिरावट आएगी और आयातित महंगाई बढ़ेगी. इससे पहले से ही उच्च स्तर पर चल रही महंगाई और विकराल हो जाएगी, जो इस साल मानसून की भारी कमी के कारण और भी बढ़ सकती है.