जापान की स्पेस एजेंसी जेएएक्सए ने अपना अंतरिक्ष मिशन लॉन्च कर दिया है. मिशन का नाम है MMX यानी मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन. इस मिशन के जरिए MMX यान मंगल के चांद फोबोस से मिट्टी का सैंपल लाएगा. यान अगस्त 2027 तक मंगल पहुंचेगा. फोबोस की 10 ग्राम मिट्टी को जुटाकर 2031 तक धरती पर लाएगा. इस नमूने से मंगल के इतिहास और चंद्रमा की उत्पत्ति के राज सुलझाने में मदद मिलेगी.

मंगल के अपने दो चांद हैं. पहला है फोबोस और दूसरा है डीमोस. फोबोस आलू के आकार जैसा है और यह 27 किलोमीटर चौड़ा है. यहीं से मिट्टी का सैम्पल लिया जाएगा. अब सवाल है कि यहां से सैम्पल लाने में के यान को 5 साल का वक्त क्यों लगेगा?
मिट्टी का नमूना लाने में 5 साल का वक्त क्यों लगेगा?
मंगल के चांद की मिट्टी धरती पर लाना सुनने में आसान लगता है, लेकिन इसमें पूरे पांच साल लगेंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह पूरा काम कई चरणों में होगा. आइए इसे आसान भाषा में समझ लेते हैं.
1 अक्टूबर 2026, लॉन्च: यान धरती से रवाना हुआ. मंगल तक का सफर करीब 10 महीने का है.
2 अगस्तसितंबर 2027, मंगल और फोबोस पर पहुंचने का लक्ष्य: यान अगस्त 2027 में मंगल पहुंचेगा और करीब एक महीने बाद फोबोस के चारों ओर एक खास कक्षा में बस जाएगा. इसके बाद करीब डेढ़ साल तक वह दूर से फोबोस और छोटे चांद डाइमोस का नक्शा बनाएगा.
यान अगस्त 2027 में मंगल पहुंचेगा और एक महीने बाद फोबोस की कक्षा में जाएगा.
3 20292030 तक उतरना और नमूने लेने की प्रक्रिया: शुरुआत में एक छोटा रोवर ‘इडेफिक्स’ उतारा जाएगा, फिर मुख्य यान फोबोस पर उतरकर नमूने इकट्ठा करेगा. इडेफिक्स को फ्रांस और जर्मनी ने बनाया है. इसका वजन करीब 25 किलो है, लेकिन फोबोस की कमजोर गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण वहां इसका वजन कुछ दर्जन पेपर क्लिप जितना ही होगा.
4 नवंबर 2030, वापसी का सफर: यान से रिटर्न मॉड्यूल अलग होगा और जुलाई 2031 में नमूने ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान में उतरेंगे.
जापानी स्पेस एजेंसी JAXA की पोस्ट
Martian Moons eXploration aboard the H3 Launch Vehicle No. 10 is set to launch on October 20!
Watch the launch live via the link below
https://t.co/UErHam1XcI
Activity Report Mini
#MMX #H3F10 #JAXA https://t.co/tSTDIxyYAA— JAXA October 18, 2026
इतना वक्त क्यों लगता है?
मंगल की खिड़की हर 26 महीने में खुलती है. धरती और मंगल एकदूसरे के सापेक्ष लगातार घूम रहे हैं. कम ईंधन में मंगल तक पहुंचने लायक सही स्थिति करीब हर 26 महीने में बनती है, इसलिए एक खिड़की चूकने का मतलब लगभग दो साल की देरी है. यही हुआ भी. MMX को पहले 2024 में उड़ना था, लेकिन H3 रॉकेट की दिक्कतों की वजह से लॉन्च आगे खिसका. जितनी तेज रफ्तार से जाना हो, उतना ज्यादा ईंधन चाहिए और यान उतना भारी होगा. इसलिए वैज्ञानिक लंबा, लेकिन किफायती रास्ता चुनते हैं.
फोबोस के पास सामान्य कक्षा बन ही नहीं सकती. फोबोस और डीमोस का द्रव्यमान इतना कम है कि वे किसी यान को आम उपग्रह की तरह कक्षा में नहीं रख सकते. इसलिए MMX यान को खास तरह की क्वासीसैटेलाइट कक्षा में चलाना पड़ेगा. इसके लिए बारीक नेविगेशन चाहिए, जो समय मांगता है.
उतरने की जगह सोचसमझकर चुननी पड़ेगी. फोबोस के पास रहकर यान उसकी पूरी सतह देखेगा और लैंडिंग के लिए दर्जनों संभावित जगहों को परखेगा. किसी अनजान चांद पर एक गलत चट्टान या गड्ढा पूरे मिशन को खत्म कर सकता है. इसी वजह से पहले रोवर उतरकर सतह की जांच करेगा, फिर मुख्य यान उतरेगा.
वापसी का रास्ता भी मौसम देखकर चलता है. लौटने के लिए भी धरती और मंगल की सही स्थिति का इंतजार करना पड़ता है. इसलिए यान को फोबोस पर काम पूरा करके तय समय पर रवाना होना होगा.
सिर्फ 10 ग्राम मिट्टी इतनी कीमती क्यों?
धरती पर कम से कम 10 ग्राम फोबोस की सामग्री भेजी जाएगी. मात्रा भले छोटी हो, लेकिन प्रयोगशाला में इसकी जांच से बहुत कुछ पता चल सकता है. मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर यासुहिरो कावाकात्सु के मुताबिक, इससे समझा जा सकेगा कि मंगल के चांद कैसे बने, मंगल का इलाका कैसे विकसित हुआ और पृथ्वी जैसे ग्रहों पर पानी और जैविक पदार्थ कहां से आए.

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