
कल्पना कीजिए कि आपने किसी ऐप से घर की सफाई के लिए कर्मचारी बुक किया. कर्मचारी आपके घर पहुंचता है, लेकिन इस बार उसके सिर पर एक कैमरा बंधा हुआ है जो पूरे काम के दौरान रिकॉर्डिंग करता है. यही तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. बेंगलुरु स्थित ऑन-डिमांड होम सर्विस स्टार्टअप Pronto ने पुष्टि की है कि उसके कुछ चुनिंदा ग्राहक एक ऐसे प्रोग्राम का विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें घर के अंदर किए जाने वाले कामों को कर्मचारियों द्वारा पहने गए हेड-माउंटेड कैमरों से रिकॉर्ड किया जाता है. इस खुलासे के बाद प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंपनी के निवेशकों को भेजे गए एक मेमो में Pronto के वर्कफ्लो को “Physical AI” और रोबोटिक्स ट्रेनिंग डेटा से जोड़ा गया था. इसके बाद लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या ग्राहकों के घरों में रिकॉर्ड की गई वीडियो का इस्तेमाल भविष्य में AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जाएगा.
Pronto की सह-संस्थापक और CEO Anjali Sardana ने कहा कि यह पायलट प्रोग्राम केवल 0.1 प्रतिशत ग्राहकों के लिए उपलब्ध है. उनके अनुसार, यह सुविधा उन लोगों के लिए बनाई गई है जो घर पर मौजूद न होने के दौरान अजनबी कर्मचारियों को घर में आने देने को लेकर असहज महसूस करते हैं.
कंपनी का क्या कहना है?
कंपनी के मुताबिक कुछ ग्राहक इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनकी गैरमौजूदगी में घर में क्या हो रहा है. उन्हें डर होता है कि कोई सामान टूट सकता है, चोरी हो सकती है या काम सही तरीके से नहीं किया जाएगा. ऐसे ग्राहकों को अतिरिक्त निगरानी का विकल्प देने के लिए यह सुविधा शुरू की गई है.
कंपनी का दावा है कि रिकॉर्ड किए गए वीडियो को अनाम (Anonymised) बना दिया जाता है. ऑडियो रिकॉर्ड नहीं किया जाता और वीडियो 48 घंटे के भीतर डिलीट कर दिए जाते हैं. हालांकि कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि इन रिकॉर्डिंग्स से तैयार किए गए कुछ “Derived Datasets” को सुरक्षित रखा जाता है.
कौन सा डेटा रखा जाता है?
Pronto के अनुसार, वीडियो से निकाले गए डेटा में शरीर के जोड़ों और हाथों की गतिविधियों की मैपिंग जैसी जानकारी शामिल हो सकती है. इसे “Key Point Mapping” कहा जाता है. इस प्रकार का डेटा रोबोटिक्स और फिजिकल AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने में उपयोगी माना जाता है.
हालांकि जब कंपनी से पूछा गया कि क्या भविष्य में इस डेटा को किसी तीसरे पक्ष की AI या रोबोटिक्स कंपनी के साथ साझा किया जा सकता है या इसका व्यावसायिक उपयोग होगा, तो कंपनी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.
रिकॉर्डिंग के लिए अतिरिक्त शुल्क
यह सुविधा चुनने वाले ग्राहकों को प्रत्येक बुकिंग पर 29 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है. वहीं कैमरा पहनकर काम करने वाले कर्मचारियों को भी अतिरिक्त भुगतान किया जाता है. लेकिन कंपनी की सफाई के बावजूद लोगों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस विषय से जुड़े पोस्ट को हजारों लोगों ने देखा और उस पर प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने इसे डरावना बताते हुए कहा कि घर के अंदर की रिकॉर्डिंग का उपयोग AI ट्रेनिंग के लिए किया जाना गंभीर चिंता का विषय है.
क्या घर को पूरी तरह अनाम बनाना संभव है?
कई लोगों का मानना है कि घरों को वास्तव में पूरी तरह अनाम बनाना बेहद मुश्किल है. घर के अंदर नेम प्लेट, पहचान पत्र, बैंक कार्ड, बिजली के बिल और अन्य निजी दस्तावेज दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में केवल चेहरा छिपा देने से पूरी गोपनीयता सुनिश्चित नहीं होती.
यही वजह है कि कई उपभोक्ता डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि घर सबसे निजी स्थान होता है और वहां रिकॉर्डिंग के लिए बेहद सख्त नियम होने चाहिए.
प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने बनाई दूरी
इस विवाद के बाद दूसरी होम सर्विस कंपनियों ने खुद को इस मॉडल से अलग बताया. Abhiraj Bhal ने कहा कि उनकी कंपनी ग्राहकों की गोपनीयता को बेहद गंभीरता से लेती है और वह ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं है. इसी तरह Ayush Agarwal ने भी स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी इस तरह की रिकॉर्डिंग नहीं कर रही है.
AI की बढ़ती जरूरत और कानूनी सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि फिजिकल AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए वास्तविक दुनिया के डेटा की आवश्यकता होती है. रसोईघर, फर्नीचर, बर्तन, अलमारियां और मानव गतिविधियों से जुड़े दृश्य ऐसे सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सामग्री माने जाते हैं. यही कारण है कि दुनिया भर में इस प्रकार के डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है.
हालांकि कानूनी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेटा को सही तरीके से अनाम बनाया जाए तो वह भारत के डेटा संरक्षण कानूनों के दायरे से बाहर हो सकता है. लेकिन गैर-व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को लेकर अभी भी स्पष्ट नियमों की कमी है.
प्राइवेसी की आखिरी सीमा?
फिलहाल घर का मुख्य दरवाजा ही लोगों की निजी जिंदगी की सबसे बड़ी सुरक्षा माना जाता है. लेकिन जैसे-जैसे AI तकनीक और डेटा संग्रहण का दायरा बढ़ रहा है, यह बहस भी तेज हो रही है कि भविष्य में निजी स्थानों की गोपनीयता कितनी सुरक्षित रह पाएगी.





