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Yes Bank के निवेशकों को बड़ा झटका! 2 दिन में धराशायी हुए शेयर, आई इतनी गिरावट​

सुप्रीम कोर्ट के AT1 बॉन्ड से जुड़े फैसले के बाद यस बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई है. 16 अक्टूबर को शेयर करीब 3.42% गिरा. इसके साथ ही दो कारोबारी दिनों में शेयर की कुल गिरावट 17% से ज्यादा हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में बैंक के संकट के दौरान ₹8,415 करोड़ के […]

सुप्रीम कोर्ट के AT1 बॉन्ड से जुड़े फैसले के बाद यस बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई है. 16 अक्टूबर को शेयर करीब 3.42% गिरा. इसके साथ ही दो कारोबारी दिनों में शेयर की कुल गिरावट 17% से ज्यादा हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में बैंक के संकट के दौरान ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को राइटऑफ यानी पूरी तरह खत्म करने के फैसले को रद्द कर दिया था. हालांकि, रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings का कहना है कि इस फैसले से बैंक की क्रेडिट रेटिंग पर असर पड़ने की आशंका नहीं है.

AT1 बॉन्ड बहाल होने से कैपिटल पर पड़ेगा असर

यस बैंक ने शुक्रवार को बताया कि पहले राइटऑफ किए गए AT1 बॉन्ड दोबारा बहाल होने से उसके कोर कैपिटल रेशियो में करीब 250 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है. हालांकि, बैंक के मुताबिक, इस बदलाव के बाद भी उसका टियर1 कैपिटल रेशियो प्रोफॉर्मा बेस पर 14% पर बना रहेगा. 16 अक्टूबर को यस बैंक का शेयर करीब 3.42% गिरकर ₹17.50 पर बंद हुआ.

S&P को बैंक की पर्याप्त कैपिटल रहने की उम्मीद

S&P Global Ratings के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यस बैंक की रेटिंग पर असर पड़ने की आशंका नहीं है. हालांकि, इससे बैंक की भविष्य की कमाई पर दबाव पड़ सकता है. रेटिंग एजेंसी ने बताया कि मार्च 2026 के अंत में बैंक का कॉमन इक्विटी टियर1 अनुपात 13.87% था. अनुमानित 250 बेसिस पॉइंट की कमी के बाद भी यह लिमिट से 5.5% से काफी ऊपर रहेगा. S&P का मानना है कि करीब ₹8,400 करोड़ के संभावित असर की काफी हद तक भरपाई बॉन्ड दोबारा बहाल होने से हो सकती है. एजेंसी के अनुसार, बैंक की वित्तीय स्थिति इस फैसले का सामना करने के काबिल है. हालांकि, एजेंसी ने अनुमान जताया है कि मार्च 2028 तक बैंक का रिस्कएडजस्टेड कैपिटल रेशियो 8% से 8.5% के बीच रह सकता है, जबकि मार्च 2026 में यह 9% था.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया था बॉन्ड राइटऑफ?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2020 के बैंक पुनर्गठन के दौरान ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को राइटऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पुनर्गठन योजना में इस तरह के राइटऑफ का स्पष्ट प्रावधान नहीं था. इसलिए बैंक के प्रशासक के पास बॉन्ड खत्म करने का अधिकार नहीं था. AT1 बॉन्ड बैंकों की पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं. बैंक पर गंभीर संकट आने की स्थिति में इन बॉन्ड में निवेश करने वालों को बड़ा नुकसान हो सकता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.
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संपादकीय टीम

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