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बाजार की उठापटक में करना है ₹10 लाख का निवेश तो ये है रणनीति, नहीं होगा नुकसान!​

शेयर बाजार की उठापटक के बीच अगर आप भी निवेश को लेकर कन्फ्यूजन में हैं तो टेंशन की बात नहीं है. क्योंकि ऐसे समय में ज्यादातर निवेशकों के साथ ऐसा होता है. अगर आपको ₹10 लाख निवेश करना है तो अपने पैसे को सही जगह बांटने की जरूरत है. क्योंकि उतारचढ़ाव के समय में एक्सपर्ट्स […]

शेयर बाजार की उठापटक के बीच अगर आप भी निवेश को लेकर कन्फ्यूजन में हैं तो टेंशन की बात नहीं है. क्योंकि ऐसे समय में ज्यादातर निवेशकों के साथ ऐसा होता है. अगर आपको ₹10 लाख निवेश करना है तो अपने पैसे को सही जगह बांटने की जरूरत है. क्योंकि उतारचढ़ाव के समय में एक्सपर्ट्स इक्विटी, डेट और सोने में पैसा बांटकर निवेश करने की सलाह देते हैं. हालांकि, पैसा किस विकल्प में कितना लगाना चाहिए, यह निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है.

₹10 लाख निवेश करने का सही तरीका क्या है?

शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर निवेशक की जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता अलग होती है. इसी आधार पर निवेश की योजना बनानी चाहिए. इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सामान्य जोखिम लेने वाले और ज्यादा जोखिम उठाने वाले निवेशकों के लिए निवेश का सही कॉम्बिनेशन होना जरूरी है.

1. कम जोखिम लेने वाले निवेशक

एक्सपर्ट बताते हैं कि जो लोग अपने पैसे की सुरक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं और बाजार में बड़ी गिरावट से बचना चाहते हैं, उन्हें निवेश का ऐसा तरीका चुनना चाहिए जिसमें जोखिम थोड़ा कम हो. ऐसे निवेशक डेट जैसे विकल्पों पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं. हालांकि, कम जोखिम वाले निवेश में भी रिटर्न की गारंटी नहीं होती और विकल्प के हिसाब से जोखिम बदल सकता है.

2. सामान्य जोखिम लेने वाले निवेशक

ऐसे निवेशक कुछ जोखिम उठाकर अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन पूरा पैसा शेयर बाजार में नहीं लगाना चाहते. इनके लिए इक्विटी, डेट और सोने में निवेश का बैलेंस बनाने के बारे में सोचा जा सकता है. इससे निवेश एक ही ऑप्शन पर निर्भर नहीं रहता. फिर भी, बाजार में गिरावट आने पर नुकसान की आशंका बनी रहती है.

3. ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक

जो निवेशक बाजार में उतारचढ़ाव सह सकते हैं और लंबे समय में ज्यादा रिटर्न पाने का लक्ष्य रखते हैं, वे इक्विटी में ज्यादा निवेश करने पर विचार कर सकते हैं. हालांकि, शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ नुकसान का जोखिम भी ज्यादा रहता है. इसलिए निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर करना चाहिए.

सोने और डेट में निवेश क्यों जरूरी हो सकता है?

निवेश को अलगअलग हिस्सों में बांटने का मकसद जोखिम को बैलेंस करना है. इक्विटी से लंबे समय में पैसा बढ़ाने का मौका मिल सकता है, जबकि डेट पोर्टफोलियो को बैलेंस करने में मदद मिलती है. गोल्ड में निवेश करने से इन्वेस्टमेंट में वैराइटीआती है. लेकिन इनमें से कोई भी ऑप्शन हर हालत में मुनाफे की गारंटी नहीं देता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों की राय लेने का सुझाव देता है.
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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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