केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। जुलाई 2026 से मिलने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के पक्ष में ‘ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ ने मोर्चा खोल दिया है।

संगठन ने केंद्र सरकार को खत लिखकर जल्द से जल्द DA और DR की घोषणा करने की जोरदार मांग की है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के परफॉर्मेंस लिंक्ड बोनस की गणना के लिए सैलरी लिमिट को भी 7,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 21,000 रुपये करने का आग्रह किया गया है। अगर सरकार इस मांग को हरी झंडी दे देती है, तो इस बार त्योहारों के सीजन में कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस की रकम में बंपर इजाफा देखने को मिल सकता है।
जुलाई से कितना बढ़ सकता है महंगाई भत्ता
AIDEF ने 10 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिवों को भेजे गए अपने पत्र में साफ कहा है कि लगातार बढ़ती महंगाई की वजह से कर्मचारियों और पेंशनधारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में डीए की घोषणा में हो रही देरी से कर्मचारियों में चिंता फैल रही है। संगठन ने मांग रखी है कि 1 जुलाई 2026 से ड्यू डीए और डीआर का ऐलान बिना किसी और देरी के तुरंत किया जाए।
बता दें कि केंद्र सरकार साल में दो बार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर डीए और डीआर में बदलाव करती है। फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स को 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। जून 2026 तक के AICPIIW आंकड़ों के रुझानों को देखें तो इस बार डीए में बढ़ोतरी होकर इसके करीब 63 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, बढ़ोतरी के सटीक आंकड़ों पर अंतिम मोहर सरकार के आधिकारिक ऐलान के बाद ही लगेगी।
7,000 रुपये की बोनस लिमिट को बढ़ाकर 21,000 करने की मांग
महंगाई भत्ते के साथसाथ AIDEF ने दशहरे से ठीक पहले कर्मचारियों के बोनस को लेकर भी सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। संगठन का कहना है कि नॉनगजेटेड केंद्रीय कर्मचारियों को दिए जाने वाले परफॉर्मेंस लिंक्ड बोनस के कैलकुलेशन की मौजूदा सैलरी सीलिंग को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाना चाहिए। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है, इसलिए कर्मचारी बोनस के ऐलान की राह देख रहे हैं। संगठन की दलील है कि आज के दौर में जब न्यूनतम बेसिक सैलरी खुद करीब 21,000 रुपये तक पहुंचने की बात की जा रही है, तब बोनस की गणना के लिए सालों पुरानी 7,000 रुपये की लिमिट को लागू बनाए रखना सही नहीं है।
बोनस सीलिंग में बदलाव की पीछे की वजह
AIDEF ने नेशनल काउंसिल जेसीएम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा 7वें वेतन आयोग के न्यूनतम बेसिक पे और उस पर मिलने वाले डीए से कम नहीं होनी चाहिए। 25 नवंबर 2025 के संदर्भ में न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये और 58 फीसदी डीए यानी 10,440 रुपये को मिलाकर कुल रकम 28,440 रुपये बैठती है। इसी गणित के आधार पर संगठन बोनस सीलिंग में बदलाव की मांग कर रहा है।
हालांकि, बोनस कैलकुलेशन के लिए फिलहाल 7,000 रुपये की लिमिट ही लागू है। वित्त मंत्रालय ने भी इस मसले पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है कि वित्त वर्ष 202526 से बोनस कैलकुलेशन के लिए न्यूनतम सैलरी की कौनसी लिमिट मानी जानी चाहिए। संगठन की मांग है कि वित्त वर्ष 202526 से ही 21,000 रुपये की नई सीमा लागू कर कर्मचारियों को उसी संशोधित सीमा के हिसाब से बोनस जारी किया जाए।
21,000 रुपये की सीमा लागू होने पर कितना मिलेगा बोनस
अगर सरकार AIDEF की इस मांग को स्वीकार कर बोनस कैलकुलेशन की लिमिट 7,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये कर देती है, तो कर्मचारियों को मिलने वाली बोनस राशि में काफी बड़ा अंतर आ जाएगा। मौजूदा सीमा और प्रस्तावित नई सीमा के हिसाब से अनुमानित बोनस कुछ इस प्रकार रहेगा।