मौजूदा साल में अभी तक बाहरी कारणों की वजह से डॉलर के सामने रुपए में गिरावट देखने को मिल रही थी. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा, ईरान वॉर की वजह से सप्लाई में कमी, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर इंडेक्स में तेजी, ये तमाम कारण रुपए की गिरावट में अहम भूमिका निभा रहे थे. काफी अर्से के बाद एक घरेलू कारण सामने आया है, जिसने रुपए की बड़ी गिरावट में अहम भूमिका निभाई है. वो है आरबीआई पॉलिसी रेट में इजाफा.

करीब 44 महीने के बाद आरबीआई ने पॉलिसी रेट में इजाफा किया है. 25 बेसिस प्वाइंट्स की इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.5 फीसदी पर आ गया है. खास बात तो ये है कि आरबीआई गवर्नर ने जल्द पॉलिसी रेट में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. बल्कि अपने कैलिब्रेटिड टाइटनिंग स्टांस के साथ दिसंबर की पॉलिसी मीट में एक और रेट हाइक के संकेत दे दिए हैं. इसका मतलब है कि रुपए में और गिरावट देखने को मिल सकती है.
वैसे रुपए को संभालने के लिए आरबीआई करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप भी कर सकता है. लेकिन मौजूदा समय में जिस तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं, उससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि जल्द ही डॉलर के मुकाबले में रुपया 97 के लेवल पर पहुंच सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े सामने आए हैं.
रुपए में आई बड़ी गिरावट
बुधवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मुख्य बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने के बाद, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 96.78 पर बंद हुआ. मार्केट एनालिस्ट का कहना है कि RBI का रेट बढ़ाना साइक्लिकल महंगाई के बढ़ते जोखिम को दिखाता है, जबकि तेजी से ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों के साथ ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ की ओर रुख MPC के सख्त रवैये को उजागर करता है. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में, रुपया 96.37 पर खुला और 96.3496.84 के दायरे में कारोबार करने के बाद आखिर में 96.78 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 43 पैसे कम है. मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.35 पर बंद हुआ था.
महंगाई की नई चिंताओं के बीच RBI के सख़्त रुख से सेंटीमेंट पर असर पड़ा, जिससे रुपया गिर गया और यह अपने दूसरे सबसे कमजोर स्तर पर बंद हुआ, साथ ही ज्यादातर एशियाई करेंसीज से पीछे रह गया. HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रिस्क से बचने की प्रवृत्ति ने दबाव बढ़ाया, जिससे डॉलर बुल्स का दबदबा बना रहा. फिलहाल USDINR के लिए 96.97 पर रेजिस्टेंस है और सपोर्ट अब 96.30 पर आ गया है.
रुपए पर आरबीआई गवर्नर का बयान
एक ऐसे दिन जब लोकल करेंसी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.96 के करीब पहुंच रही थी, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हालांकि शॉर्ट टर्म में मार्केट “इरैशनल” हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में वे अपनी सही वैल्यू दिखाते हैं. उन्होंने कहा कि कई अनुमानों के अनुसार रुपया “अंडरवैल्यूड” हो सकता है, लेकिन भरोसा दिलाया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यह पक्का करेगा कि करेंसी “स्टेबल” हो और उसे उसकी “सही वैल्यू” तक पहुंचने में मदद करेगा. रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट समेत कई अनुमानों के अनुसार, रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है. मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि हो सकता है कि इसका मूल्य कम आंका गया हो.
कैसा रहा क्रूड और शेयर बाजार का हाल
वहीं, डॉलर इंडेक्स जो छह करेंसी के बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है 0.45 प्रतिशत बढ़कर 102.28 पर ट्रेड कर रहा था. ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, फ्यूचर्स ट्रेड में 1.34 प्रतिशत बढ़कर 101.93 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. घरेलू इक्विटी मार्केट में, सेंसेक्स 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 173.05 अंक गिरकर 22,603.05 पर आ गया. एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को नेट आधार पर 2,961.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.