गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
UP Shravasti News: महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने की अपील, सरकारी योजनओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास​ | कैदी नंबर 395 और 396 होंगे साहिल-मुस्कान, मेरठ जेल में बदलेगा पहनावा; काम भी हुआ तय​ | शे होप के निशाने पर विश्व रिकॉर्ड, आखिरी टी20 में बल्ला चला तो इतिहास रच देंगे वेस्टइंडीज के कप्तान!​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

Weather: क्या है सुपर-डुपर अल-नीनो? WMO के अलर्ट के बीच जानें भारत पर क्या होगा असर​

प्रशांत महासागर में बनने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना इन दिनों चर्चा में है. इसका नाम है अल नीनो. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के ताजा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रशांत महासागर के एक अहम हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत अधिक रहने का अनुमान है. इसे सुपरडुपर […]

प्रशांत महासागर में बनने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना इन दिनों चर्चा में है. इसका नाम है अल नीनो. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के ताजा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रशांत महासागर के एक अहम हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत अधिक रहने का अनुमान है. इसे सुपरडुपर अलनीनो कहा जा रहा है. इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर देश में एक जैसा मौसम होगा या हर जगह आपदा आएगी.

भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर में आम तौर पर पूर्व से पश्चिम की ओर हवाएं चलती हैं. ये हवाएं गर्म सतही पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की दिशा में धकेलती हैं. दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र की गहराई से अपेक्षाकृत ठंडा पानी ऊपर आता रहता है. अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ती हैं. गर्म पानी मध्य और पूर्वी प्रशांत की तरफ फैलने लगता है. इससे वहां समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. समुद्र और वातावरण के बीच यह बदलाव दुनिया के कई हिस्सों में हवा, तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है.

अलनीनो, सुपर अलनीनो और सुपरडुपर अलनीनो में अंतर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की शब्दावली में सुपर अलनीनो या सुपरडुपर अलनीनो कोई आधिकारिक श्रेणी नहीं है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन अलनीनो की ताकत को समुद्र के तापमान में बदलाव और संबंधित वैज्ञानिक संकेतकों के आधार पर बताता है. सुपर और सुपरडुपर जैसे शब्द मीडिया या कुछ मौसम विशेषज्ञ घटना को बहुत मजबूत बताने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

अलनीनाे के असर के कारण बारिश सामान्य से कम रह सकती है. फोटो: PTI

आमतौर पर अलनीनो को कमजोर, मध्यम, मजबूत या बहुत मजबूत कहा जाता है. इसका आकलन प्रशांत महासागर के तय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अंतर को देखकर किया जाता है. अलगअलग सूचकांक और समय औसत इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसलिए किसी शीर्षक में सुपरडुपर लिखा हो, तो उसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन की औपचारिक चेतावनी या अलग वैज्ञानिक श्रेणी समझना उचित नहीं माना जाएगा. हां, इसका व्यावहारिक मतलब यह हुआ कि अल नीनो बहुत मजबूती के साथ हमारे सामने आएगा. यह और अधिक तीव्रता का वर्णन भी करता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि मौजूदा घटना बहुत मजबूत हो सकती है और 1950 के बाद की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल हो सकती है.

अक्टूबरदिसंबर के अनुमान के क्या हैं मायने?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के 8 अक्टूबर 2026 के अपडेट के अनुसार, मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान अक्टूबरदिसंबर के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है. इस अवधि के लिए औसत तापमानअंतर लगभग 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान दिया गया है. यह एक मौसमी औसत का पूर्वानुमान है. इसका अर्थ यह नहीं है कि दुनिया के हर समुद्र का तापमान 3.7 डिग्री बढ़ेगा या हर जगह हवा का तापमान इतना ही बढ़ जाएगा.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन का अनुमान है कि अलनीनो दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंच सकता है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पूर्वानुमान में अनिश्चितता रहती है. मौसम किसी एक कारण से तय नहीं होता. समुद्रों की स्थिति, स्थानीय हवाएं, दूसरे जलवायु पैटर्न और भूमि की परिस्थितियां भी असर डालती हैं.

अलनीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में गर्मी, कम बारिश या भारी बारिश की संभावना है. फोटो: PTI

दुनिया में कहां बारिश बढ़ सकती है?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मौसमी अनुमान में मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना बताई गई है. अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, पूर्वी एशिया के तटीय इलाकों, अरब प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्सों और दक्षिणपूर्वी दक्षिण अमेरिका में भी कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश का संकेत है. ज्यादा बारिश का अर्थ हर जगह बाढ़ आना नहीं है. लेकिन यदि भारी बारिश स्थानीय मौसम और जमीन की स्थिति के साथ मिलती है, तो बाढ़ या भूस्खलन का जोखिम बढ़ सकता है. ऐसे जोखिम का सही अंदाजा स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनियों से ही लगाया जा सकता है.

कहां सूखे का खतरा बढ़ सकता है?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने पश्चिमी प्रशांत और भूमध्यरेखीय अटलांटिक के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है. दक्षिण प्रशांत से दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर तक भी शुष्क स्थिति का संकेत है. भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, कैरेबियन के कुछ क्षेत्रों और उत्तरपश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है.

कम बारिश का असर खेती, जलाशयों, पेयजल और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है. फिर भी यह हर जिले के लिए पक्की भविष्यवाणी नहीं है. मौसमी अनुमान संभावना बताते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति का पता समय के साथ स्थानीय पूर्वानुमानों से चलता है.

भारत पर क्या असर हो सकता है?

अल नीनो का संबंध भारत में मानसूनी बारिश के कमजोर होने की संभावना से जोड़ा जा रहा है. लेकिन हर अलनीनो वर्ष में भारत का मानसून एक जैसा नहीं रहता. भारतीय महासागर का डाइपोल, मौसम प्रणालियां और अन्य स्थानीय कारक भी बारिश को प्रभावित करते हैं.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भारतीय उपमहाद्वीप में अक्टूबरदिसंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश की संभावना बताई है. यह मौसमी संकेत है, किसी खास राज्य या शहर के लिए निश्चित भविष्यवाणी नहीं. किसानों, जल प्रबंधन से जुड़े विभागों और स्थानीय प्रशासन के लिए उपयोगी कदम यह है कि वे भारत मौसम विज्ञान विभाग के नियमित अपडेट पर नजर रखें.

लानीना, अलनीनो और सामान्य स्थिति

अलनीनो और लानीना, प्राकृतिक जलवायु प्रणाली की दो विपरीत अवस्थाएं हैं. अल नीनो में मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत का पानी सामान्य से गर्म होता है. लानीना में यही पानी सामान्य से ठंडा होता है और आम तौर पर पूर्वी हवाएं मजबूत रहती हैं. लानीना भी दुनिया के मौसम को प्रभावित कर सकती है. यह जरूरी नहीं कि लानीना का मतलब हर जगह ठंडा मौसम हो, या अल नीनो का मतलब हर जगह गर्मी और सूखा हो. असर क्षेत्र, मौसम, घटना की ताकत और अवधि के अनुसार बदलता है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की चेतावनी को कैसे समझें?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की चेतावनी का मतलब यह है कि आने वाले महीनों में कुछ क्षेत्रों में गर्मी, कम बारिश या भारी बारिश की संभावना है. यह किसी निश्चित तारीख की आपदा घोषणा नहीं है. संगठन देशों और मौसम विभागों को पहले से तैयारी करने के लिए बड़े पैमाने का संकेत देता है. लोगों के लिए सबसे जरूरी बात है कि वायरल शीर्षकों से घबराने के बजाय अपने इलाके की आधिकारिक मौसम चेतावनी पर ध्यान दें.

किसान फसल और सिंचाई की योजना स्थानीय सलाह के आधार पर बनाएं. गर्मी के दौरान पानी, छाया और स्वास्थ्यसुरक्षा का ध्यान रखें. बाढ़संभावित क्षेत्रों में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से गर्म होती दुनिया में इसके प्रभाव अधिक गंभीर महसूस हो सकते हैं. इसलिए इसे अकेले मौसम का कारण नहीं, बल्कि जोखिम बढ़ाने वाले एक बड़े कारक के रूप में समझना बेहतर है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY