भारत में शहरों को रंगों के आधार पर भी नाम दिए गए हैं. जैसे- जयपुर को पिंक सिटी कहते हैं और जोधपुर को ब्लू सिटी. इसी तरह राजस्थान का एक शहर ऐसा भी है जिसे रेड सिटी कहते हैं. उस शहर का नाम है बीकानेर. यह राजस्थान का ऐतिहासिक शहर है जो थार रेगिस्तान के मध्य में है. जानिए, इसे क्यों कहते हैं रेड सिटी और क्या हैं इसलिए खासियतें. फोटो: pixabay/pexels
Khabar Monkey

रेड सिटी क्यों कहते हैं… बीकानेर की स्थापना 1488 में राजपूत राजकुमार राव बीका ने की थी. शहर को रेड सिटी यानी लाल शहर नाम इसके बलुआ पत्थरों के कारण मिला है. इन पत्थरों का इस्तेमाल किलों, महलों और हवेली के निर्माण में किया गया. 18वीं और 19वीं शताब्दियों के दौरान व्यापारियों ने यहां एक हजार से अधिक हवेलियों का निर्माण कराया. रामपुरिया हवेली सबसे प्रसिद्ध है. फोटो: pixabay/pexels
क्यों खास हैं लाल पत्थर… बीकानेर में जो भी ऐतिहासिक निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से हुए हैं वो खास वजह से इस्तेमाल हुए थे. ये दिन के समय 48 डिग्री सेल्सियस की गर्मी को अवशोषित करते हैं और रात में उसे रिलीज करते हैं. नतीजा, कमरे प्राकृतिक रूप से आरामदायक रहते हैं. यहां के पुराने शहर की घुमावदार, संकरी गलियां रेगिस्तानी हवाओं को संकुचित करने के लिए बनाई गई थीं. इससे हवा की गति बढ़ती थी और प्राकृतिक एयर कंडीशनिंग जैसा प्रभाव पैदा होता था. फोटो: pixabay/pexels
खूबसूरत ही नहीं, मजबूत भी… लाल पत्थर का इस्तेमाल सिर्फ निर्माण की खूबसूरती बढ़ाने के लिए ही नहीं चुना गया बल्कि उसे मजबूती देना भी एक वजह थी. यह पत्थर निर्माण को मजबूत बनाता है. यह भयंकर रेगिस्तानी तूफानों और तापमान में अचानक होने वाले बदलावों को बिना दरार पड़े आसानी से झेल लेता है. फोटो: pixabay/pexels
व्यापार के लिए बहुत खास था शहर… बीकानेर में सबसे लोकप्रिय संरचना है जूनागढ़ किले की. इसे 16वीं शताब्दी में बनाया गया था. दिलचस्प बात है कि यह पहाड़ी की चोटी की जगह समतल मैदान पर बना है. राजस्थान का यह शहर मिडिल ईस्ट और गुजरात के बंदरगाहों के बीच व्यापार मार्गों पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया. इसकी इस खूबी ने भी इसका इतिहास समृद्ध बनाने का काम किया. फोटो: pixabay/pexels












