इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के मुख्य आरोपी और आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत अर्जी समेत 58 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने 58 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की. बता दें, अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि 26 सितंबर को बरेली में नमाज के बाद हिंसा साजिश का हिस्सा थी.

इस दौरान बरेली में कई स्थानों पर आगजनी, फायरिंग और पुलिस पर हमले किए गए. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हिंसा के पीछे तौकीर रजा की मुख्य भूमिका थी. हिंसा से जुड़े 10 मामलों में रिपोर्ट दर्ज की गई. इन सभी में मौलाना तौकीर रजा नामजद हैं. पुलिस ने तौकीर रजा को हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है.
तौकीर रजा को राजनीतिक दबाव में फंसाया
वही दूसरी तरफ बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि तौकीर रजा को राजनीतिक दबाव में फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है. हिंसा मामले की जांच पूरी हो चुकी है. ऐसे में उन्हें जमानत दिया जाना चाहिए. फिलहाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.
तौकीर रजा पर गंभीर आरोप
26 सितंबर 2025 को मौलाना तौकीर रजा ने बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में एक विशेष समुदाय के सदस्यों को इकट्ठा होने का आह्वान किया था. इस पर बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद लगभग 500 लोगों की भीड़ इकट्ठी हुई और मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ी.
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भीड़ ने पुलिस की चेतावनी को किया नजरअंदाज
बोर्ड आदि लिए और भड़काऊ नारे लगाते हुए भीड़ ने पुलिस की चेतावनी और समझाने की कोशिशों को नजरअंदाज किया. और आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई. इसके बाद भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस बल पर ईंटें, पत्थर और एसिड की बोतलें फेंकी और पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी भी की.
हिंसा में पुलिसकर्मियों के कपड़े फटे
एफआईआर के अनुसार हिंसा में पुलिसकर्मियों के कपड़े फट गए और दो अधिकारी घायल हो गए. आरोप है कि भीड़ की आक्रामक कार्रवाई ने क्षेत्र में आतंक का माहौल बना दिया. इसके बाद बातचीत के माध्यम से भीड़ को समझाने में विफल रहने के बाद पुलिस अधिकारियों को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी.





