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39KM लंबा, 25000 करोड़ खर्च, 41 गांवों की जमीन… वाराणसी के लिए गेम चेंजर बनेगा गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर​

Varanasi Elevated Corridor Project: वाराणसी को देश के सबसे आधुनिक और सुगम धार्मिक शहरों में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे करीब 25 हजार करोड़ रुपए की वरुणा और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो गया है. […]

Varanasi Elevated Corridor Project: वाराणसी को देश के सबसे आधुनिक और सुगम धार्मिक शहरों में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे करीब 25 हजार करोड़ रुपए की वरुणा और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो गया है. इन दोनों परियोजनाओं से वाराणसी की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी में दिल्लीNCR की तर्ज पर एलिवेटेड सड़कों का नेटवर्क विकसित होगा, जिससे शहर में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और श्रद्धालुओं को भी बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. पढ़ें टीवी9 डिजिटल की ये खास रिपोर्ट…

NHAI की ओर से प्रस्तावित इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. प्रशासन ने प्रभावित 41 गांवों में जमीन की खरीदबिक्री, दानपत्र, सट्टा इकरारनामा, भूमि उपयोग परिवर्तन और सरकारी जमीन के आवंटन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन सख्त

DM सत्येंद्र कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भूमि संबंधी लेनदेन पर प्रतिबंध रहेगा. प्रशासन का मानना है कि इससे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम तरीके से पूरी की जा सकेगी. NHAI की योजना के तहत वरुणा नदी के किनारे NH31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने के लिए फोर लेन वरुणा लिंक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही गंगा नदी के किनारे भी एक विशाल एलिवेटेड रोड का निर्माण प्रस्तावित है.

क्या है गंगा और वरुणा एलिवेटेड रोड परियोजना?

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दो बड़े सिक्स लेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे. पहला कॉरिडोर वरुणा नदी के किनारे NH31 से रिंग रोड तक करीब 21.153 किलोमीटर लंबा होगा. वहीं दूसरा कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे NH19 से रिंग रोड तक लगभग 18.100 किलोमीटर लंबा बनाया जाएगा.

इन दोनों परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करना और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को सीधे उनके गंतव्य तक पहुंचाना है. इससे श्रद्धालुओं और यात्रियों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बाबा विश्वनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

परियोजना का सबसे बड़ा लाभ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगा. वर्तमान में मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर के व्यस्त मार्गों से गुजरना पड़ता है, जिससे जाम और समय की समस्या बनी रहती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, गाजीपुर, बलिया, प्रयागराज और भदोही जैसे क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए निर्धारित पार्किंग स्थल तक पहुंच सकेंगे. वहां से उन्हें मंदिर तक सुगम और व्यवस्थित आवागमन की सुविधा मिलेगी.

शहर को जाम मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम

वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी. उन्होंने कहा कि NHAI की यह परियोजना काशी के लिए गेम चेंजर साबित होगी. मेयर के मुताबिक, एलिवेटेड रोड के मुख्य ढांचे के लिए करीब 25 से 30 मीटर चौड़ी भूमि पर्याप्त होती है, लेकिन रैंप, सर्विस लेन और अन्य सुविधाओं को जोड़ने पर 45 से 60 मीटर तक भूमि की आवश्यकता पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की कोशिश है कि किसानों की जमीन का न्यूनतम उपयोग हो और अधिकतम सरकारी भूमि का इस्तेमाल किया जाए.

एयरपोर्ट से सीधे नमो घाट और मंदिर तक बनेगा कॉरिडोर

योगी सरकार में मंत्री रविंद्र जायसवाल ने परियोजना की रूपरेखा बताते हुए कहा कि एयरपोर्ट से आने वाले यात्रियों को हरहुआ चौराहे से पहले ही एलिवेटेड फ्लाईओवर पर चढ़ने की सुविधा मिलेगी. यह मार्ग वरुणा नदी के किनारे सेंट्रल जेल के पास पहुंचेगा, जहां उतरने और चढ़ने के लिए पहला इंटरचेंज बनाया जाएगा. इसके बाद कॉरिडोर चौकाघाट, आयुर्वेद कॉलेज और नमो घाट तक पहुंचेगा, जहां दूसरा प्रमुख इंटरचेंज होगा. इसके बाद यह मार्ग नमो घाट के पास बन रहे सिग्नेचर ब्रिज से जुड़ेगा और फिर पड़ाव होते हुए रामनगर के टेंगरा मोड़ तक जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर क्षेत्र के निकट 4 हजार वाहनों की क्षमता वाली विशाल पार्किंग भी बनाई जाएगी.

किन क्षेत्रों की जमीन होगी प्रभावित?

गंगा एलिवेटेड रोड परियोजना के अंतर्गत सदर तहसील के रमना, डोमरी, सीरगोवर्धनपुर, छित्तूपुर, भगवानपुर, सूजाबाद, नंगवा, नरिया, किला कोहना, कोदोपुर, रामनगर और वाजिदपुर सहित कई गांव प्रभावित होंगे.

वहीं वरुणा एलिवेटेड रोड परियोजना के तहत सदर तहसील के हुकुलगंज, पहाड़पुर, भरथरा, पिसौर, दनियालपुर, छितौनी, कोटमा, सिकरौल, खजुरी, चौका, जैतपुरा, अलईपुर, भदऊ, कज्जाकपुर, कैंटोनमेंट और जेलखाना समेत कई क्षेत्र परियोजना के दायरे में आएंगे. इसके अलावा पिंडरा तहसील के महादेवपुर, सरायकाजी, लुच्चेपुर, दुनियापुर, करोमा, धनेसरी, बैजतपट्टी, दासेपुर, कोईराजपुर, शहाबुद्दीनपुर, चमांव, कोइरान, अहिरान, भगतुपुर और प्रतापट्टी जैसे गांव भी प्रभावित होंगे.

काशी के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल ट्रैफिक सुधारने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वाराणसी के आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास को भी नई गति देगी. शहर में वाहनों का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा. सरकार का दावा है कि गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाएं पूरी होने के बाद वाराणसी देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा, जहां आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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