भारत में सोना सिर्फ एक मेटल या गहना नहीं है, बल्कि भारतीय घरों में इसका एक खास भावनात्मक और पवित्र महत्व है. इसी को सुरक्षित रखने के लिए, भारतीय मानक ब्यूरो ने 16 जून 2021 से सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी थी. यह शुल्क सोने की हर वस्तु पर एक समान रूप से लगाया जाता है, चाहे उसका वजन कुछ भी हो.

वैसे अभी भी सोने के कुछ ऐसे गहने हैं जिन्हें इस अनिवार्य हॉलमार्किंग नियम से छूट दी गई है. इसका मतलब यह है कि इन गहनों पर कोई हॉलमार्किंग शुल्क नहीं लगता है. 14 सितंबर 2026 से, BIS सोने की हर वस्तु पर 75 रुपए का हॉलमार्किंग शुल्क लगाता है.
इसलिए, अगर आप इस धनतेरस या दिवाली पर ऐसी कोई सोने की वस्तु खरीदते हैं जो हॉलमार्किंग के दायरे से बाहर है, तो आपको इसके लिए शुल्क देने की जरूरत नहीं है. यहां उन सोने के गहनों और वस्तुओं की लिस्ट दी गई है, जिन पर जौहरियों के लिए हॉलमार्किंग कराना अनिवार्य नहीं है.
इन वस्तुओं पर कोई हॉलमार्किंग शुल्क नहीं लगता
- 2 ग्राम से कम वजन वाली सोने का सामन
- कुंदन, पोलकी या जड़ाऊ आभूषण
- निर्यात के लिए बनाई गई कोई भी वस्तु, जो विदेशी खरीदार की जरूरतों या स्टैंडर्ड के अनुसार हो
- चिकित्सा, दंत चिकित्सा, पशु चिकित्सा, वैज्ञानिक या औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सोने के सामान, सोने के धागे से बने सामान
- ऐसी कोई भी वस्तु जो पूरी तरह से तैयार नहीं है और जिसे आगे और बनाने या प्रोसेस करने की जरूरत है
- सोने की ईंट, चाहे वह बार, प्लेट, शीट, फॉयल, रॉड, तार, पट्टी, ट्यूब या सिक्के के रूप में हो
- अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के लिए ले जाए जाने वाले गहने
- देश के भीतर होने वाली ‘बिजनेसटूबिजनेस’ प्रदर्शनियों के लिए गहने
- सोने की घड़ियां और फाउंटेन पेन
डिटैचेबल गहनों के मामले में हॉलमार्किंग फीस कैसे लागू होगी?
कई गहनों में दो या उससे अधिक हिस्से होते हैं जिन्हें आपस में जोड़ा जा सकता है, जैसे कि झुमके या हार. ऐसी वस्तुओं के लिए, BIS का कहना है कि खरीदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जोड़े में मौजूद हर वस्तु और अलग होने वाले सभी हिस्सों पर अलगअलग HUID अंकित हों.
गहने का ‘अलग होने वाला’ हिस्सा वह होता है जिसे आसानी से निकाला या बदला जा सकता है. BIS का कहना है कि किसी जोड़ी की हर वस्तु और उसके अलग होने वाले सभी हिस्सों पर अलगअलग HUID के साथ हॉलमार्क होना चाहिए. ग्राहकों को शुद्धता से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए, हर वस्तु पर हॉलमार्किंग और शुद्धता की जानकारी जरूर देखनी चाहिए.
डिटेचेबल गहनों का वजन 2 ग्राम से कम है, तो क्या होगा?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए कि आप इस धनतेरस पर सोने की बालियों की एक जोड़ी खरीद रहे हैं. अब मान लीजिए कि बालियों का पेंच भी सोने का ही बना है, लेकिन उसका वजन 2 ग्राम से कम है. BIS के नियमों के अनुसार, अगर सोने की बालियों का वजन 2 ग्राम से ज्यादा है, तो जौहरी उनके सामने वाले हिस्से पर हॉलमार्क लगाएगा. लेकिन बालियों के पेंच पर हॉलमार्क नहीं लगाया जाएगा, क्योंकि उसका वजन 2 ग्राम से ज्यादा नहीं है.
2026 में सोने की हॉलमार्किंग फीस
त्योहारी सीजन से ठीक पहले, सितंबर 2026 में BIS ने सोने और चांदी की वस्तुओं पर लगने वाले हॉलमार्किंग शुल्क में बदलाव किया. अब जौहरियों को किसी मान्यता प्राप्त ‘असेसिंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर’ को सोने की हर वस्तु के लिए 75 रुपए का शुल्क देना होगा. पहले यह शुल्क 45 रुपए था, यानी इसमें लगभग 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ध्यान दें कि आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रति खेप कम से कम 200 रुपए का शुल्क लगेगा.
क्या हॉलमार्किंग का शुल्क आपके कुल बिल में जोड़ा जाता है?
हां, जौहरी इस शुल्क को आपके अंतिम बिल में जोड़ देते हैं. गहनों की अंतिम कीमत तय करने के लिए जौहरी आमतौर पर इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हैं:
कुल कीमत = × 1.03 + हॉलमार्किंग शुल्क
यहां यह बताना जरूरी है कि सोने के गहनों पर लगा हॉलमार्क, उन गहनों के पूरे जीवनकाल के लिए मान्य रहेगा.