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रामलगन और सौरभ के बाद विनोद साहनी हत्याकांड पर गरमाई पूर्वांचल की सियासत​

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले विनोद साहनी समेत कई हत्याकांड अब सियासी और जातीय बहस का केंद्र बनते जा रहे हैं. गोंडा में व्यापारी विनोद साहनी की हत्या के बाद पूर्वांचल में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. वहीं अयोध्या में मौर्य समाज और प्रतापगढ़ में विश्वकर्मा समाज से जुड़े हत्याकांडों ने इस बहस […]

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले विनोद साहनी समेत कई हत्याकांड अब सियासी और जातीय बहस का केंद्र बनते जा रहे हैं. गोंडा में व्यापारी विनोद साहनी की हत्या के बाद पूर्वांचल में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. वहीं अयोध्या में मौर्य समाज और प्रतापगढ़ में विश्वकर्मा समाज से जुड़े हत्याकांडों ने इस बहस को और हवा दे दी है. तीनों मामलों में पीड़ितों की सामाजिक पृष्ठभूमि और आरोपियों की जातीय पहचान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है.

समाजवादी पार्टी , कांग्रेस समेत विपक्ष इसे पिछड़े वर्ग के खिलाफ अन्याय के नैरेटिव से जोड़ रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है और विपक्ष इन घटनाओं पर राजनीति कर रहा है. इसी बीच विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने वाले हैं.

सोशल मीडिया पोस्ट से हत्या तक पहुंचा मामला

गोंडा में बर्तन कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के बाद से ही मामला गरमाया हुआ है. परिवार की ओर से पहले से धमकी मिलने के आरोप लगाए गए थे. हत्या के बाद निषाद समाज में आक्रोश बढ़ा और राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए. मामले में आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है. इसी दौरान विनोद साहनी के समर्थन में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हुआ और कथित विवादित टिप्पणियों को लेकर भी पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की.

अब CM योगी से मिलेंगे संजय निषाद

विनोद साहनी हत्याकांड पर अब संजय निषाद सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे. संजय निषाद की ओर से आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है. इस मुलाकात में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन की मांग भी रखे जाने की बात सामने आ रही है. संजय निषाद के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि वह एक तरफ योगी सरकार में मंत्री हैं और दूसरी तरफ निषाद समाज के बड़े नेता हैं.

अकेला गोंडा नहीं, अयोध्या और प्रतापगढ़ भी चर्चा में

विनोद साहनी हत्याकांड को अब अयोध्या और प्रतापगढ़ के मामलों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. अयोध्या में 25 अगस्त को रामलगन मौर्य की गोली मारकर हत्या हुई थी. उनकी मां पार्वती देवी भी हमले में घायल हुई थीं. यह मामला पुराने जमीन और रास्ते के विवाद से जुड़ा बताया गया है. वहीं प्रतापगढ़ में सौरभ विश्वकर्मा हत्याकांड को लेकर भी राजनीतिक विवाद चल रहा है. इन दोनों मामलों में भी पीड़ितों की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर राजनीतिक संगठन सक्रिय हुए हैं.

OBC बनाम सवर्ण का नैरेटिव क्यों बन रहा?

तीनों घटनाओं को लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और इन्हें पिछड़े वर्ग के खिलाफ कथित अन्याय के नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. गोंडा में विनोद साहनी मल्लाह/निषाद समाज से आते हैं. अयोध्या में रामलगन मौर्य OBC समुदाय से जुड़े थे, जबकि प्रतापगढ़ में सौरभ विश्वकर्मा के मामले को विश्वकर्मा समाज के सवाल से जोड़ा जा रहा है. इन मामलों में आरोपियों की जातीय पहचान के कारण OBC बनाम सवर्ण की बहस का रूप देना शुरू किया है.

अखिलेश के PDA को मिल रहा नया मुद्दा?

विनोद साहनी मामले में अखिलेश यादव के परिवार से फोन पर बात करने और विपक्षी नेताओं के पीड़ित परिवार से मिलने के प्रयास ने भी इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है. कांग्रेस और AIMIM समेत दूसरे दल भी पीड़ित परिवार तक पहुंचने की कोशिश कर चुके हैं. यानी सपा इन घटनाओं को अलगअलग जिलों के अपराध के तौर पर नहीं, बल्कि OBC असुरक्षा और सामाजिक न्याय के बड़े नैरेटिव में जोड़ने की कोशिश कर रही है.

BJP के लिए चिंता क्यों?

बीजेपी की उत्तर प्रदेश की सोशल इंजीनियरिंग में गैरयादव OBC का बड़ा महत्व रहा है. मौर्य, शाक्य, सैनी, कुर्मी, निषाद और विश्वकर्मा जैसे समुदाय बीजेपी के सामाजिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में बड़ा झटका लगा था. ऐसे में 2027 से पहले इन समुदायों में अगर किसी तरह की असुरक्षा या नाराजगी का राजनीतिक माहौल बनता है, तो विपक्ष उसे चुनावी मुद्दे में बदलने की कोशिश करेगा.

सहयोगी दलों पर भी दबाव

सिर्फ बीजेपी ही नहीं, उसके सहयोगी दलों के लिए भी यह चुनौती है. निषाद पार्टी को निषाद समाज के बीच जवाब देना है. इसी तरह अपना दल को कुर्मीपटेल वोटरों और सुभासपा को राजभर समाज के बीच अपनी राजनीतिक भूमिका साबित करनी होती है. यूपी में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने नैरेटिव तैयार करने शुरू कर दिए हैं. बीजेपी की कोशिश होगी कि कानूनव्यवस्था के हर मामले में तेज कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया जाए कि अपराधी की जाति या राजनीतिक पहचान नहीं देखी जाती.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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