पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट के निर्णय पर उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति सरकार का पूरा सम्मान और विश्वास है. न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है. हालांकि, अभी उन्होंने न्यायालय का आदेश पढ़ा नहीं है. ऐसे में आदेश का अध्ययन किए बिना इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव एक महत्वपूर्ण विषय है. इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. पहले न्यायालय के आदेश का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उसमें दिए गए निर्देशों को समझा जाएगा. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर विचार होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. न्यायालय के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों का पूरा सम्मान करते हुए ही आगे की दिशा तय की जाएगी.
उन्होंने कहा कि इस दौरान विधानसभा चुनाव, जनगणना और यूपी बोर्ड की परीक्षाएं होनी हैं. इन सभी हालात पर विचार करने के बाद भविष्य में उचित कदम उठाए जाएंगे.
इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य में तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव कराए जाएं. साथ ही, कोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक करने के फैसले को सही ठहराते हुए उन्हें इस भूमिका में काम जारी रखने की इजाजत दी है. पंचायत चुनावों को लेकर मुख्य बेंच और लखनऊ बेंच के सामने कई याचिकाएं दायर की गई थीं. कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की. यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने जारी किया.
राज्य सरकार ने दी थी चुनाव टालने की दलील
बेंच ने राज्य सरकार ने परिसीमन प्रक्रिया का हवाला देते हुए चुनाव टालने की दलील दी थी. याचिकाओं में राज्य सरकार के 25 और 26 मई के आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर काम जारी रखने की इजाजत दी गई थी और इसके लिए UP पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 12 का हवाला दिया गया था. यह तर्क दिया गया कि हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने साल 2000 में प्रेम लाल पटेल मामले में इस धारा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, क्योंकि इसे संविधान के आर्टिकल 243ई और 243के का उल्लंघन माना गया था.