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घर के बड़े कहें तो भी न दें! 1 साल से छोटे बच्चे के लिए शहद क्यों है खतरनाक?​

बच्चे के पैदा होने के बाद उसे कुछ टाइम तक कई चीजें खिलानी या पिलानी नहीं चाहिए. भारतीयों के बीच अलगअलग तरह के देसी तरीके अपनाए जाते हैं. कहीं जन्म के ठीक बाद ही नवजात को पानी पिला दिया जाता है तो कुछ उसे शहद खिला देते हैं. डॉक्टर्स या हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि […]

बच्चे के पैदा होने के बाद उसे कुछ टाइम तक कई चीजें खिलानी या पिलानी नहीं चाहिए. भारतीयों के बीच अलगअलग तरह के देसी तरीके अपनाए जाते हैं. कहीं जन्म के ठीक बाद ही नवजात को पानी पिला दिया जाता है तो कुछ उसे शहद खिला देते हैं. डॉक्टर्स या हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चे को शुरू के 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही पीना चाहिए. इस जरूरी चीज को नजरअंदाज करके लोग अपने मन से उन्हें कुछ भी खिलाने लगते हैं. यहां हम एक साल से पहले बच्चे को शहद देना कितना खतरनाक है, ये आपको डॉक्टर के जरिए समझाने जा रहे हैं.

एक्सपर्ट बताते हैं कि जन्म के बाद कुछ महीनों तक बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर होती है. इसलिए उसे बाकी अंगों को नॉर्मल से ज्यादा काम करना पड़ता है. ऐसा ही कुछ पाचन क्रिया के साथ भी है. शिशु के खानपान में गलती की जाए तो उन्हें पेट खराब, दस्त और उल्टियां तक लग जाती है. बच्चे को जन्म के बाद एक साल तक शहद देना चाहिए या नहीं डॉक्टर से जानें…

एक्सपर्ट ने क्या कहा

डॉ. शशांक त्रिवेदी का कहना है कि एक साल से छोटे बच्चे को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए. शहद देखने में भले ही प्राकृतिक और सुरक्षित खाद्य पदार्थ लगता है, लेकिन इसमें कभीकभी क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया के स्पोर मौजूद हो सकते हैं.

छोटे बच्चों का पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए ये स्पोर आंतों में बढ़कर ऐसा टॉक्सिन बना सकते हैं, जिससे इन्फेंट बॉटुलिज्म नाम की गंभीर बीमारी हो सकती है. इसमें बच्चे को कब्ज, दूध पीने में परेशानी, दूध चूसने की ताकत कम होना, रोने की आवाज कमजोर पड़ना, शरीर में ढीलापन या मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं और गंभीर स्थिति में सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है.

हालांकि यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन इसका खतरा गंभीर हो सकता है, इसलिए सावधानी के तौर पर 12 महीने की उम्र पूरी होने तक बच्चे को शहद नहीं देना चाहिए. शहद को दूध, पानी, बेबी फूड में मिलाकर भी नहीं देना चाहिए. 12 महीने के बाद सामान्य तौर पर शहद दिया जा सकता है, लेकिन तब भी इसकी मात्रा सीमित रखना बेहतर है.

इन गलतियों से भी बचें

इसके अलावा जन्म के बाद 6 महीने तक नवजात को पानी भी नहीं देना चाहिए. नॉर्मल कंडीशन में शिशु को मां के दूध से ही शुरुआती महीनों में पर्याप्त पानी मिल जाता है.

अलग से पानी देने से बच्चे का पेट भर सकता है और वह कम दूध पी सकता है. साथ ही, बहुत ज्यादा पानी देना छोटे शिशुओं में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को प्रभावित कर सकता है.

ध्यान रखें कि आपको घर में बनी किसी चीज में शहद मिलाकर भी बच्चे को नहीं देना है. ये तरीका भी उसकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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