अमरावती/नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। नामांकन दाखिल करने के दौरान हिंसा, मारपीट, धमकी और उम्मीदवारों को पर्चा भरने से रोकने के आरोपों के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी 100 शहरी निकायों में चुनाव की आगे की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी।

इस पूरे विवाद में विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके कई उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। वहीं, सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी ने भी विपक्ष पर हिंसा और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए हैं। ऐसे में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
आंध्र प्रदेश में 13 नगर निगमों और 87 नगरपालिकाओं तथा नगर पंचायतों के चुनाव के लिए 14 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी की गई थी। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 16 से 18 अक्टूबर तक चली। इसी दौरान पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति समेत कई स्थानों पर कथित हिंसा और उम्मीदवारों को रोकने की शिकायतें सामने आईं।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि उसके उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई, नामांकन पत्र छीने गए और कुछ जगहों पर पर्चे फाड़ दिए गए। पार्टी ने दावा किया कि इन घटनाओं के कारण उसके कई उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन तक दाखिल नहीं कर सके।
54 लोगों पर नामजद शिकायत का क्या मामला है?
नामांकन के दौरान हुई हिंसा को लेकर 54 लोगों के नामजद होने की खबर सामने आई है। हालांकि, इस संख्या से जुड़े मामले में आरोपियों के नाम, संबंधित थाना, दर्ज मुकदमे की धाराओं और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई का विस्तृत विवरण स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है। इसलिए इसे अंतिम रूप से साबित अपराध नहीं, बल्कि जांच के अधीन मामला माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा विवाद?
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी ने मांग की कि प्रभावित उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने का अवसर दिया जाए, अतिरिक्त नामांकन केंद्र बनाए जाएं और उम्मीदवारों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह हिंसा और बाधा से जुड़ी शिकायतों के साथ उपलब्ध दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करे। अदालत ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित करने की समयसीमा 25 अक्टूबर तक बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने पर निर्णय लेने को कहा।
सभी 100 शहरी निकायों में चुनाव प्रक्रिया पर रोक
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने 21 अक्टूबर को सभी 100 शहरी निकायों में चुनाव की आगे की प्रक्रिया रोकने का आदेश जारी किया। आयोग को जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर शिकायतों की जांच करनी है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल और सीसीटीवी की व्यवस्था हो तथा संबंधित अधिकारी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अब आगे क्या होगा?
अब चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला शिकायतों की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा। जिन क्षेत्रों में उम्मीदवारों को वास्तव में कानूनव्यवस्था की समस्या के कारण नामांकन दाखिल करने से रोके जाने की पुष्टि होती है, वहां नामांकन की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि चुनाव पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं। अभी चुनाव की आगे की प्रक्रिया रोकी गई है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों की जांच की जा रही है।
यह मामला केवल राजनीतिक दलों के आरोपप्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि उम्मीदवारों को निष्पक्ष तरीके से चुनाव लड़ने का अवसर देने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने से भी जुड़ा है।