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लखनऊ: हरबिलास बाल चिकित्सालय का स्वर्ण जयंती समारोह, बच्चों के लिए लगा ‘ऑटिज्म और हियरिंग स्क्रीनिंग’ कैंप​

Golden Jubilee Celebrations of Harbilas Children and Women’s Hospital: राजधानी लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने स्थित प्रसिद्ध हरबिलास बाल एवं महिला चिकित्सालय के स्वर्ण जयंती समारोह सप्ताह के अंतर्गत दूसरे दिन बुधवार, 8 जुलाई को ऑटिज्म और सुनने की शक्ति की जांच के लिए एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। बाल चिकित्सा, […]

लखनऊ: हरबिलास बाल चिकित्सालय का स्वर्ण जयंती समारोह, बच्चों के लिए लगा ‘ऑटिज्म और हियरिंग स्क्रीनिंग’ कैंप​

Golden Jubilee Celebrations of Harbilas Children and Women’s Hospital: राजधानी लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने स्थित प्रसिद्ध हरबिलास बाल एवं महिला चिकित्सालय के स्वर्ण जयंती समारोह सप्ताह के अंतर्गत दूसरे दिन बुधवार, 8 जुलाई को ऑटिज्म और सुनने की शक्ति की जांच के लिए एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। बाल चिकित्सा, प्रसूति, बाल सर्जरी और त्वचा रोग के इलाज के लिए विख्यात इस अस्पताल के शिविर में ‘द होप लर्निंग एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार मौजूद रहे, जिनके द्वारा 40 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।

लखनऊ: हरबिलास बाल चिकित्सालय का स्वर्ण जयंती समारोह, बच्चों के लिए लगा ‘ऑटिज्म और हियरिंग स्क्रीनिंग’ कैंप​
लखनऊ: हरबिलास बाल चिकित्सालय का स्वर्ण जयंती समारोह, बच्चों के लिए लगा ‘ऑटिज्म और हियरिंग स्क्रीनिंग’ कैंप​

न्यूरो डाइवर्स बच्चों के लिए एकजुट हो समाज: दिव्यांशु कुमार

स्क्रीनिंग के दौरान दिव्यांशु कुमार ने कहा कि हरबिलास जैसे बड़े और पुराने अस्पताल में ऑटिज्म की स्क्रीनिंग होना यह दर्शाता है कि सूबे का स्वास्थ्य महकमा न्यूरो डाइवर्स बच्चों के लिए कितना संवेदनशील है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य महकमे के साथसाथ समाजसेवियों को भी आगे आना चाहिए और न्यूरो डाइवर्स इश्यूज के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। समाज को एकजुट होकर ‘अर्ली इंटरवेंशन’ की मुहिम चलानी होगी, तभी हम न्यूरो डाइवर्स डिसऑर्डर को जड़ से खत्म करके स्पेशल बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में सफल रहेंगे।

14 जुलाई को पूरे हो रहे हैं अस्पताल के 50 साल

अस्पताल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए प्रशासनिक अधिकारी कमला शंकर मिश्रा ने बताया कि इस अस्पताल की स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्त जी ने 14 जुलाई, 1976 को अपने जन्मदिन के 75वें वर्ष में की थी। उस समय पब्लिक सेक्टर में बच्चों का कोई विशेष अस्पताल नहीं था। 14 जुलाई को अस्पताल के 50 साल पूरे हो रहे हैं, और उनकी स्मृति को नमन करने के लिए इस पूरे सप्ताह विभिन्न विधाओं में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

कमला शंकर मिश्रा ने साझा किया कि कई लोग इस अस्पताल को सरकारी अस्पताल समझकर सालों से इलाज करा रहे हैं। यहां कई ऐसे क्रिटिकल केस और बड़ेबड़े पदों पर बैठे लोगों के बच्चे ठीक हुए हैं, जो अन्य बड़े अस्पतालों में नहीं सही हो पा रहे थे। उन्हीं स्मृतियों को तरोताजा करने के लिए यह छोटा सा प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य में शुरू होंगी कई एडवांस्ड क्लीनिक: डॉ. हेरम्भ अग्निहोत्री

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व डॉ. हेरम्भ अग्निहोत्री ने बताया कि अस्पताल ने अपनी 50 साल की यात्रा में, सामान्य दिनों से लेकर कोविड काल तक, हमेशा न्यूनतम दर पर इलाज, जांच, दवा और टीकाकरण की सुविधाएं दी हैं। बच्चों के विभाग से शुरू हुए इस अस्पताल में आज अस्थि रोग, दंत, नेत्र, सर्जरी और महिला विभाग भी सफलतापूर्वक चल रहे हैं। उन्होंने आगामी योजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले समय में यहां एक ऑटिज्म क्लीनिक और एक एडवांस्ड हियरिंग स्क्रीनिंग क्लिनिक शुरू की जाएगी, जिसमें ईएनटी विशेषज्ञ को भी जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही, बाहरी वातावरण से होने वाली एलर्जी की जांच के लिए एलर्जी अस्थमा क्लिनिक शुरू करने की भी योजना है। अस्पताल में पिछले एक साल से स्पैरो वेट्री क्लीनिक सफलतापूर्वक चल रही है और हफ्ते में तीन बार डाइटिशियन आकर बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग व पोषण संबंधी सलाह देते हैं।

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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