शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
IND vs NZ 2nd T20: भारतीय पारी लड़खड़ाई, नहीं चले वैभव…सैमसन, अभिषेक और अय्यर जल्दी आउट​ | Faf du Plessis ने 2018 Ball-Tampering विवाद पर किया खुलासा, Steve Smith का किया था बचाव​ | नोएडा सेक्टर-125 के कैफे में लगी भीषण आग, आसपास की 4 दुकानें भी जलीं; दमकल की गाड़ियां मौके पर​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Crime

दक्षिण-पूर्व एशिया में ड्रोन बने अपराधियों और आतंकियों का नया हथियार​

दक्षिणपूर्व एशिया में सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने वाले ड्रोन अपराधियों, ड्रग तस्करों और आतंकवादी संगठनों के लिए नया हथियार बनते जा रहे हैं। ड्रग्स की तस्करी से लेकर जेलों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने और आतंकी हमलों की साजिश रचने तक इनके इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, […]

दक्षिणपूर्व एशिया में सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने वाले ड्रोन अपराधियों, ड्रग तस्करों और आतंकवादी संगठनों के लिए नया हथियार बनते जा रहे हैं। ड्रग्स की तस्करी से लेकर जेलों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने और आतंकी हमलों की साजिश रचने तक इनके इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणपूर्व एशिया के सात देशों में ड्रोन के जरिए होने वाली अवैध गतिविधियों के 86 प्रतिशत मामले ड्रग्स तस्करी से जुड़े हैं। अपराधी इन ड्रोनों की मदद से काले बाजार में अपना नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं। जेलों में बंद कैदियों तक ड्रग्स, तंबाकू और मोबाइल फोन जैसी प्रतिबंधित चीजें पहुंचाने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मलेशिया की तापाह जेल और सुंगाई उदांग जेल के अलावा इंडोनेशिया तथा फिलीपींस की कई जेलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। इनमें कैदी सोशल मीडिया के जरिए सामान का ऑर्डर देकर ड्रोन से उसकी डिलीवरी मंगवा रहे थे। वहीं, थाईलैंड में अब तक 4,583 अवैध ड्रोन जब्त किए जा चुके हैं।

ड्रोन का इस्तेमाल अब केवल तस्करी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में इनके जरिए बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचे जाने का भी उल्लेख है। इंडोनेशिया में सितंबर 2024 में पोप फ्रांसिस की यात्रा के दौरान उन पर हमले की साजिश रचने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से एक मिनी ड्रोन भी बरामद हुआ था।

इंडोनेशिया से सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन ‘हयात तहरीर अलशाम’ के लड़ाकों तक ड्रोन और उनके पुर्जे पहुंचाने वाला एक बड़ा नेटवर्क भी पकड़ा गया है। इस नेटवर्क के तहत उपकरण ऑनलाइन खरीदे जाते थे और उन्हें खाने के सामान के डिब्बों में छिपाकर तुर्किये के रास्ते सीरिया भेजा जाता था। इनके भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया गया था।

म्यांमार में जारी गृहयुद्ध में भी ड्रोन ने युद्ध लड़ने के तरीके को बदल दिया है। यहां सशस्त्र उग्रवादी संगठनों ने 600 से अधिक अलगअलग स्थानों पर 2,100 से ज्यादा ड्रोन हमले किए हैं। सेना के जैमर से बचने के लिए इन ड्रोनों में अब यूरोपीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, जिससे वे अपने लक्ष्यों को निशाना बना सकें। इसके जवाब में म्यांमार की सैन्य सरकार ने भी हवाई हमले बढ़ा दिए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि चीन में बने सस्ते ड्रोन और उनके जरूरी पुर्जों की तस्करी सामान्य कारोबारी नेटवर्क, यात्री विमानों और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दक्षिणपूर्व एशिया के देशों तक की जा रही है। इस तरह ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग तस्करी, जेलों में प्रतिबंधित सामान की आपूर्ति और आतंकवादी गतिविधियों से लेकर युद्ध के मैदान तक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY