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मुकेश अंबानी के IPO से करेंसी मार्केट में हलचल! 6 हफ्तों के हाई पर पहुंचा रुपया​

मुकेश अंबानी का जियो आईपीओ हर जगह अपने झंडे गाड़ रहा है. जहां कंपनी के आईपीओ ने बाजार में लिस्ट होने से पहले 3 रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. वहीं दूसरी ओर करेंसी मार्केट में तहलका मचाया. जियो आईपीओ में विदेशी निवेशकों ने जमकर निवेश किया है. जिसकी वजह से भारत में जियो आईपीओ की […]

मुकेश अंबानी का जियो आईपीओ हर जगह अपने झंडे गाड़ रहा है. जहां कंपनी के आईपीओ ने बाजार में लिस्ट होने से पहले 3 रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. वहीं दूसरी ओर करेंसी मार्केट में तहलका मचाया. जियो आईपीओ में विदेशी निवेशकों ने जमकर निवेश किया है. जिसकी वजह से भारत में जियो आईपीओ की वजह से भारी भरकम विदेशी करेंसी आई है. जिसका असर रुपए में देखने को मिला है. करेंसी मार्केट के आंकड़ों के अनुसार डॉलर के मुकाबले में रुपए में 48 पैसे की तेजी देखने को मिली है. जिसकी वजह से रुपया 6 हफ्तों के पीक पर दिखाई दे रहा है. वैसे रुपए को नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे फैक्टर्स कम नहीं हुए हैं. ऐसे में जियो आईपीओ असर जैसे ही कम होगा. रुपए में गिरावट देखने को मिल सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

6 हफ्तों के पीक पर पहुंचा रुपया

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 48 पैसे मजबूत होकर 94.43 पर बंद हुआ. रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स IPO से आए विदेशी निवेश और डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI के हस्तक्षेप से रुपए को समर्थन मिला. वैसे विदेशी करेंसी मार्केट के विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर घरेलू बाजार और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपए पर दबाव बना हुआ है.

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया डॉलर के मुकाबले 94.78 पर खुला. दिन के कारोबार के दौरान, यह 94.41 के उच्च स्तर और 94.82 के निचले स्तर तक गया. अंत में, यह अपने पिछले बंद भाव से 48 पैसे की बढ़त के साथ 94.43 पर बंद हुआ. इससे पहले, भारतीय मुद्रा 4 सितंबर को भी इसी स्तर पर बंद हुई थी. सोमवार को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे गिरकर 94.91 पर बंद हुआ था. मंगलवार को दशहरा के कारण विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहे.

रुपए में तेजी के प्रमुख कारण

  • जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,213 करोड़ रुपये का पब्लिक ऑफर बुधवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया. यह IPO 23 अक्टूबर को बंद होगा. 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड वाले इस इश्यू को खुलने के 100 मिनट के भीतर ही पूरा सब्सक्राइब कर लिया गया, जिससे यह अब तक का सबसे तेजी से सब्सक्राइब होने वाला IPO बन गया है.
  • इस बीच, डॉलर इंडेक्स जो छह मुद्राओं की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.59 पर कारोबार कर रहा था.
  • वैश्विक तेल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, फ्यूचर्स ट्रेड में 1.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 110.96 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
  • घरेलू इक्विटी बाजार में, सेंसेक्स 143.21 अंक गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 77.60 अंक की गिरावट के साथ 22,811.35 पर आ गया.
  • एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने नेट आधार पर 1,148.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

जियो आईपीओ की वजह से आई तेजी

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि IPO के जरिए आए विदेशी निवेश और अमेरिकी डॉलर के कुछ कमजोर होने से रुपया छह सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया. वैसे कमजोर घरेलू बाजार और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये की बढ़त को सीमित कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि डॉलर में व्यापक कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के चलते, रुपये के सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करने की उम्मीद है. “USDINR स्पॉट प्राइस के 94.20 रुपये से 94.80 रुपये के दायरे में रहने की संभावना है.

विश्लेषकों के अनुसार, रुपए के मजबूत होने से आयातित महंगाई कम हो सकती है और कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अन्य कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियों के लिए मुद्रा से जुड़ी लागत घट सकती है. इससे विमानन और तेल विपणन जैसे क्षेत्रों को भी फायदा हो सकता है, हालांकि इसका वास्तविक असर उनकी हेजिंग स्थिति और मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा.

आरबीआई के उपायों से रुपए को सपोर्ट

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म ‘लेमन’ के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि बड़े IPO में हिस्सा लेने वाले विदेशी निवेशक आमतौर पर रुपया हासिल करने के लिए डॉलर बेचते हैं, जिससे घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ जाती है. RBI ने भी तेल कंपनियों की ओर से स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग को कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतारचढ़ाव को नियंत्रित करने के उपायों के जरिए रुपए को समर्थन दिया है. उन्होंने आगे कहा कि रिकवरी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव और सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. गर्ग ने कहा कि आगे चलकर, रुपये की रिकवरी कितनी बनी रहेगी, यह IPO से आने वाले निवेश, RBI के दखल, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और अमेरिकी डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा.

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संपादकीय टीम

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