रविवार, 11 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
UP Congress Fight: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हंगामा, अजय राय और ममता चौधरी भिड़े, कार्यकर्ताओं में जूते-चप्पल चले​ | Bike Petrol Pump Mistakes: पेट्रोल भरवाते समय भूलकर न करें ये गलतियां, नहीं तो बढ़ जाएगा मेंटेनेंस खर्च​ | बिल्डर ने फंसाए घर खरीदारों के पैसे, ED ने अटैच की 54.71 करोड़ की प्रॉपर्टी; अब कैसे मिलेगा फ्लैट?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

पहली तिमाही में जापान से आया $5.71 बिलियन FDI, सिंगापुर और अमेरिका को छोड़ा पीछे​

बीते कुछ महीनों में भारत और जापान के बीच रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं. अगर बात आर्थिक तौर पर करें तो जापान की कई कंपनियों ने भारत में निवेश किया है. रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में जापान, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. […]

बीते कुछ महीनों में भारत और जापान के बीच रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं. अगर बात आर्थिक तौर पर करें तो जापान की कई कंपनियों ने भारत में निवेश किया है. रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में जापान, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान जापान से 5.71 अरब डॉलर का निवेश आया, जो पूरे वित्त वर्ष 202526 में आए 3.74 अरब डॉलर से अधिक है. वित्त वर्ष 202526 में जापान से भारत में 2.48 अरब डॉलर का निवेश आया था.

7 लाख करोड़ के निवेश का टारगेट

आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत को मिले कुल 19.81 अरब डॉलर के इक्विटी निवेश में जापान की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही. जापान ने वर्ष 2025 में भारत में एक दशक से अधिक की अवधि में 10 लाख करोड़ येन निवेश करने का लक्ष्य रखा था. कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल पिछले महीने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए जापान की यात्रा पर गए थे. नागोया में उन्होंने कहा था कि जापानी कंपनियां भारत में एक दशक में 10 लाख करोड़ येन निवेश करने की प्रतिबद्धता के तहत अबतक एक लाख करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी हैं.

क्या कहते हैं जानकार

डेलॉयट इंडिया के भागीदार अनिल तलरेजा ने कहा कि जापानी संस्थागत निवेशक अब भारत में अधिक सक्रिय हो रहे हैं और जापानी वित्तीय संस्थानों की भागीदारी बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि भूराजनीतिक तनाव, धीमी आर्थिक वृद्धि, श्रम एवं मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी और शुल्क संबंधी जोखिमों के कारण जापानी कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रही हैं तथा कुछ क्षेत्रों पर निर्भरता की समीक्षा कर रही हैं. शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के इक्विटी भागीदार रुद्र कुमार पांडेय ने भी कहा कि पहली तिमाही में जापान का सबसे बड़ा निवेशक बनना भारत में उसके मजबूत भरोसे को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि निवेश के आंकड़ों में बड़े रणनीतिक सौदों की अहम भूमिका रही है, जबकि जापानी कंपनियों की विस्तार योजनाएं विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं और प्रौद्योगिकी में दीर्घकालिक अवसरों की ओर इशारा करती हैं.

अमेरिका और सिंगापुर भी छूटे पीछे

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान भारत में अमेरिका से आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इक्विटी निवेश 76% घटकर 1.34 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.61 अरब डॉलर था. वहीं दूसरी ओर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश इक्विटी इनफ्लो के मामले में सिंगापुर दूसरा सबसे बड़ा रहा. इसने 5.22 बिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY