जिस उम्र में नवजात को मां की ममता, पिता की गोद और परिवार का सहारा चाहिए होता है, उस उम्र में गाजीपुर के छह मासूमों ने जिंदगी की शुरुआत अपनों से दूर रहकर की. किसी को जन्म के बाद छोड़ दिया गया तो किसी को सड़क किनारे झाड़ियों में ऐसी जगह छोड़ दिया गया, जहां उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था. हालांकि, इन बच्चों की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. प्रशासन और कानून के जरिए इन मासूमों को सुरक्षित संरक्षण मिला और अब इनमें से कुछ को नया परिवार भी मिल चुका है.

पिछले करीब दो वर्षों में गाजीपुर जिले में परित्यक्त या लावारिस हालत में मिले छह नवजातों को सुरक्षित संरक्षण दिया गया. इनमें चार बालिकाएं और दो बालक शामिल हैं. सूचना मिलने के बाद बच्चों को पहले जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज और देखभाल की गई. स्वस्थ होने के बाद इन बच्चों को दत्तक ग्रहण इकाई में रखा गया, जहां उनकी सुरक्षा और जरूरतों का ध्यान रखा गया.
करीब तीन महीने तक परिजनों का इंतजार
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय सोनी के मुताबिक, किसी नवजात के परित्यक्त अवस्था में मिलने के बाद विभाग नियमानुसार उसके जैविक मातापिता या परिजनों के सामने आने का इंतजार करता है. करीब तीन महीने तक बच्चे पर किसी दावे का इंतजार किया जाता है.
यदि निर्धारित अवधि में कोई परिजन बच्चे पर दावा नहीं करता है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है. इसके तहत बच्चे से संबंधित जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दत्तक ग्रहण पोर्टल पर अपलोड की जाती है.
देशभर के परिवार कर सकते हैं आवेदन
दत्तक ग्रहण पोर्टल पर जानकारी आने के बाद देशभर के इच्छुक दत्तक अभिभावकों के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है. इच्छुक दंपतियों को ऑनलाइन आवेदन करने के साथ जरूरी दस्तावेज और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं.
सभी निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही बच्चे को दत्तक अभिभावकों को सौंपा जाता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे को सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के तहत नया परिवार मिले.
दिल्ली, लखनऊ और कर्नाटक के परिवारों ने अपनाया
जिला प्रोबेशन अधिकारी के अनुसार, दत्तक ग्रहण इकाई तक पहुंचे छह बच्चों में से तीन को अब नए परिवार मिल चुके हैं. दो बच्चों को दिल्ली और लखनऊ के परिवारों ने, जबकि एक बालिका को कर्नाटक के परिवार ने कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया है.
इस तरह जिन बच्चों की जिंदगी की शुरुआत परिवार से बिछड़कर हुई थी, उन्हें अब नए घर और परिवार का सहारा मिला है.
15 दिन पहले भी मिला था एक नवजात
करीब 15 दिन पहले भी जिले में एक नवजात परित्यक्त अवस्था में मिला था. सूचना मिलने के बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज और देखभाल की जा रही है.
स्वस्थ होने के बाद उसे भी नियमानुसार दत्तक ग्रहण इकाई में रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
पहले गाजीपुर में दत्तक ग्रहण से जुड़ी कई प्रक्रियाओं के लिए बच्चों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ता था. अब जिले में दत्तक ग्रहण इकाई के जरिए बच्चों को सुरक्षित रखने से लेकर इच्छुक दंपतियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत दत्तक देने की व्यवस्था उपलब्ध है. इस व्यवस्था से परित्यक्त नवजातों को सुरक्षित संरक्षण मिलने के साथ उनके लिए नए परिवार तक पहुंचने की प्रक्रिया भी जिले में ही आगे बढ़ रही है.