UP Transfer: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की ट्रांसफरपोस्टिंग को लेकर आदेश जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारी अपने गृह जिले में तैनात नहीं रह सकेंगे। इसके अलावा, एक जगह 3 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके अधिकारियों का तबादला किया जाएगा।

इन अधिकारियों पर लागू होगा आदेश
चुनाव आयोग के निर्देशों के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी , रिटर्निंग ऑफिसर , सहायक रिटर्निंग ऑफिसर , SDM, ADM और तहसीलदार समेत चुनाव कार्यों में सीधे लगे दूसरे अधिकारी आएंगे। पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर, सबइंस्पेक्टर और उनसे ऊपर के अधिकारियों पर भी ये निर्देश लागू होंगे। इन निर्देशों का मकसद चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। ट्रांसफर के लिए 31 मई 2027 की अवधि को आधार बनाया जाएगा।
पिछले चुनाव में तैनाती वाले क्षेत्र में ड्यूटी नहीं
आदेश के मुताबिक, जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर और पुलिस इंस्पेक्टर, सबइंस्पेक्टर या उनसे ऊपर के अधिकारी पिछले चुनाव या उपचुनाव में जिस विधानसभा क्षेत्र या जिले में तैनात थे, उन्हें इस चुनाव में वहां तैनात नहीं किया जाएगा।
3 साल पूरे होने पर होगा तबादला
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी अधिकारी ने एक ही जगह पर तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, तो उसका वहां से तबादला किया जाएगा। इसके अलावा, चुनाव संबंधी तय मानकों के दायरे में आने वाले अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी।
लापरवाही पर 6 अधिकारी हो चुके हैं सस्पेंड
इससे पहले 26 अक्टूबर, सोमवार को निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दौरान लापरवाही पर 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश दिया था। मतदान केंद्र संख्या 21 और 26 पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। आयोग ने इससे पहले दोनों बूथ पर दोबारा मतदान कराने के निर्देश भी दिए थे।
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रिपोर्ट मिलने के बाद हुई कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने आगरा मंडल के मंडलायुक्त की 25 अक्टूबर को मिली रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लिया। मंडलायुक्त आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी भी हैं। आयोग के सचिव सुमन कुमार दास ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जारी निर्देश में कहा कि पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी मतदान केंद्रों के भीतर और आसपास प्रभावी निगरानी रखने और उचित नियंत्रण बनाए रखने में विफल रहे। आयोग ने पर्यवेक्षक पदों पर तैनात अधिकारियों की इस लापरवाही को गंभीर माना और कहा कि काम में ऐसी लापरवाही को किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जा सकता।
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