ईरान और अमेरिका जंग में पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सार्वजनिक टिप्पणी की है. यूएई के क्राउन प्रिंस से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने मध्य पूर्व में शांति समझौता कराने में रचनात्मक भूमिका निभाने की बात कही है. जिनपिंग का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर कराने में पाकिस्तान और तुर्की फेल साबित हुआ है.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने समझौते का 4 फॉर्मूला रखा है. चीन के राष्ट्रपति का मानना है कि इसी से खाड़ी में शांति आएगी. बाकी सब बातें धीरे-धीरे होती रहेगी. जिनपिंग ने कहा कि संवाद के जरिए ही शांति आ सकती है.
जिनपिंग ने सुझाया सुलह का फॉर्मूला
1. अपने भाषण में शी जिनपिंग ने जंगलराज का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दुनिया दोबारा जंगलराज की तरफ नहीं लौट सकती. ताकतवर देशों को संयम बरतना चाहिए. जिनपिंग ने किसी भी तरह के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की.
2. जिनपिंग ने कहा कि ईरान की सरकार को स्वीकार करना होगा, तभी समाधान निकलेगा. ईरान एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके शासन को मान्यता देने से ही आगे की बातचीत संभव है. अगर उसे स्वीकार नहीं किया गया, तो संकट और बढ़ेगा.
3. सुलह के फॉर्मूले के तहत जिनपिंग ने कहा कि खाड़ी देशों को एक-दूसरे पर हमला नहीं करना चाहिए और न ही हमले की किसी साजिश में शामिल होना चाहिए. ऐसा करने से स्थिति और बिगड़ सकती है.
4. जिनपिंग ने स्थायी शांति पर जोर दिया. उनके अनुसार संवाद बढ़ाने की ज़रूरत है, ताकि समस्या का समाधान निकले. दबाव डालकर शांति नहीं लाई जा सकती.
जिनपिंग का बयान अहम क्यों है?
जंग के बीच पहली बार जिनपिंग ने ईरान और अमेरिका को लेकर कोई बयान दिया है. चीन को ईरान का करीबी देश माना जाता है. अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद चीन ईरान से तेल खरीदता है. वहीं मई के मध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा प्रस्तावित है.
ऐसे में जिनपिंग की यह पहल काफी अहम है. पिछली बार चीन के कहने पर ही ईरान वार्ता के लिए तैयार हुआ था. इसके बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक बैठक आयोजित की गई थी. हालांकि, इस बैठक में शांति समझौते को लेकर बात नहीं बन पाई थी.





