जब से पाकिस्तान की इकोनॉमी को सुधारने के लिए आईएमएफ सामने आया और नए रिफॉर्म लागू करनी ना सिर्फ सिफारिशें दी बल्कि उन्हें लागू भी कराया है. तब से पड़ोसियों की ग्रोथ में नंबर्स के लिहाज से स्थिति थोड़ी सुधरी है. अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसे देखकर सभी हैरान है. पाकिस्तान को एक ऐसी जगह से कमाई हो रही है, जो पाक इकोनॉमी लाइफलाइन बन गया है. वो है विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों की ओर से भेजा गया पैसा यानी रेमिटेंस. जोकि मौजूदा समय में पाकिस्तान की ओर से होने वाले कुल एक्सपोर्ट से भी ज्यादा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पाकिस्तान को वित्त वर्ष 2026 में कुल रेमिटेंस के तौर पर रिकॉर्ड कितना पैसा मिला है.

रेमिटेंस का बनाया रिकॉर्ड
पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के अनुसार, पिछले फाइनेंशियल ईयर में, जो 30 जून को खत्म हुआ, देश को विदेशों में काम करने वाले लोगों से रिकॉर्ड 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर की रेमिटेंस मिली. यह रकम इसी दौरान हुए कुल एक्सपोर्ट से ज्यादा है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने सोशल मीडिया पर बताया कि वित्त वर्ष 2026 में वर्कर्स की रेमिटेंस 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर रही, जो वित्त वर्ष 2025 में मिली 38.3 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम से 8.6 प्रतिशत ज़्यादा है. वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने कहा कि यह आंकड़ा पाकिस्तान के इतिहास में “अब तक की सबसे ज्यादा सालाना रेमिटेंस” है. उन्होंने X पर कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों के अटूट भरोसे को दिखाती है और पाकिस्तान के बाहरी सेक्टर की मजबूती, विदेशी मुद्रा के मजबूत बफर और बेहतर होते मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल को मज़बूत करती है.
किन देशों से आया सबसे ज्यादा रेमिटेंस
सलाहकार ने इस आमद को एक रिकॉर्ड उपलब्धि बताया और पिछले तीन सालों में हुई बढ़ोतरी को “असाधारण” कहा, जो “दुनिया भर में लाखों मेहनती पाकिस्तानियों की वजह से” संभव हुई. डाटा से पता चला कि जून में रेमिटेंस आने के सबसे बड़े स्रोत सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात थे, इसके बाद यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका का नंबर आता है. 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा आमद वाले अन्य देशों में इटली और ओमान शामिल थे. हालांकि रेमिटेंस में 8.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सालदरसाल यह बढ़ोतरी FY25 में दर्ज की गई 26.6 प्रतिशत की ग्रोथ और वित्त वर्ष 2024 में हुई 10.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कम थी.
कुल एक्सपोर्ट से भी ज्यादा रेमिटेंस
खास बात तो ये है कि रेमिटेंस से आई रकम देश के कुल एक्सपोर्ट से भी काफी ज्यादा है. आंकड़ों को देखें तो रेमिटेंस की रकम नेट एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई से ज्यादा देखने को मिली है. वहीं देश को लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ, जिसकी भरपाई वर्कर्स की रेमिटेंस से हुई. यह रेमिटेंस पिछले कुछ सालों में विदेशी मुद्रा की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत या यूं कहें कि देश की इकोनॉमी की लाइफलाइन बन गई है.