ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह कहा गया है जो मोक्ष और वैराग्य का कारक है. कुंडली में केतु का स्थान देखकर व्यक्ति के स्वभाव और उसके जीवन के बारे में जाना जा सकता है. ऐस ही हथेली में केतु पर्वत के उभार व स्थान से व्यक्ति के बारे में गहरी जानकारी हासिल की जा सकती है. आइए केतु पर्वत के बारे में और जानें.
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हथेली पर केतु पर्वत का स्थान कहां होता है?
हथेली में केतु पर्वत मणिबंध के ठीक ऊपर होता है यानी कलाई से ऊपर व शुक्र व चंद्र पर्वत के बीच में. इसके अलावा केतु पर्वत की पहचान ऐसे भी कर सकते हैं कि यह भाग्य रेखा के शुरुआती स्थान के पास होता है. हस्तरेखा शास्त्र में केतु का प्रभाव किसी व्यक्ति के 5वें वर्ष से लेकर 20वें वर्ष तक होता है. किसी हथेली पर पूरी तरह से विकसित केतु पर्वत शुभ संकेत देने वाला माना जाता है.
विकसित केतु पर्वत और स्पष्ट भाग्य रेखा का प्रभाव
किसी की हथेली पर केतु पर्वत स्वाभाविक रूप से विकसित और उभरा हो, साथ ही भाग्य रेखा स्पष्ट और गहरी हो तो इसे अति शुभ माना जाता है. ऐसे जातक लकी होते हैं और जीवन में किसी चीज की इन्हें कमी नहीं होती है. ये लोग हर सुख पाते हैं. ऐसे लोग गरीबी में भी जन्म लेते हैं तो आगे जाकर धनवान बनते हैं. भाग्य ऐसे लोगों के साथ होता है.
अविकसित केतु और प्रबल भाग्य रेखा का प्रभाव
हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, किसी हथेली पर केतु पर्वत अविकसित हो यानी उभरा हुआ न हो साथ में भाग्य रेखा प्रबल हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कुछ बाधाएं झेलनी पड़ती है. आर्थिक स्थिति को लेकर ऐसे लोगों को सतर्क रहना चाहिए.
कमजोर केतु और भाग्य रेखा
किसी हथेली पर केतु पर्वत का उभार अच्छे से न हो और भाग्य रेखा भी कमजोर हो तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है. ऐसे लोगों को बचपन में दुख और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे लोगों को कड़ी मेहनत से शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हे. इन लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और बचपन से ही स्वास्थ्य कम ज्यादा खराह ही होता रहता है.





