बुधवार, 12 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की एक्सपोर्ट उड़ान, 1 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर गोयल ने जताया भरोसा​ | Janhvi Kapoor के बाद अब Khushi Kapoor को राहत, Delhi HC का अश्लील कंटेंट हटाने और AI दुरुपयोग पर कड़ा आदेश​ | Babar Azam की दमदार वापसी, ICC Test रैंकिंग के टॉप 10 में फिर शामिल​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

तालिबानी शासन के पांच साल: अफगान महिलाओं की जिंदगी पर बढ़ती पाबंदियां​

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटे पांच साल पूरे होने को हैं और इस दौरान महिलाओं एवं लड़कियों के अधिकारों पर लगी पाबंदियां लगातार गहरी हुई हैं। शिक्षा से लेकर रोजगार और सार्वजनिक जीवन तक महिलाओं की भागीदारी सीमित कर दी गई है। UNESCO के अनुसार अगस्त 2026 तक करीब 2.4 करोड़ नहीं, […]

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटे पांच साल पूरे होने को हैं और इस दौरान महिलाओं एवं लड़कियों के अधिकारों पर लगी पाबंदियां लगातार गहरी हुई हैं। शिक्षा से लेकर रोजगार और सार्वजनिक जीवन तक महिलाओं की भागीदारी सीमित कर दी गई है। UNESCO के अनुसार अगस्त 2026 तक करीब 2.4 करोड़ नहीं, बल्कि 24 लाख अफगान लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं। अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है जहां लड़कियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर औपचारिक प्रतिबंध कायम है।

तालिबान ने मार्च 2022 में लड़कियों के लिए माध्यमिक स्कूल बंद किए थे और दिसंबर 2022 में महिलाओं के विश्वविद्यालय जाने पर भी रोक लगा दी गई। इसके साथ ही महिलाओं के रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर भी कई तरह की पाबंदियां लागू हैं। UNICEF के मुताबिक इन प्रतिबंधों के कारण 2030 तक अफगानिस्तान में करीब 20 हजार महिला शिक्षकों और 5,400 महिला स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है।

इन हालात का असर सिर्फ महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर नहीं, बल्कि पूरे अफगान समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। UNICEF के अनुमान के मुताबिक महिलाओं की शिक्षा और श्रम भागीदारी पर प्रतिबंधों से अफगानिस्तान को हर साल करीब 84 करोड़ डॉलर नहीं, बल्कि 84 मिलियन डॉलर के आर्थिक उत्पादन का नुकसान हो रहा है।

बंद दरवाजों के बीच उम्मीद की रोशनी

हालांकि औपचारिक शिक्षा के रास्ते बंद हैं, लेकिन सीखने और आगे बढ़ने की कोशिशें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। UNESCO और UNICEF सामुदायिक शिक्षा एवं साक्षरता कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और महिलाओं तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। 2025 में 4.42 लाख बच्चों ने सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जिनमें करीब 66 फीसदी लड़कियां थीं।

अफगान महिलाओं की कहानी इसलिए सिर्फ पाबंदियों की कहानी नहीं है। यह उन सपनों की कहानी भी है जिन्हें कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी तरह दबाया नहीं जा सका। शिक्षा हासिल करने, काम करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की चाह आज भी कई अफगान लड़कियों और महिलाओं के भीतर जिंदा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार तालिबान से लड़कियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अधिकार बहाल करने की मांग कर रही हैं। पांच साल बाद भी सवाल यही है—क्या अफगान महिलाओं को फिर से अपने सपने चुनने की आजादी मिलेगी?

 

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY