कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार रात हुए एक उप-चुनावों में जीत हासिल की है. इस जीत के बाद उनकी लिबरल पार्टी बिना किसी विपक्षी दल के समर्थन के कानून पारित कर सकेगी. इस चुनाव में संसद की 343 सीटों में से तीन खाली सीटों के लिए वोट डाले गए थे. उप-चुनाव से पहले लिबरल पार्टी के पास हाउस ऑफ कॉमन्स (निचले सदन) में 171 सदस्य थे. हाल ही में विपक्षी दलों (खासकर मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी) के 5 सदस्य कार्नी की पार्टी में शामिल हो गए. इससे लिबरल पार्टी बहुमत के करीब पहुंच गई थी, सोमवार को तीन सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने उनका बहुमत पक्का कर दिया.

कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (CBC) ने भविष्यवाणी की है कि टोरंटो वाली सीट पर लिबरल पार्टी जीतेगी. बाकी दो सीटों (टेरेबोन सहित) के नतीजों की उम्मीद सोमवार रात तक आ जाने की है. राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डेनियल बेलैंड के मुताबिक लिबरल पार्टी के लिए टोरंटो की दोनों सीटें जीतना लगभग तय है. इस जीत के बाद लिबरल पार्टी 2029 तक सत्ता में बनी रह सकती है.
कार्नी की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे ट्रंप!
CBC को दिए इंटरव्यू में प्रोफेसर बेलैंड ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान कनाडा-अमेरिका संबंध बिगड़ने से कई कनाडाई लोग (जो खुद को लिबरल नहीं मानते) भी प्रधानमंत्री कार्नी के पीछे एकजुट हो गए हैं. मार्क कार्नी पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के प्रमुख रह चुके हैं. उन्होंने 2025 में जस्टिन ट्रूडो की जगह प्रधानमंत्री बनने के बाद लिबरल पार्टी को केंद्र-दक्षिणपंथ की ओर ले जाया है.
कार्नी ने किया खुद को साबित
इस चुनाव के बाद कार्नी की पार्टी संसद में पूर्ण बहुमत के साथ आ गई है. प्रोफेसर बेलैंड ने कहा कि कार्नी ने साबित कर दिया है कि वह एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं, भले ही उन्होंने राजनीति में पिछले साल जनवरी में ही कदम रखा था. उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) पर दिया गया उनका भाषण था, जिसमें उन्होंने बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों के साथ आर्थिक जबरदस्ती करने की निंदा की थी.
एक विपक्षी सदस्य ने तो इसी भाषण को अपना दल बदलने की वजह बताया. बेलैंड के मुताबिक, “इस भाषण से देश में कार्नी के समर्थन को बहुत बढ़ावा मिला है और अब वह 13 महीने पहले की तुलना में कहीं ज्यादा लोकप्रिय हैं.”
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