Saurabh Rajput murder case: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. दोनों पर मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या करने और उसके शव को छिपाकर सबूत मिटाने का आरोप था. 3 मार्च 2025 को हुई इस वारदात का खुलासा 18 मार्च को हुआ था. करीब 13 महीने तक चले ट्रायल में सरकारी पक्ष ने कई अहम एविडेंस कोर्ट के सामने रखे.

इस केस में साहिल को हत्या वाली रात सौरभ के घर जाते देखने वाले चश्मदीद का बयान अहम रहा. सरकारी पक्ष ने इस बयान के जरिए घटना से जुड़ी परिस्थितियों को कोर्ट के सामने रखा. इसके अलावा सौरभ के दोस्त संजीव पाल की गवाही और उसकी कॉल डिटेल भी जांच का हिस्सा रहीं.
हत्या में इस्तेमाल चाकू और उस्तरा बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान और साहिल की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और उस्तरे बरामद किए. ये बरामदगी केस के अहम फिजिकल एविडेंस में शामिल रही. पुलिस को घटनास्थल से ह्यूमन ब्लड मिलने की बात भी जांच में सामने आई. हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने की कोशिश भी इस केस का अहम पहलू रही.
कॉल डिटेल और सोशल मीडिया चैट से खुले राज
सरकारी पक्ष ने मुस्कान और साहिल की कॉल डिटेल और सोशल मीडिया पर हुई चैट को भी अहम सबूत के तौर पर पेश किया. इन डिजिटल एविडेंस के जरिए दोनों के बीच संपर्क और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की गई. सौरभ की मां रेनू की कॉल डिटेल और उसके दोस्त संजीव पाल के फोन रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में रहे. इन रिकॉर्ड से घटनाओं के समय और संबंधित लोगों के बीच संपर्क की कड़ियों को समझने में मदद मिली.
होटल के सीसीटीवी फुटेज और मैनेजर के बयान भी अहम
हत्या के बाद मुस्कान और साहिल के शिमलामनाली जाने की बात सामने आई थी. जांच के दौरान उन होटलों के सीसीटीवी फुटेज और मैनेजर के बयान भी अहम रहे, जहां दोनों ठहरे थे. सरकारी पक्ष ने होटल रिकॉर्ड समेत दूसरे सबूतों के आधार पर हत्या के बाद की गतिविधियों का विवरण कोर्ट में रखा. पुलिस ने यह भी जांच की कि वारदात के बाद दोनों ने किस तरह घटना को छिपाने की कोशिश की. इन सबूतों ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में मदद की.
22 गवाह और 126 सुनवाई में पेश हुए सबूत
इस केस में सरकारी पक्ष ने कुल 22 गवाह पेश किए और कोर्ट में 126 सुनवाई हुईं. गवाहों के बयान के अलावा हथियारों की बरामदगी, घटनास्थल से मिले सबूत, डिजिटल रिकॉर्ड और होटल से जुड़े रिकॉर्ड भी कोर्ट के सामने रखे गए. 30 सितंबर 2026 को कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया. इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई.
सरकारी पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या के बाद उसके शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से ढक दिया गया. 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा तो वहां से दुर्गंध आ रही थी. सौरभ के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला खुला और पुलिस ने ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए. इन्हीं सबूतों को आधार बनाकर सरकारी पक्ष ने कोर्ट में अपना केस रखा और कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई.