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भारत के 500 रुपए न्यूजीलैंड में जाकर कितने हो जाते हैं? जहां पहुंचे PM मोदी​

पीएम मोदी न्यूजीलैंड की यात्रा हैं. वो न्यूजीलैंड जहां की कुल आबादी में 6 फीसदी भारतीय हैं. हर साल यहां 80 हजार भारतीय पहुंचते हैं और 30 फीसदी छुट्टियां बिताने और घूमने के लिए आते हैं. भारतीय औसतन यहां 11 दिन बिताते हैं. भारतीयों के यहां आने का मकसद सिर्फ घूमना ही नहीं. अपने रिश्तेदारों […]

पीएम मोदी न्यूजीलैंड की यात्रा हैं. वो न्यूजीलैंड जहां की कुल आबादी में 6 फीसदी भारतीय हैं. हर साल यहां 80 हजार भारतीय पहुंचते हैं और 30 फीसदी छुट्टियां बिताने और घूमने के लिए आते हैं. भारतीय औसतन यहां 11 दिन बिताते हैं. भारतीयों के यहां आने का मकसद सिर्फ घूमना ही नहीं. अपने रिश्तेदारों और परिजनों से मिलना भी रहता है. इसके साथ वो दिल खोलकर खर्च करते हैं.

भारतीय मुद्रा की तुलना न्यूजीलैंड की करंसी से करते हैं तो बड़ा अंतर देखने को मिलता है. जानिए, भारत के 500 रुपए न्यूजीलैंड में जाकर कितने हो जाते हैं.

भारत के 500 रुपए न्यूजीलैंड में कितने?

न्यूजीलैंड डॉलर यहां की आधिकारिक करंसी है. इसे सांकेतिक रूप से NZD लिखते हैं जैसे भारतीय करंसी के INR लिखते हैं. भारतीय और न्यूजीलैंड की करंसी की तुलना करते हैं तो भारत के 100 रुपए न्यूजीलैंड जाकर मात्र 1.82 न्यूजीलैंड डॉलर हो जाते हैं. वहीं, न्यूजीलैंड में भारत के 500 रुपए की वैल्यू 9.09 न्यूजीलैंड डॉलर है.

यहां की करंसी को कंट्रोल और जारी करने का काम रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड है, जिसे Te Pūtea Matua के नाम से भी जाना जाता है. केंद्रीय बैंक, कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और टिकाऊ रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए, ऑफिशियल कैश रेट तय करके और मॉनेटरी पॉलिसी की देखरेख करके करंसी को मैनेज करता है.

रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड यहां की करंसी को कंट्रोल करता है.

न्यूजीलैंड की करंसी का इतिहास?

न्यूजीलैंड की करंसी को दुनियाभर में कीवी डॉलर भी कहते हैं. इसकी शुरुआत कई चरणों में हुई है. ब्रिटिश शासन के दौर में इस्तेमाल होने वाली मुद्रा से लेकर आधुनिक प्लासिटक के नोटों तक, यहां की करंसी ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं.

1840 में वेटांगी संधि के बाद न्यूजीलैंड पर ब्रिटिश शासन की शुरुआत हुई. उस दौर में ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग को आधिकारिक मुद्रा बनाया गया. शुरुआती सालों में अलगअलग देशों के सिक्के यहां चलने में थे, लेकिन धीरेधीरे ब्रिटिश करंसी ने यहां पर अपना रुतबा बढ़ाया. साल 1933 में न्यूजीलैंड ने अपनी नेशनल करंसी न्यूजीलैंड पाउंड जारी की, लेकिन इसकी वैल्यू ब्रिटिश पाउंड के बराबर रखी गई. यह एक बड़ा कदम था और धीरेधीरे करंसी का कंट्रोल सरकार और केंद्रीय बैंक के हाथों में गया.

न्यूजीलैंड में हर साल 80 हजार भारतीय पहुंचते हैं. फोटो: Pixabay

1934 में रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की शुरुआत हुई और करंसी जारी करने का अधिकार इस बैंक को मिला. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव 1967 में आया जब न्यूजीलैंड ने करंसी सिस्टम को बदला. पाउंडशिलिंगपेंस प्रणाली छोड़कर दशमलव प्रणाली अपनाई और न्यूजीलैंड डॉलर की शुरुआत की. और आज तक यही करंसी चलन में है.

जारी रहे बदलाव, अब प्लास्टिक के नोटों का ट्रेंड

न्यूजीलैंड के शुरुआती डॉलर में ब्रिटेन के शाही परिवार के तस्वीरें नजर आती थीं, लेकिन बाद में इन पर उनकी तस्वीरें नजर आईं जिन्होंने न्यूजीलैंड के इतिहास में अपना अमूल्य योगदान दिया था. करंसी में न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक, समाज सुधारक और देश की जानीमानी हस्तियों की फोटो छापी गईं. सिक्कों पर भी समयसमय पर बदलाव हुए और अब इस पर स्थानीय संस्कृति की छाप दिखती है.

यही नहीं, न्यूजीलैंड ने प्लास्टिक करंसी की शुरुआत करके नया इतिहास रचा था.1999 में पॉलीमर बैंकनोट जारी किए. यह दुनिया के शुरुआती देशों में शामिल था जिसने कागज की जगह प्लास्टिक नोट अपनाए.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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