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क्या महंगा होगा LPG सिलेंडर? ₹1 लाख करोड़ के सब्सिडी बिल ने बढ़ाई चिंता​

देश में रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ वित्त वर्ष 202627 में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में LPG सब्सिडी का कुल बिल ₹1 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है. जबकि केंद्रीय बजट में इसके लिए केवल ₹30,000 करोड़ का […]

देश में रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ वित्त वर्ष 202627 में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में LPG सब्सिडी का कुल बिल ₹1 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है. जबकि केंद्रीय बजट में इसके लिए केवल ₹30,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. यानी सरकार को बजट अनुमान से करीब ₹70,000 करोड़ अतिरिक्त राशि की व्यवस्था करनी पड़ सकती है.

क्यों बढ़ रहा है सब्सिडी का बोझ?

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में उतारचढ़ाव और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार द्वारा सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने की नीति के कारण सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है. सरकार चाहती है कि आम लोगों, खासकर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर महंगाई का असर कम पड़े. इसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार को करनी पड़ सकती है.

ऑयल कंपनियों पर भी बढ़ेगा दबाव

अगर बजट में तय राशि से अधिक सब्सिडी की जरूरत पड़ती है, तो शुरुआत में इसका असर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर भी पड़ सकता है. हालांकि, बाद में सरकार अतिरिक्त बजटीय सहायता या अन्य वित्तीय व्यवस्था के जरिए इन कंपनियों को राहत दे सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है.

उज्ज्वला योजना का भी रहेगा असर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को रियायती दर पर LPG सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है. इस योजना का दायरा बढ़ने और लाभार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण भी सरकार का सब्सिडी खर्च बढ़ रहा है. सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय सब्सिडी के जरिए राहत देने की रणनीति पर काम कर रही है.

वित्तीय संतुलन बनाए रखना होगी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि LPG सब्सिडी का बिल अनुमान के मुताबिक ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचता है, तो सरकार को अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करनी होगी. इससे राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों, घरेलू मांग और सरकार की सब्सिडी नीति पर सभी की नजर रहेगी. यदि वैश्विक बाजार में LPG सस्ती होती है तो सरकार पर बोझ कम हो सकता है, लेकिन कीमतें ऊंची रहने पर अतिरिक्त बजटीय प्रावधान की जरूरत पड़ सकती है.

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संपादकीय टीम

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