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भारत से नफरत और एक बदनाम राष्ट्रपति: भारतीय महिला से शादी करने वाले वेंस, निक्सन को महान बनाने पर क्यों तुले हैं?​

भारतीय महिला से शादी करने वाले जेडी वेंस ने अपनी किताब के प्रमोशन के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की तारीफ की, जो भारतविरोधी और भारतीय महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए बदनाम थे। एक कामयाब भारतीय महिला से शादी करने वाले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक ऐसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की […]

भारतीय महिला से शादी करने वाले जेडी वेंस ने अपनी किताब के प्रमोशन के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की तारीफ की, जो भारतविरोधी और भारतीय महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए बदनाम थे।

एक कामयाब भारतीय महिला से शादी करने वाले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक ऐसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ की जो न सिर्फ भारत से नफरत करने के लिए बदनाम थे, बल्कि भारतीय महिलाओं के बारे में बेहद घटिया बातें भी कही थीं।

रिचर्ड निक्सन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में अपनी नई किताब ‘कम्युनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टू फेथ’ के प्रमोशन के दौरान, वेंस ने कुछ ऐसा करने की कोशिश की जिसके बारे में कई इतिहासकार लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं। उन्होंने अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति को राजनीतिक घोटालों के ‘मसीहा’ के बजाय एक ऐसे दूरदर्शी नेता के तौर पर पेश करने की कोशिश की जिसे गलत तरीके से बदनाम किया गया।

वेंस ने ऐसा क्या कहा?

वेंस ने कहा, “मुझे हमेशा से रिचर्ड निक्सन पसंद रहे हैं।” उन्होंने इस विवादित राष्ट्रपति को एक पॉलिटिकल जीनियस बताया, जिनकी छवि अब सही मायनों में फिर से बेहतर हो रही है। उनका तर्क था कि आज के दौर में वॉटरगेट कांड होता तो शायद ही ज्यादा समय तक चर्चा में रहता।

उन्होंने कहा, “अगर वॉटरगेट आज हुआ होता तो यह बस 12 घंटे की न्यूज स्टोरी बनकर रह जाता।” उनका मानना था कि आज के समय में यह सोचना भी पागलपन जैसा लगता है कि कोई घटना राष्ट्रपति की कुर्सी तक गिरा सकती है।

यह अपनी किताब के लिए नहीं, बल्कि खुद निक्सन के लिए एक जबरदस्त प्रचार जैसा था। वेंस को तो खुद में और निक्सन में समानता भी दिखी। युवा सीनेटर, उपराष्ट्रपति, बेस्टसेलिंग लेखक और हमेशा मीडिया के निशाने पर रहने वाले व्यक्ति। उन्होंने मजाकिया लहजे में “यह तो कुछकुछ जेडी वेंस जैसा लगता है।”

ओबामा के पूर्व सलाहकार ने दी तीखी प्रतिक्रिया

वेंस के इस बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के पूर्व सलाहकार डेविड एक्सलरोड ने दी। उन्होंने वेंस की बातों को हैरान करने वाला बताया। उन्होंने अमेरिकियों को याद दिलाया कि वॉटरगेट मामला सिर्फ एक शर्मनाक चोरी से कहीं ज्यादा गंभीर था।

निक्सन के सहयोगियों ने डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के हेडक्वार्टर में घुसपैठ की मंजूरी दी, एफबीआई की जांच में रुकावट डालने के लिए सीआईए का इस्तेमाल करने की कोशिश की, व्हाइट हाउस के कंट्रोल वाला एक गुप्त फंड बनाए रखा, राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आईआरएस का हथियार की तरह इस्तेमाल किया और एक ऐसी साजिश रची जिससे प्रशासन के सीनियर अधिकारियों को जेल जाना पड़ा।

बदनामी के साथ इस्तीफा देने से पहले निक्सन खुद अपनी सीक्रेट टेप में इस साजिश में शामिल होते हुए रिकॉर्ड हुए थे। कुछ लोगों का कहना था कि वेंस ने अनजाने में एक अलग ही बात कह दी थी।

कॉलमनिस्ट डेविड फ्रेंच ने मजाक में कहा कि आज वॉटरगेट की कहानी शायद सिर्फ 12 घंटे की ही होती। इसलिए नहीं कि निक्सन बेगुनाह थे, बल्कि इसलिए कि आज की राजनीति में ऐसे बुरे व्यवहार को सामान्य मान लिया गया है, जिसने कभी पूरे देश को चौंका दिया था।

भारतविरोधी निक्सन

हालांकि, भारतीयों के लिए वेंस का निक्सन का जिक्र करना वो भी ऐसे समय में जब नई दिल्ली के साथ रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं एक ऐतिहासिक संदर्भ भी साथ लाता है। 1971 के बांग्लादेश संकट के दौरान भारत, भारतीयों और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रति निक्सन की दुश्मनी व्हाइट हाउस की सार्वजनिक की गई टेपों में दर्ज है। इन टेपों में नस्लभेदी टिप्पणियों और निजी अपशब्दों का एक चौंकाने वाला संग्रह है।

निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने बारबार इंदिरा गांधी को ‘बूढ़ी चुड़ैल’ जैसे अपशब्द कहे और भारतीयों को ‘धूर्त’, ‘गद्दार’ कहकर अपमानित किया। निक्सन ने भारतीय महिलाओं के बारे में बेहद अपमानजनक और लिंगभेद वाली बातें कहीं, जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत के बारे में कही गई अब तक की सबसे खराब टिप्पणियों में से एक हैं।

ये निजी पूर्वाग्रह उन नीतियों से मेल खाते थे जिन्होंने अमेरिकाभारत संबंधों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। जब जनरल याह्या खान के नेतृत्व में पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार किया और इसके बाद लाखों शरणार्थी भारत आ गए तब निक्सन प्रशासन ने साफ तौर पर इस्लामाबाद का पक्ष लिया और संघर्ष के दौरान नई दिल्ली पर दबाव बनाने के लिए बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी सातवां बेड़ा भेज दिया।

आखिरकार भारत की सैन्य जीत हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ लेकिन पाकिस्तान को लेकर निक्सन की नीति भारतअमेरिका संबंधों में अविश्वास की एक स्थायी वजह बन गई। यह भावना अब फिर से उभर रही है, क्योंकि ट्रंप और वेंस ने उस देश और उसकी सेना के प्रति अपना प्रेम जाहिर किया है जिस पर नई दिल्ली भारत में आतंकवादी हमले करवाने का आरोप लगाती रही है।

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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