मंगलवार, 22 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
नए CCTV नियमों से बदलेगा बाजार, ₹1.3 लाख करोड़ के सेक्टर में इन 3 शेयरों पर नजर​ | IPL 2027 | Zaheer Khan बने Chennai Super Kings के नए हेड कोच, स्टीफन फ्लेमिंग के युग का अंत, CSK की बड़ी वापसी की तैयारी​ | UPI को लेकर सरकार का बड़ा प्लान, MDR से बैंकों की कमाई शुरू होने पर खत्म हो सकती है सब्सिडी​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

ननकाना साहिब से करतारपुर तक, गुरु नानक देव जी के जन्म से अंतिम पड़ाव तक की पूरी कहानी​

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु थे. वे महान संत, समाज सुधारक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे. उन्होंने लोगों को सच्चाई, मेहनत और सेवा का रास्ता दिखाया. गुरु नानक देव जी ने जाति, धर्म, ऊंचनीच और भेदभाव का विरोध किया. उनका मानना था कि ईश्वर एक है. सभी मनुष्य उसी ईश्वर की संतान […]

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु थे. वे महान संत, समाज सुधारक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे. उन्होंने लोगों को सच्चाई, मेहनत और सेवा का रास्ता दिखाया. गुरु नानक देव जी ने जाति, धर्म, ऊंचनीच और भेदभाव का विरोध किया. उनका मानना था कि ईश्वर एक है. सभी मनुष्य उसी ईश्वर की संतान हैं. उन्होंने अपना जीवन मानवता की भलाई के लिए समर्पित किया. उनकी वाणी आज भी लोगों को सही जीवन जीने की प्रेरणा देती है.

गुरु नानक देव जी को सांसारिक दिखावे में रुचि नहीं थी. वे गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करते थे. एक बार उनके पिता ने उन्हें कुछ पैसे देकर व्यापार करने भेजा. रास्ते में नानक जी को कुछ भूखे साधु मिले. उन्होंने उन पैसों से साधुओं के लिए भोजन खरीद लिया. घर लौटकर उन्होंने कहा कि उन्होंने सच्चा सौदा किया है. उनके लिए भूखे लोगों को भोजन कराना ही सबसे अच्छा व्यापार था. इस घटना से पता चलता है कि उनके मन में बचपन से ही दया और सेवा की भावना थी. आइए उनकी पुण्यतिथि के बहाने उनके जीवन के अहम पड़ावों के बारे में जानते हैं.

ननकाना साहिब: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का हिस्सा

गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवंडी गांव में हुआ था. आज यह स्थान पाकिस्तान में है. इसे अब ननकाना साहिब कहा जाता है. उनके पिता का नाम मेहता कालू जी था. वे गांव के पटवारी थे. उनकी माता का नाम माता तृप्ता जी था. गुरु नानक देव जी की एक बड़ी बहन थीं. उनका नाम बेबे नानकी था. बेबे नानकी अपने भाई से बहुत प्रेम करती थीं. उन्होंने बचपन में ही नानक जी की महानता को पहचान लिया था. नानक जी बचपन से ही शांत और गंभीर स्वभाव के थे. वे सामान्य बच्चों से अलग दिखाई देते थे. वे अक्सर ईश्वर, जीवन और संसार के बारे में सोचते रहते थे.

ननकाना साहिब.

गुरु नानक देव जी ने स्थानीय भाषा और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया. उन्होंने फारसी और संस्कृत का ज्ञान भी प्राप्त किया. उनके शिक्षक उनकी बुद्धि से प्रभावित थे. नानक जी हर बात को गहराई से समझना चाहते थे. वे केवल रटने पर विश्वास नहीं करते थे. वे ज्ञान को जीवन में उतारने को अधिक जरूरी मानते थे. उनका विचार था कि पूजा तभी सार्थक है, जब मन में सच्चाई और दया हो. केवल बाहरी वेशभूषा या रस्मों से मनुष्य महान नहीं बनता.

सुल्तानपुर लोधी: बहन के घर से बदला जीवन

युवावस्था में गुरु नानक देव जी अपनी बहन बेबे नानकी के पास सुल्तानपुर लोधी गए. यह स्थान आज पंजाब में है. बेबे नानकी के पति जयराम जी ने उन्हें नवाब दौलत खान लोधी के मोदीखाने में काम दिलाया. यहां नानक जी अनाज का हिसाब रखते थे. वे ईमानदारी से अपना काम करते थे. गरीब लोग उनके पास आते थे. नानक जी जरूरतमंदों की मदद करते थे. कहा जाता है कि अनाज तौलते समय वे तेरह की संख्या पर पहुंचकर बार बार कहते थे, तेरा, तेरा. उनके मन में यह भाव था कि सब कुछ ईश्वर का है.

सुल्तानपुर लोधी शहर का गुरुद्वारा श्री बेर साहिब.

काली बेईं नदी नहाने गए और तीन दिन बा लौटे

सुल्तानपुर लोधी में ही उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक घटना हुई. एक दिन गुरु नानक देव जी काली बेईं नदी में स्नान करने गए. वे कुछ समय के लिए दिखाई नहीं दिए. लोगों ने उन्हें बहुत खोजा. तीन दिन बाद वे वापस लौटे. इस घटना के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया. उन्होंने मानवता को एकता का संदेश दिया. उनका प्रसिद्ध संदेश थान कोई हिंदू, न मुसलमान. इसका अर्थ यह था कि ईश्वर की नजर में सभी मनुष्य समान हैं. वे लोगों को धर्म के नाम पर लड़ने से रोकते थे. वे कहते थे कि सच्चा मनुष्य वही है, जो ईमानदार हो और दूसरों से प्रेम करे.

गुरुनानक देव जी उत्तर में हिमालय और तिब्बत के आसपास के क्षेत्रों की यात्रा की.

बंगाल से श्रीलंका तक, धर्म का प्रचार किया

गुरु नानक देव जी ने लोगों तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए लंबी यात्राएं कीं. इन यात्राओं को उदासियां कहा जाता है. उन्होंने भारत के कई क्षेत्रों की यात्रा की. वे पूर्व में बंगाल और असम तक गए. दक्षिण में श्रीलंका के निकट क्षेत्रों तक पहुंचे. उन्होंने उत्तर में हिमालय और तिब्बत के आसपास के क्षेत्रों की यात्रा की. पश्चिम में वे मक्का और मदीना तक गए, ऐसा सिख परंपरा में माना जाता है. इन यात्राओं में उनके साथ भाई मरदाना जी रहते थे. भाई मरदाना जी रबाब बजाते थे. गुरु नानक देव जी शबद गाते थे. भाई मरदाना जी मुस्लिम परिवार से थे. उनका साथ यह संदेश देता था कि सच्ची संगत जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर होती है.

हरिद्वार: अंधविश्वास से दूर रहने का संदेश

गुरु नानक देव जी एक बार हरिद्वार पहुंचे. वहां लोग पुरखों को जल चढ़ा रहे थे. गुरु नानक देव जी ने विपरीत दिशा में जल फेंकना शुरू किया. लोगों ने उनसे पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे अपने खेतों को पानी भेज रहे हैं. लोगों ने कहा कि पानी इतनी दूर कैसे पहुंच सकता है. तब गुरु नानक देव जी ने समझाया कि यदि उनका पानी दूर खेतों तक नहीं पहुंच सकता, तो केवल रस्म निभाने से मृत लोगों तक पानी कैसे पहुंचेगा. उन्होंने लोगों को अंधविश्वास छोड़कर सच्चे कर्म करने का संदेश दिया.

गुरु नानक देव जी ने जीवन के अंतिम वर्ष करतारपुर में बिताए.

करतारपुर: सिखों के लिए तीर्थ है

जीवन के अंतिम वर्षों में गुरु नानक देव जी करतारपुर में रहने लगे. यह स्थान आज पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे स्थित है. उन्होंने यहां एक साधारण और समानतापूर्ण समाज बनाया. लोग मिलकर खेती करते थे. सभी मेहनत करते थे और मिलकर भोजन करते थे. यहीं से लंगर की परंपरा को मजबूत रूप मिला. लंगर में हर व्यक्ति एक साथ बैठकर भोजन करता था. इसमें अमीर और गरीब का कोई अंतर नहीं होता था. ऊंची और नीची जाति का भी कोई भेद नहीं था. करतारपुर में गुरु नानक देव जी ने तीन मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया.

  • पहला: नाम जपो. इसका अर्थ है कि मनुष्य ईश्वर को याद करे. वह अपने जीवन में आध्यात्मिकता और अच्छे विचारों को स्थान दे.
  • दूसरा: किरत करो. इसका अर्थ है कि मनुष्य ईमानदारी से मेहनत करके जीवन जीए.
  • तीसरा: वंड छको. इसका अर्थ है कि अपनी कमाई और भोजन को जरूरतमंदों के साथ बांटकर खाएं.

गुरु नानक देव जी केवल उपदेश नहीं देते थे. वे खुद भी इन्हीं सिद्धांतों पर चलते थे.

सामाजिक बुराइयों का करते थे विरोध

गुरु नानक देव जी ने जाति व्यवस्था का विरोध किया. उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान उसके कर्मों से होती है. उन्होंने महिलाओं को सम्मान देने की बात कही. उस समय महिलाओं को समाज में कम अधिकार मिलते थे. गुरु नानक देव जी ने इस सोच को चुनौती दी. उन्होंने कहा कि जिस महिला से राजा और महान व्यक्ति जन्म लेते हैं, उसे छोटा कैसे कहा जा सकता है. उन्होंने लालच, झूठ, अहंकार और शोषण की निंदा की. वे धार्मिक पाखंड के खिलाफ थे. उनका मानना था कि सच्ची भक्ति मन और कर्म दोनों में दिखाई देनी चाहिए.

सिखों के लिए खास है ननकाना साहिब

ननकाना साहिब गुरु नानक देव जी की जन्मभूमि है. यह सिखों के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है. यहां कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं. जन्मस्थान गुरुद्वारा जनम अस्थान उनमें सबसे प्रमुख है. दुनिया भर से श्रद्धालु ननकाना साहिब जाते हैं. वे गुरु नानक देव जी के जीवन को याद करते हैं. यह स्थान उनके बचपन और प्रारंभिक जीवन की यादों से जुड़ा है.

अंतिम समय करतारपुर में बिताए

गुरु नानक देव जी ने अपने अंतिम वर्ष करतारपुर में बिताए. उन्होंने भाई लहणा जी को अपना उत्तराधिकारी चुना. बाद में भाई लहणा जी गुरु अंगद देव जी के नाम से प्रसिद्ध हुए. गुरु नानक देव जी ने बताया कि गुरु पद जन्म या परिवार के आधार पर नहीं मिलता. इसके लिए सेवा, विनम्रता और सच्ची भक्ति जरूरी है. 22 सितंबर 1539 को गुरु नानक देव जी ज्योतिजोत समा गए. उनके जीवन ने समाज को नई दिशा दी.

क्या है गुरु नानक देव जी की विरासत?

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं. वे एकता, प्रेम और सेवा का संदेश देती हैं. उनकी वाणी में इंसान को भीतर से बदलने की शक्ति है. वे कहते हैं कि ईश्वर को पाने के लिए मन को साफ करना जरूरी है. उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चाई के साथ कमाई करनी चाहिए. जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए. सभी मनुष्यों को समान समझना चाहिए. ननकाना साहिब से करतारपुर तक गुरु नानक देव जी का जीवन मानवता की यात्रा है. यह यात्रा हमें अंधविश्वास से ज्ञान की ओर ले जाती है. यह भेदभाव से समानता की ओर ले जाती है. यह स्वार्थ से सेवा की ओर ले जाती है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY